{"_id":"6abbb26a2f690e331e0c3d93","slug":"fsdg-grnoida-news-c-23-1-lko1064-107594-2026-09-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: शिक्षा, भरण-पोषण के लिए नाबालिग बेटे की हिस्से की संपत्ति बेचने की मां को मिली अनुमति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: शिक्षा, भरण-पोषण के लिए नाबालिग बेटे की हिस्से की संपत्ति बेचने की मां को मिली अनुमति
विज्ञापन
(अदालत से)
- फ्लैट में 15 वर्षीय पुत्र के एक-तिहाई हिस्से की बिक्री का मामला
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अदालत ने एक नाबालिग के हिस्से की संपत्ति बेचने की अनुमति उसकी मां को शर्तों के साथ दी है। अदालत ने कहा कि बिक्री से पहले यह देखना जरूरी है कि नाबालिग को वास्तविक जरूरत और स्पष्ट लाभ है या नहीं। कुरुक्षेत्र (हरियाणा) निवासी श्वेता दुरेजा ने अपने करीब 15 वर्षीय पुत्र की प्राकृतिक संरक्षिका के रूप में विविध वाद दायर किया था। इसमें ग्रेटर नोएडा के ओमीक्रॉन-3 सेक्टर में फ्लैट में पुत्र के एक-तिहाई हिस्से को बेचने की अनुमति मांगी गई थी। यह आवास श्वेता के पति अंकुर दुरेजा को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने आवंटित किया था। अंकुर की 25 फरवरी 2020 को मृत्यु हो गई। इसके बाद 27 जून 2024 को संपत्ति श्वेता, उनके बड़े बेटे शौर्य और नाबालिग पुत्र के नाम हस्तांतरित हुई। श्वेता ने कहा कि वह गृहिणी हैं और आय का कोई अन्य साधन नहीं है। पुत्र की शिक्षा, भरण-पोषण, इलाज और भविष्य में विवाह के खर्च के लिए धन की जरूरत है।
हालांकि जिला शासकीय अधिवक्ता दीवानी ने आपत्ति की। उनका कहना है कि नाबालिग के निकट संबंधियों को पक्षकार नहीं बनाया गया और बिक्री का उचित कारण नहीं दिखाया गया। अदालत के अनुसार जरूरत और नाबालिग का लाभ ही निर्णायक कसौटी है। दस्तावेजों के आधार पर उसने माना कि पुत्र को पिता की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार में हिस्सा मिला है। श्वेता अनुमति मांगने में सक्षम संरक्षिका हैं और बिक्री में वास्तविक आवश्यकता व स्पष्ट लाभ है। बिक्री से मिली रकम का 50 प्रतिशत पुत्र के बालिग होने या कोर्ट के अन्य आदेश तक किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में सावधि जमा (एफडी) में रखा जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुमति केवल प्रार्थना पत्र में बताए प्रयोजन और सीमा तक है। इसे संपत्ति पर पक्षकारों के स्वामित्व का निर्धारण नहीं माना जाएगा।
विज्ञापन
- फ्लैट में 15 वर्षीय पुत्र के एक-तिहाई हिस्से की बिक्री का मामला
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अदालत ने एक नाबालिग के हिस्से की संपत्ति बेचने की अनुमति उसकी मां को शर्तों के साथ दी है। अदालत ने कहा कि बिक्री से पहले यह देखना जरूरी है कि नाबालिग को वास्तविक जरूरत और स्पष्ट लाभ है या नहीं। कुरुक्षेत्र (हरियाणा) निवासी श्वेता दुरेजा ने अपने करीब 15 वर्षीय पुत्र की प्राकृतिक संरक्षिका के रूप में विविध वाद दायर किया था। इसमें ग्रेटर नोएडा के ओमीक्रॉन-3 सेक्टर में फ्लैट में पुत्र के एक-तिहाई हिस्से को बेचने की अनुमति मांगी गई थी। यह आवास श्वेता के पति अंकुर दुरेजा को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने आवंटित किया था। अंकुर की 25 फरवरी 2020 को मृत्यु हो गई। इसके बाद 27 जून 2024 को संपत्ति श्वेता, उनके बड़े बेटे शौर्य और नाबालिग पुत्र के नाम हस्तांतरित हुई। श्वेता ने कहा कि वह गृहिणी हैं और आय का कोई अन्य साधन नहीं है। पुत्र की शिक्षा, भरण-पोषण, इलाज और भविष्य में विवाह के खर्च के लिए धन की जरूरत है।
हालांकि जिला शासकीय अधिवक्ता दीवानी ने आपत्ति की। उनका कहना है कि नाबालिग के निकट संबंधियों को पक्षकार नहीं बनाया गया और बिक्री का उचित कारण नहीं दिखाया गया। अदालत के अनुसार जरूरत और नाबालिग का लाभ ही निर्णायक कसौटी है। दस्तावेजों के आधार पर उसने माना कि पुत्र को पिता की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार में हिस्सा मिला है। श्वेता अनुमति मांगने में सक्षम संरक्षिका हैं और बिक्री में वास्तविक आवश्यकता व स्पष्ट लाभ है। बिक्री से मिली रकम का 50 प्रतिशत पुत्र के बालिग होने या कोर्ट के अन्य आदेश तक किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में सावधि जमा (एफडी) में रखा जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुमति केवल प्रार्थना पत्र में बताए प्रयोजन और सीमा तक है। इसे संपत्ति पर पक्षकारों के स्वामित्व का निर्धारण नहीं माना जाएगा।
विज्ञापन