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Noida News: पहली बार जिले में स्थापित किए जाएंगे शौर्य, गोपाल वन
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कैराना के बीबी पुर हटिया में पौधशाला । संवाद
शामली। जिले में देश के वीर सैनिकों को सम्मान देने के लिए जहां शौर्य वन स्थापित किया जाएगा। वहीं, गोवंशों को धूप से बचाने के लिए गोपाल वन की स्थापना की जाएगी, जिसकी तैयारी वन विभाग ने कर ली है। डीएफओ जगदेव सिंह और क्षेत्रीय वन अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि पहली बार जिले में अधिकारियों के निर्देश पर ये वन क्षेत्र स्थापित किए जाएंगे।
अटल वन : भारत रत्न अटल विहारी वाजपेयी के नाम पर अटल वन स्थापित किया जाएगा। अटल वन का क्षेत्रफल एक हेक्टेयर होना चाहिए।
एकता वन : राष्ट्रीय एकता के सूत्रधार लौहपुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल के नाम पर एकता वन क्षेत्र स्थापित किया जाएगा। क्योंकि उन्होंने लोगों को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई थी।
सहजन भंडारा : इसके तहत वन क्षेत्र में सहजन के पौधे लगाए जायेंगे, साथ ही लोगों को भी इसके प्रति जागरूक किया जाएगा।
खाद्य वन : वानर और अन्य वन्य जीवों के भोजन के लिए फलों की पर्याप्त उपलब्धता के लिए शहरी क्षेत्र मेंं खाद्य वन की स्थापना की जाएगी, जिसमें कम से कम एक तिहाई पौधे फलदार प्रजाति के होंगे। इसके अलावा ग्राम वन, मित्र वन, शक्ति वन, बाल वनों की भी स्थापना की जाएगी।
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त्रिवेणी वन : वर्ष 2025 में प्रयागराज में गंगा, यमुना, सरस्वती नदियों के संगम क्षेत्र, त्रिवेणी क्षेत्र में महाकुंभ के सफल आयोजन की स्मृति में त्रिवेणी वन की स्थापना की जाएगी।
पवित्र धारा वृक्षारोपण : नदियों के दोनों तटों पर वृक्षारोपण किया जाएगा। इसके लिए जल्द भूमि तलाशी जा रही है।
ऑक्सी वन : वर्तमान समय में शहरी क्षेत्रों में एक्यूआई के उच्च स्तर के कारण पर्यावरणीय प्रदूषण की उत्पन्न हो गई है। बचाव के लिए आक्सी वन स्थापित किए जाए।
शौर्य वन : देश की सुरक्षा में वीर सेनानियों का अमूल्य योगदान रहता है, जो सुरक्षा हेतु अपना सर्वस्व बलिदान कर निरंतर राष्ट्र सेवा में रहते हैं। वीर सैनिकों को सम्मान देने के लिए शौर्य वन की स्थापना की जाएगी।
गोपाल वन : गोशालाओं के परिसर में गोपाल वन की स्थापना की जाएगी। क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण को गोपाल कहा जाता था। उन्हीं के नाम पर यह वन क्षेत्र स्थापित किया जाएगा।
-- - जिले में बढ़ गया 1.94 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र
शामली। पिछले तीन सालों में जिले में 1.94 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र बढ़ गया है। अब जिले में 1257.46 वर्गमीटर वन क्षेत्र है जबकि वर्ष 2023 में 1255.52 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन क्षेत्र था। इस बार 13.64 लाख पौधे जिलेभर में लगाने का लक्ष्य दिया गया है।
शामली जिला ऊन और कैराना रेंज में बंटा हुआ है। कैराना रेंज का मुख्यालय शामली में है। वहीं, ऊन रेंज का मुख्यालय झिंझाना में है। बरनावी, बीबी हटिया, अकबरपुर सुन्हैटी, मलकपुर, पठेर, दभेड़ी, बीबीपुर, पावटी, नाई नंगला, रतौंड़, टौड़ा वन ब्लॉक हैं। डीएफओ जगदेव सिंह, क्षेत्रीय वन अधिकारी राजेश कुमार का कहना है कि पिछले तीन साल में 1.94 वर्ग मीटर की बढ़ोतरी वन क्षेत्र में की गई है। हालांकि, पेड़ों कटान करने वाले 20 लोगों पर भी एक साल में कार्रवाई की गई है। सबसे अधिक वन क्षैत्र ऊन, कैराना क्षेत्र में बढ़ा है।
इस बार वन विभाग को 2.15 लाख जबकि ग्राम विकास, राजस्व, आवास विकास, नगर विकास, लोक निर्माण, पशुपालन, उद्योग, विद्युत, उच्च शिक्षा श्रम विभाग, स्वास्थ्य, परिवहन, गृह समेत विभिन्न विभागों को 11.49 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया है। जिले में इस बार कुल 13.64 लाख पौधे लगाए जाएंगे, जिसकी तैयारी कर ली गई है।
-- - पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करने वाले इन योद्धाओं को सलाम
शामली। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जिले के पर्यावरण प्रेमी भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। चाहे बलवा गांव की विदुषी हों या फिर रामड़ा गांव के मुस्तकीम और दयानंदनगर के जितेंद्र शर्मा हों, हर कोई समय निकालकर खुद के साथ-साथ लोगों से भी पौधरोपण करा रहे हैं। जिलाधिकारी और सामाजिक संगठन के लोग इन पर्यावरण प्रेमियों को सराहनीय कार्य के लिए सम्मानित कर चुके हैं।
- पेड़ कटते देखा तो लिया पौधरोपण का संकल्प
शामली के बलवा गांव के रहने वाले सुचित्र वशिष्ठ की पुत्री विदुषी अब तक जिलेभर के विभिन्न स्थानों पर 12 हजार से अधिक पौधे लगा चुकीं हैं। बताया कि पौध लगाने की प्रेरणा उसे उस समय मिली जब वर्ष 2016 में दिल्ली-सहारनपुर हाईवे निर्माण के दौरान पेड़ काटे जा रहे थे। विदुषी ने बताया कि उसने उसी समय परिजनों के सहयोग से पौधरोपण का संकल्प लिया था। जिलेभर में 12 हजार से अधिक आम, जामुन, नीम, पीपल के पौधे लगा चुकी हैं। यहीं नहीं, स्कूल कॉलेजों में जाकर लोगों को भी पौधरोपण के प्रति जागरूक करतीं हैं। जिलाधिकारी भी दो बार उसे सम्मानित कर चुके हैं।
- 16 साल से पौधरोपण अभियान चला रहे जितेंद्र
शहर के दयानंद नगर के रहने वाले जितेंद्र शर्मा ने बताया कि वह डेरा सच्चा सौदा आश्रम से जुड़े हुए हैं। अन्य को देखकर वर्ष 2009 में उन्होंने जिले में पौधरोपण अभियान की शुरूआत की थी। अब तक पांच हजार से अधिक पौधे लगवा चुके हैं। उनके साथ अंकित बंसल, मुकेश वर्मा, अजय शर्मा आदि भी जुड़े हैं। कई सामाजिक संगठन अब तक जितेंद्र और उनके सहयोगियों को सम्मानित कर चुके हैं। लोगों से भी अपील की है कि पर्यावरण बचाने के लिए हर हाल में अधिक से अधिक पौधरोपण करें।
- 250 लोगों को जोड़कर पौधरोपण करा रहे मुस्तकीम
कैराना के रामड़ा गांव के रहने वाले मुस्तकीम ने बताया कि वह खेतीबाड़ी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। उन्होंने यमुना किनारे बसे गांवों और अन्य स्थानों पर पौधरोपण अभियान की शुरूआत की थी। बताया कि केवट मल्लाह एकता सेवा समिति से जुड़कर अब तक लोगों के सहयेाग से बीस हजार से अधिक पौधे लगा चुके हैं। भीम सिंह रावत, शाहरुख मंडावर, इकबाल हसन, मास्टर सोहनपाल, मास्टर राकेश, मास्टर अनीस, गुलजार अलवी, कासिम अलवी भी सोहनपाल मास्टर, नरेश शर्मा आदि उनके साथ जुड़े हुए हैं। सराहनीय कार्य के लिए कई सामाजिक संगठनों के लोग उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।
- विरासत वृक्ष डायरी में शामली का 100 साल पुराना पिलखन का पेड़ भी शामिल
वन विभाग ने पुराने पेड़ों का सर्वे कर शासन को रिपोर्ट भेजी थी। जिसमें शामली जिले से दो सौ साल से पुराने दो पेड़ शामिल थे। इसमें सहकारी गन्ना समिति शामली के परिसर में लगा पिलखन का पेड़ और दूसरा जलालाबाद गांव में बरगद का पेड़ शामिल था, जो ग्राम पंचायत की भूमि में खड़ा है। डीएफओ जगदेव ने बताया कि दोनों विरासत वृक्षों के बारे में लोगों को भी जानकारी दी जा रही है।
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अटल वन : भारत रत्न अटल विहारी वाजपेयी के नाम पर अटल वन स्थापित किया जाएगा। अटल वन का क्षेत्रफल एक हेक्टेयर होना चाहिए।
एकता वन : राष्ट्रीय एकता के सूत्रधार लौहपुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल के नाम पर एकता वन क्षेत्र स्थापित किया जाएगा। क्योंकि उन्होंने लोगों को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई थी।
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सहजन भंडारा : इसके तहत वन क्षेत्र में सहजन के पौधे लगाए जायेंगे, साथ ही लोगों को भी इसके प्रति जागरूक किया जाएगा।
खाद्य वन : वानर और अन्य वन्य जीवों के भोजन के लिए फलों की पर्याप्त उपलब्धता के लिए शहरी क्षेत्र मेंं खाद्य वन की स्थापना की जाएगी, जिसमें कम से कम एक तिहाई पौधे फलदार प्रजाति के होंगे। इसके अलावा ग्राम वन, मित्र वन, शक्ति वन, बाल वनों की भी स्थापना की जाएगी।
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त्रिवेणी वन : वर्ष 2025 में प्रयागराज में गंगा, यमुना, सरस्वती नदियों के संगम क्षेत्र, त्रिवेणी क्षेत्र में महाकुंभ के सफल आयोजन की स्मृति में त्रिवेणी वन की स्थापना की जाएगी।
पवित्र धारा वृक्षारोपण : नदियों के दोनों तटों पर वृक्षारोपण किया जाएगा। इसके लिए जल्द भूमि तलाशी जा रही है।
ऑक्सी वन : वर्तमान समय में शहरी क्षेत्रों में एक्यूआई के उच्च स्तर के कारण पर्यावरणीय प्रदूषण की उत्पन्न हो गई है। बचाव के लिए आक्सी वन स्थापित किए जाए।
शौर्य वन : देश की सुरक्षा में वीर सेनानियों का अमूल्य योगदान रहता है, जो सुरक्षा हेतु अपना सर्वस्व बलिदान कर निरंतर राष्ट्र सेवा में रहते हैं। वीर सैनिकों को सम्मान देने के लिए शौर्य वन की स्थापना की जाएगी।
गोपाल वन : गोशालाओं के परिसर में गोपाल वन की स्थापना की जाएगी। क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण को गोपाल कहा जाता था। उन्हीं के नाम पर यह वन क्षेत्र स्थापित किया जाएगा।
शामली। पिछले तीन सालों में जिले में 1.94 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र बढ़ गया है। अब जिले में 1257.46 वर्गमीटर वन क्षेत्र है जबकि वर्ष 2023 में 1255.52 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन क्षेत्र था। इस बार 13.64 लाख पौधे जिलेभर में लगाने का लक्ष्य दिया गया है।
शामली जिला ऊन और कैराना रेंज में बंटा हुआ है। कैराना रेंज का मुख्यालय शामली में है। वहीं, ऊन रेंज का मुख्यालय झिंझाना में है। बरनावी, बीबी हटिया, अकबरपुर सुन्हैटी, मलकपुर, पठेर, दभेड़ी, बीबीपुर, पावटी, नाई नंगला, रतौंड़, टौड़ा वन ब्लॉक हैं। डीएफओ जगदेव सिंह, क्षेत्रीय वन अधिकारी राजेश कुमार का कहना है कि पिछले तीन साल में 1.94 वर्ग मीटर की बढ़ोतरी वन क्षेत्र में की गई है। हालांकि, पेड़ों कटान करने वाले 20 लोगों पर भी एक साल में कार्रवाई की गई है। सबसे अधिक वन क्षैत्र ऊन, कैराना क्षेत्र में बढ़ा है।
इस बार वन विभाग को 2.15 लाख जबकि ग्राम विकास, राजस्व, आवास विकास, नगर विकास, लोक निर्माण, पशुपालन, उद्योग, विद्युत, उच्च शिक्षा श्रम विभाग, स्वास्थ्य, परिवहन, गृह समेत विभिन्न विभागों को 11.49 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया है। जिले में इस बार कुल 13.64 लाख पौधे लगाए जाएंगे, जिसकी तैयारी कर ली गई है।
शामली। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जिले के पर्यावरण प्रेमी भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। चाहे बलवा गांव की विदुषी हों या फिर रामड़ा गांव के मुस्तकीम और दयानंदनगर के जितेंद्र शर्मा हों, हर कोई समय निकालकर खुद के साथ-साथ लोगों से भी पौधरोपण करा रहे हैं। जिलाधिकारी और सामाजिक संगठन के लोग इन पर्यावरण प्रेमियों को सराहनीय कार्य के लिए सम्मानित कर चुके हैं।
- पेड़ कटते देखा तो लिया पौधरोपण का संकल्प
शामली के बलवा गांव के रहने वाले सुचित्र वशिष्ठ की पुत्री विदुषी अब तक जिलेभर के विभिन्न स्थानों पर 12 हजार से अधिक पौधे लगा चुकीं हैं। बताया कि पौध लगाने की प्रेरणा उसे उस समय मिली जब वर्ष 2016 में दिल्ली-सहारनपुर हाईवे निर्माण के दौरान पेड़ काटे जा रहे थे। विदुषी ने बताया कि उसने उसी समय परिजनों के सहयोग से पौधरोपण का संकल्प लिया था। जिलेभर में 12 हजार से अधिक आम, जामुन, नीम, पीपल के पौधे लगा चुकी हैं। यहीं नहीं, स्कूल कॉलेजों में जाकर लोगों को भी पौधरोपण के प्रति जागरूक करतीं हैं। जिलाधिकारी भी दो बार उसे सम्मानित कर चुके हैं।
- 16 साल से पौधरोपण अभियान चला रहे जितेंद्र
शहर के दयानंद नगर के रहने वाले जितेंद्र शर्मा ने बताया कि वह डेरा सच्चा सौदा आश्रम से जुड़े हुए हैं। अन्य को देखकर वर्ष 2009 में उन्होंने जिले में पौधरोपण अभियान की शुरूआत की थी। अब तक पांच हजार से अधिक पौधे लगवा चुके हैं। उनके साथ अंकित बंसल, मुकेश वर्मा, अजय शर्मा आदि भी जुड़े हैं। कई सामाजिक संगठन अब तक जितेंद्र और उनके सहयोगियों को सम्मानित कर चुके हैं। लोगों से भी अपील की है कि पर्यावरण बचाने के लिए हर हाल में अधिक से अधिक पौधरोपण करें।
- 250 लोगों को जोड़कर पौधरोपण करा रहे मुस्तकीम
कैराना के रामड़ा गांव के रहने वाले मुस्तकीम ने बताया कि वह खेतीबाड़ी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। उन्होंने यमुना किनारे बसे गांवों और अन्य स्थानों पर पौधरोपण अभियान की शुरूआत की थी। बताया कि केवट मल्लाह एकता सेवा समिति से जुड़कर अब तक लोगों के सहयेाग से बीस हजार से अधिक पौधे लगा चुके हैं। भीम सिंह रावत, शाहरुख मंडावर, इकबाल हसन, मास्टर सोहनपाल, मास्टर राकेश, मास्टर अनीस, गुलजार अलवी, कासिम अलवी भी सोहनपाल मास्टर, नरेश शर्मा आदि उनके साथ जुड़े हुए हैं। सराहनीय कार्य के लिए कई सामाजिक संगठनों के लोग उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।
- विरासत वृक्ष डायरी में शामली का 100 साल पुराना पिलखन का पेड़ भी शामिल
वन विभाग ने पुराने पेड़ों का सर्वे कर शासन को रिपोर्ट भेजी थी। जिसमें शामली जिले से दो सौ साल से पुराने दो पेड़ शामिल थे। इसमें सहकारी गन्ना समिति शामली के परिसर में लगा पिलखन का पेड़ और दूसरा जलालाबाद गांव में बरगद का पेड़ शामिल था, जो ग्राम पंचायत की भूमि में खड़ा है। डीएफओ जगदेव ने बताया कि दोनों विरासत वृक्षों के बारे में लोगों को भी जानकारी दी जा रही है।