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Noida News: नोएडा में बढ़ा फुटबॉल का क्रेज, बेटियां भी गोल के सपनों को दे रहीं उड़ान
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- फुटबॉल अकादमियों में बढ़ रही लड़कियों की भागीदारी, कोच बोले- खेल संस्कृति मजबूत होगी तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ेगी पहचान
आदित्य प्रताप सिंह
नोएडा। फीफा विश्व कप का रोमांच अब केवल टीवी स्क्रीन तक सीमित नहीं है। इसका असर नोएडा के फुटबॉल मैदानों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। शहर की फुटबॉल अकादमियों में लड़कों के साथ लड़कियों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। कोचों का मानना है कि भारतीय महिला फुटबॉल टीम के बेहतर प्रदर्शन और खेल के बढ़ते आकर्षण के कारण बेटियां भी अब फुटबॉल को करियर के रूप में अपनाने लगी हैं। वर्तमान में फीफा विश्व रैंकिंग में भारतीय महिला टीम 68वें और पुरुष टीम 138वें स्थान पर है।
सेक्टर-44 स्थित नॉर्दर्न यूनाइटेड क्लब में हाल ही में आयोजित ट्रायल में लड़कों और लड़कियों की भागीदारी लगभग बराबर रही। क्लब के कोच केशव ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में फुटबॉल के प्रति युवाओं का रुझान तेजी से बढ़ा है और क्रिकेट के बाद यह सबसे तेजी से लोकप्रिय होने वाला खेल बन रहा है। सेक्टर-132 स्थित स्टार स्ट्राइकर अकादमी के कोच परिणय सिंह गोंसाई ने बताया कि उनकी अकादमी में करीब 175 खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं, जिनमें लगभग 30 प्रतिशत लड़कियां हैं। वहीं, सेक्टर-141 स्थित फूटी फेमीज के संस्थापक अर्को भट्टाचार्य का कहना है कि पहले खेल संस्कृति विकसित करनी होगी, तभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार सफल खिलाड़ी तैयार होंगे।
कई खिलाड़ी पारिवारिक कारणों से खेल छोड़ देती हैं-
फुटबॉल कोच योगेंद्र सिंह और अशोक कुमार का कहना है कि छोटी उम्र तक अभिभावक बेटियों को खेल के लिए प्रोत्साहित करते हैं, लेकिन सीनियर स्तर पर पहुंचते ही कई खिलाड़ी पारिवारिक कारणों से खेल छोड़ देती हैं। उनका मानना है कि यदि परिवारों का सहयोग लगातार मिलता रहे तो नोएडा की बेटियां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान बना सकती हैं।
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खिलाड़ियों की जुबानी-
परिवार के सहयोग से नेशनल, मंडल और जिला स्तर तक खेलने का मौका मिला। -आकांक्षा सिंह
मेरा लक्ष्य स्टेट और नेशनल स्तर पर खेलकर देश का नाम रोशन करना है। -आद्या शर्मा
लड़कियों की टीम कम होने से कई बार लड़कों के साथ खेलना पड़ता है। -सोनाक्षी रॉय
जब भी मैदान पर उतरती हूं, अपना शत-प्रतिशत देने की कोशिश करती हूं। -राधिका
जिला स्तर पर खेल चुकी हूं, अब भारत का प्रतिनिधित्व करना मेरा सपना है। -टीना
अब फुटबॉल मेरा जुनून बन चुका है, भविष्य में विदेश में भी खेलना चाहती हूं। -मंदिरा
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आदित्य प्रताप सिंह
नोएडा। फीफा विश्व कप का रोमांच अब केवल टीवी स्क्रीन तक सीमित नहीं है। इसका असर नोएडा के फुटबॉल मैदानों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। शहर की फुटबॉल अकादमियों में लड़कों के साथ लड़कियों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। कोचों का मानना है कि भारतीय महिला फुटबॉल टीम के बेहतर प्रदर्शन और खेल के बढ़ते आकर्षण के कारण बेटियां भी अब फुटबॉल को करियर के रूप में अपनाने लगी हैं। वर्तमान में फीफा विश्व रैंकिंग में भारतीय महिला टीम 68वें और पुरुष टीम 138वें स्थान पर है।
सेक्टर-44 स्थित नॉर्दर्न यूनाइटेड क्लब में हाल ही में आयोजित ट्रायल में लड़कों और लड़कियों की भागीदारी लगभग बराबर रही। क्लब के कोच केशव ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में फुटबॉल के प्रति युवाओं का रुझान तेजी से बढ़ा है और क्रिकेट के बाद यह सबसे तेजी से लोकप्रिय होने वाला खेल बन रहा है। सेक्टर-132 स्थित स्टार स्ट्राइकर अकादमी के कोच परिणय सिंह गोंसाई ने बताया कि उनकी अकादमी में करीब 175 खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं, जिनमें लगभग 30 प्रतिशत लड़कियां हैं। वहीं, सेक्टर-141 स्थित फूटी फेमीज के संस्थापक अर्को भट्टाचार्य का कहना है कि पहले खेल संस्कृति विकसित करनी होगी, तभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार सफल खिलाड़ी तैयार होंगे।
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कई खिलाड़ी पारिवारिक कारणों से खेल छोड़ देती हैं-
फुटबॉल कोच योगेंद्र सिंह और अशोक कुमार का कहना है कि छोटी उम्र तक अभिभावक बेटियों को खेल के लिए प्रोत्साहित करते हैं, लेकिन सीनियर स्तर पर पहुंचते ही कई खिलाड़ी पारिवारिक कारणों से खेल छोड़ देती हैं। उनका मानना है कि यदि परिवारों का सहयोग लगातार मिलता रहे तो नोएडा की बेटियां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान बना सकती हैं।
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खिलाड़ियों की जुबानी-
परिवार के सहयोग से नेशनल, मंडल और जिला स्तर तक खेलने का मौका मिला। -आकांक्षा सिंह
मेरा लक्ष्य स्टेट और नेशनल स्तर पर खेलकर देश का नाम रोशन करना है। -आद्या शर्मा
लड़कियों की टीम कम होने से कई बार लड़कों के साथ खेलना पड़ता है। -सोनाक्षी रॉय
जब भी मैदान पर उतरती हूं, अपना शत-प्रतिशत देने की कोशिश करती हूं। -राधिका
जिला स्तर पर खेल चुकी हूं, अब भारत का प्रतिनिधित्व करना मेरा सपना है। -टीना
अब फुटबॉल मेरा जुनून बन चुका है, भविष्य में विदेश में भी खेलना चाहती हूं। -मंदिरा