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स्मार्ट विलेज योजना में पांच और गांव जुड़े
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स्मार्ट विलेज योजना में पांच और गांव जुड़े
ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण ने जिन 10 गांवों की जमीन ली थी, उनको स्मार्ट विलेज बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। यमुना प्राधिकरण के मुताबिक अब तक 96 गांव यमुना प्राधिकरण के अधीन आ चुके हैं। इसमें से 29 गांवों की जमीन लेकर सेक्टर विकसित किए जा रहे हैं। इन 29 गांवों को स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित करने की योजना है।
2020 के अंत तक 10 गांव स्मार्ट विलेज बनाने का लक्ष्य है, जिनमें से पांच गांवों में क्या-क्या कार्य होने हैं, इसका खाका पहले बन चुका है,। ये गांव अच्छेजा बुजुर्ग, डूंगरपुर रीलका, रामपुर बांगर, निलौनी शाहपुर व मिर्जापुर हैं। इन गांवों में विकास कार्यों के लिए टेंडर भी हो चुका है। हालांकि कोई कॉन्ट्रैक्टर नहीं आने के कारण फिर से टेंडर निकाले जा रहे हैं। वहीं पांच और गांवों को स्मार्ट विलेज बनाने की रिपोर्ट बनाई गई है। ये पांच गांव पचोखरा, चांदपुर, मूंजखेड़ा, उस्मानपुर और आछेपुर हैं। हर गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा व पोषण पर सबसे ज्यादा फोकस होगा। इन गांवों में स्कूल व अस्पताल के इंतजाम किए जाएंगे।
इन गांवों के ठोस व गीले कचरे के निस्तारण की व्यवस्था की जाएगी। पानी की आपूर्ति की जाएगी, जिससे कि लोग साफ पानी पी सकें। हर गांव में कौशल विकास केंद्र खुलेंगे। भूजल स्तर से गिरने से बचाने के लिए तालाब व अन्य सभी स्रोत विकसित किए जाएंगे। इन गांवों में सोलर सिस्टम पर जोर होगा, जिससे कि बिजली पर निर्भरता कम रहे। जलापूर्ति के उपकरणों को सोलर पावर से चलाने की योजना है। हर गांव पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पहले चरण के 10 गांवों के विकास पर 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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ई-चौपाल से हो सकेगा सभी बिलों का भुगतान
यमुना प्राधिकरण स्मार्ट विलेज के साथ ही गांवों में ई-चौपाल की सुविधा देगा। इसके तहत हर गांव में एक सेंटर बनाकर वहां कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर लगाए जाएंगे। ई-चौपाल केंद्र पर ग्रामीण बिजली, पानी, टेलीफोन व मोबाइल के बिल जमा करा सकेंगे। आधार अपटेड करना हो या फिर ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करना हो, सब कुछ इसी सेंटर से हो जाएगा। रेलवे टिकट भी इसी सेंटर से हो सकेगा। छात्रों को किसी नौकरी या दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन करना हो, वह भी इसी सेंटर से हो सकेगा। एक सेंटर बनाने में करीब 1.70 लाख रुपये खर्च होंगे।
यमुना प्राधिकरण सेक्टरों के साथ ही गांवों में भी समान विकास करना चाह रहा है। जिससे दोनों के बीच कोई फर्क नहीं रहे। स्मार्ट विलेज योजना उसी को ध्यान में रखकर शुरू की गई है। चरणबद्ध तरीके से सभी गांवों को स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। - डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ यमुना प्राधिकरण।
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ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण ने जिन 10 गांवों की जमीन ली थी, उनको स्मार्ट विलेज बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। यमुना प्राधिकरण के मुताबिक अब तक 96 गांव यमुना प्राधिकरण के अधीन आ चुके हैं। इसमें से 29 गांवों की जमीन लेकर सेक्टर विकसित किए जा रहे हैं। इन 29 गांवों को स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित करने की योजना है।
2020 के अंत तक 10 गांव स्मार्ट विलेज बनाने का लक्ष्य है, जिनमें से पांच गांवों में क्या-क्या कार्य होने हैं, इसका खाका पहले बन चुका है,। ये गांव अच्छेजा बुजुर्ग, डूंगरपुर रीलका, रामपुर बांगर, निलौनी शाहपुर व मिर्जापुर हैं। इन गांवों में विकास कार्यों के लिए टेंडर भी हो चुका है। हालांकि कोई कॉन्ट्रैक्टर नहीं आने के कारण फिर से टेंडर निकाले जा रहे हैं। वहीं पांच और गांवों को स्मार्ट विलेज बनाने की रिपोर्ट बनाई गई है। ये पांच गांव पचोखरा, चांदपुर, मूंजखेड़ा, उस्मानपुर और आछेपुर हैं। हर गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा व पोषण पर सबसे ज्यादा फोकस होगा। इन गांवों में स्कूल व अस्पताल के इंतजाम किए जाएंगे।
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इन गांवों के ठोस व गीले कचरे के निस्तारण की व्यवस्था की जाएगी। पानी की आपूर्ति की जाएगी, जिससे कि लोग साफ पानी पी सकें। हर गांव में कौशल विकास केंद्र खुलेंगे। भूजल स्तर से गिरने से बचाने के लिए तालाब व अन्य सभी स्रोत विकसित किए जाएंगे। इन गांवों में सोलर सिस्टम पर जोर होगा, जिससे कि बिजली पर निर्भरता कम रहे। जलापूर्ति के उपकरणों को सोलर पावर से चलाने की योजना है। हर गांव पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पहले चरण के 10 गांवों के विकास पर 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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ई-चौपाल से हो सकेगा सभी बिलों का भुगतान
यमुना प्राधिकरण स्मार्ट विलेज के साथ ही गांवों में ई-चौपाल की सुविधा देगा। इसके तहत हर गांव में एक सेंटर बनाकर वहां कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर लगाए जाएंगे। ई-चौपाल केंद्र पर ग्रामीण बिजली, पानी, टेलीफोन व मोबाइल के बिल जमा करा सकेंगे। आधार अपटेड करना हो या फिर ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करना हो, सब कुछ इसी सेंटर से हो जाएगा। रेलवे टिकट भी इसी सेंटर से हो सकेगा। छात्रों को किसी नौकरी या दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन करना हो, वह भी इसी सेंटर से हो सकेगा। एक सेंटर बनाने में करीब 1.70 लाख रुपये खर्च होंगे।
यमुना प्राधिकरण सेक्टरों के साथ ही गांवों में भी समान विकास करना चाह रहा है। जिससे दोनों के बीच कोई फर्क नहीं रहे। स्मार्ट विलेज योजना उसी को ध्यान में रखकर शुरू की गई है। चरणबद्ध तरीके से सभी गांवों को स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। - डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ यमुना प्राधिकरण।