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Noida News: यमुना प्राधिकरण में बनेगी देश की पहली आस्का लैब
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-चिकित्सा उपकरणों का होगा अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण, लैब के लिए आठ कंपनियां आईं आगे
-पीपीपी मॉडल पर किया जाएगा निर्माण, पूरी दुनिया में होगा उपकरणों का निर्यात
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-28 स्थित मेडिकल डिवाइस पार्क में आस्का लैब बनेगी। इसके लिए आठ कंपनियां प्री-बिड बैठक में शामिल हुई हैं और प्रक्रिया में शामिल होने की इच्छा जता चुकी हैं। अधिकारियों का कहना है कि चिकित्सा उपकरणों के अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण के लिए यह देश की पहली लैब होगी। इसकी स्थापना के बाद पूरी दुनिया में चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति करना यहां की कंपनियों के लिए संभव हो सकेगा।
प्राधिकरण के मुताबिक पीपीपी मॉडल पर आस्का लैब को विकसित किया जाना है। लैब के लिए बिल्डिंग का निर्माण प्राधिकरण खुद भी कर सकता है। प्री-बिड बैठक में कंपनियों से केवल जमीन उपलब्ध कराने पर भी सुझाव लिया गया।
एसीईओ शैलेंद्र कुमार भाटिया ने बताया कि महाराष्ट्र की बायोजेड इंजीनियरिंग, कर्नाटक की एएलएस टेस्टिंग लैब, राजस्थान की क्वालिटेक समूह, गुजरात की एक्यूप्रेक फार्मा के अलावा बायोसाइंसेज इंडिया, सुक्र फार्मा, एएंडए लैब व वैगमाइन एंटरप्राइजेज ने भी टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने के लिए प्री-बिड बैठक में सहभागिता की है। मेडिकल डिवाइस पार्क के बाहर की कंपनियां भी यहां अपने उपकरणों की जांच करा सकेंगी।
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अभी तक उपकरणों की जांच जापान और दूसरी जगहों से करानी होती थी। आस्का लैब जापान के मेडिकल एक्सीलेंस जापान-एमईजे की निगरानी में तैयार होगी। इसके लिए पहले ही एमईजे से अनुबंध हो चुका है।
इन उपकरणों की हो सकेगी जांच
- डायग्नोस्टिक और इमेजिंग/रेडियोलॉजी उपकरण (जैसे-एक्सरे, एमआरआई आदि)
- इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल मेडिकल डिवाइस
- इंप्लांटेबल डिवाइस
- इन-विट्रो डायग्नोस्टिक डिवाइस
- सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट, कंज्यूमेबल और डिस्पोजेबल गुड्स (सिरिंज, ग्लव्स आदि)
- एआई-इनेबल्ड सॉफ्टवेयर और डिजिटल हेल्थ वियरेबल्स
- स्टेराइल प्रोडक्ट और पुनर्वास/सहायक उपकरण
- ड्रग-डिवाइस कॉम्बिनेशन उत्पाद
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-पीपीपी मॉडल पर किया जाएगा निर्माण, पूरी दुनिया में होगा उपकरणों का निर्यात
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-28 स्थित मेडिकल डिवाइस पार्क में आस्का लैब बनेगी। इसके लिए आठ कंपनियां प्री-बिड बैठक में शामिल हुई हैं और प्रक्रिया में शामिल होने की इच्छा जता चुकी हैं। अधिकारियों का कहना है कि चिकित्सा उपकरणों के अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण के लिए यह देश की पहली लैब होगी। इसकी स्थापना के बाद पूरी दुनिया में चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति करना यहां की कंपनियों के लिए संभव हो सकेगा।
प्राधिकरण के मुताबिक पीपीपी मॉडल पर आस्का लैब को विकसित किया जाना है। लैब के लिए बिल्डिंग का निर्माण प्राधिकरण खुद भी कर सकता है। प्री-बिड बैठक में कंपनियों से केवल जमीन उपलब्ध कराने पर भी सुझाव लिया गया।
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एसीईओ शैलेंद्र कुमार भाटिया ने बताया कि महाराष्ट्र की बायोजेड इंजीनियरिंग, कर्नाटक की एएलएस टेस्टिंग लैब, राजस्थान की क्वालिटेक समूह, गुजरात की एक्यूप्रेक फार्मा के अलावा बायोसाइंसेज इंडिया, सुक्र फार्मा, एएंडए लैब व वैगमाइन एंटरप्राइजेज ने भी टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने के लिए प्री-बिड बैठक में सहभागिता की है। मेडिकल डिवाइस पार्क के बाहर की कंपनियां भी यहां अपने उपकरणों की जांच करा सकेंगी।
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अभी तक उपकरणों की जांच जापान और दूसरी जगहों से करानी होती थी। आस्का लैब जापान के मेडिकल एक्सीलेंस जापान-एमईजे की निगरानी में तैयार होगी। इसके लिए पहले ही एमईजे से अनुबंध हो चुका है।
इन उपकरणों की हो सकेगी जांच
- डायग्नोस्टिक और इमेजिंग/रेडियोलॉजी उपकरण (जैसे-एक्सरे, एमआरआई आदि)
- इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल मेडिकल डिवाइस
- इंप्लांटेबल डिवाइस
- इन-विट्रो डायग्नोस्टिक डिवाइस
- सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट, कंज्यूमेबल और डिस्पोजेबल गुड्स (सिरिंज, ग्लव्स आदि)
- एआई-इनेबल्ड सॉफ्टवेयर और डिजिटल हेल्थ वियरेबल्स
- स्टेराइल प्रोडक्ट और पुनर्वास/सहायक उपकरण
- ड्रग-डिवाइस कॉम्बिनेशन उत्पाद