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Noida News: काम पूरा कराने के बाद कंपनी पर 6.59 करोड़ रुपये बकाया रोकने का आरोप
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संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। सेक्टर-58 थाना पुलिस ने गेल (इंडिया) लिमिटेड से जुड़े पाइपलाइन प्रोजेक्ट का काम कराने के बाद करीब 6.59 करोड़ रुपये की बकाया राशि नहीं देने के आरोप में टेक्नो ग्लोबल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (टीजीएसपीएल) के प्रबंध निदेशक और निदेशक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किया है। ओडिशा के भुवनेश्वर निवासी देवाशीष राय ने कंपनी के अधिकारियों पर वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
पुलिस को दी शिकायत में देवाशीष ने बताया कि कंपनी ओडिसी एडवांस्ड टेलीमैटिक्स सिस्टम्स (ओएटीएस) ने टीजीएसपीएल के साथ वर्ष 2019 में जगदीशपुर-हल्दिया-बोकारो-धामरा पाइपलाइन परियोजना के तहत काम करने का समझौता किया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक परियोजना का काम उनकी कंपनी ने पूरा किया जो कि वर्तमान में संचालित है। आरोप है कि परियोजना का ओएटीएस को दिया गया मूल्य करीब 28.50 करोड़ रुपये था, जबकि संबंधित गेल वर्क ऑर्डर की कीमत करीब 32.03 करोड़ रुपये थी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि दोनों कंपनियों के बीच हुए समझौते के मुताबिक गेल से मिलने वाली राशि कैनरा बैंक के एस्क्रो खाते के जरिए भेजी जानी थी। भुगतान में टीजीएसपीएल का हिस्सा 11 प्रतिशत और ओएटीएस का हिस्सा 89 प्रतिशत तय था। आरोप है कि टीजीएसपीएल ने इस व्यवस्था का पालन नहीं किया और गेल से प्राप्त भुगतान पहले सीधे अपने पास लिया तथा बाद में एस्क्रो खाते में स्थानांतरित किया। पुलिस को दी शिकायत में कुल लंबित परियोजना भुगतान करीब 6.59 करोड़ रुपये बताया गया है।
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नोएडा। सेक्टर-58 थाना पुलिस ने गेल (इंडिया) लिमिटेड से जुड़े पाइपलाइन प्रोजेक्ट का काम कराने के बाद करीब 6.59 करोड़ रुपये की बकाया राशि नहीं देने के आरोप में टेक्नो ग्लोबल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (टीजीएसपीएल) के प्रबंध निदेशक और निदेशक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किया है। ओडिशा के भुवनेश्वर निवासी देवाशीष राय ने कंपनी के अधिकारियों पर वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
पुलिस को दी शिकायत में देवाशीष ने बताया कि कंपनी ओडिसी एडवांस्ड टेलीमैटिक्स सिस्टम्स (ओएटीएस) ने टीजीएसपीएल के साथ वर्ष 2019 में जगदीशपुर-हल्दिया-बोकारो-धामरा पाइपलाइन परियोजना के तहत काम करने का समझौता किया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक परियोजना का काम उनकी कंपनी ने पूरा किया जो कि वर्तमान में संचालित है। आरोप है कि परियोजना का ओएटीएस को दिया गया मूल्य करीब 28.50 करोड़ रुपये था, जबकि संबंधित गेल वर्क ऑर्डर की कीमत करीब 32.03 करोड़ रुपये थी।
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शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि दोनों कंपनियों के बीच हुए समझौते के मुताबिक गेल से मिलने वाली राशि कैनरा बैंक के एस्क्रो खाते के जरिए भेजी जानी थी। भुगतान में टीजीएसपीएल का हिस्सा 11 प्रतिशत और ओएटीएस का हिस्सा 89 प्रतिशत तय था। आरोप है कि टीजीएसपीएल ने इस व्यवस्था का पालन नहीं किया और गेल से प्राप्त भुगतान पहले सीधे अपने पास लिया तथा बाद में एस्क्रो खाते में स्थानांतरित किया। पुलिस को दी शिकायत में कुल लंबित परियोजना भुगतान करीब 6.59 करोड़ रुपये बताया गया है।
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