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Noida News: मारपीट व जातिसूचक गाली के मामले में पांचों आरोपी बरी
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(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। विशेष न्यायाधीश की अदालत ने थाना जेवर क्षेत्र में पांच आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। उन पर मारपीट और जातिसूचक शब्दों के प्रयोग का आरोप था। अदालत ने माना कि अभियोजन आरोप संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। वादी महेश चंद्र ने 1 मार्च 2020 की शाम हरिओम पर दुकान पर जातिसूचक गाली देने का आरोप लगाया था। उन्होंने बताया कि हरिओम अपने साथियों के साथ लौटा और हमला किया। इस हमले में उनके बेटे कर्ण, अमित और आजाद घायल हुए थे। आरोपी सचिन, कल्लू उर्फ कृष्ण, पुष्पेन्द्र राजपूत, हरिओम और लोकेश पर 8 अगस्त 2022 को आरोप तय हुए थे।
अभियोजन ने सात गवाह पेश किए, पर वे पक्षद्रोही घोषित हुए। वादी महेश चंद्र ने अदालत में मारपीट से इन्कार किया। उन्होंने पुलिस को ऐसा कोई बयान देने से भी मना किया। घायल कर्ण ने कहा कि वह भीड़ में धक्का लगने से गिरा था। अन्य गवाहों ने भी आरोपियों को पहचानने से इन्कार किया। अदालत ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट से चोटें स्थापित होती हैं। परंतु ये चोटें आरोपियों ने पहुंचाईं, यह साबित नहीं हुआ। सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया गया। अदालत ने वादी और घायलों को निर्देश दिया। उन्हें सरकारी कोष से मिली प्रतिकर या राहत राशि 15 दिन में राहत कोष में जमा करानी होगी।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। विशेष न्यायाधीश की अदालत ने थाना जेवर क्षेत्र में पांच आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। उन पर मारपीट और जातिसूचक शब्दों के प्रयोग का आरोप था। अदालत ने माना कि अभियोजन आरोप संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। वादी महेश चंद्र ने 1 मार्च 2020 की शाम हरिओम पर दुकान पर जातिसूचक गाली देने का आरोप लगाया था। उन्होंने बताया कि हरिओम अपने साथियों के साथ लौटा और हमला किया। इस हमले में उनके बेटे कर्ण, अमित और आजाद घायल हुए थे। आरोपी सचिन, कल्लू उर्फ कृष्ण, पुष्पेन्द्र राजपूत, हरिओम और लोकेश पर 8 अगस्त 2022 को आरोप तय हुए थे।
अभियोजन ने सात गवाह पेश किए, पर वे पक्षद्रोही घोषित हुए। वादी महेश चंद्र ने अदालत में मारपीट से इन्कार किया। उन्होंने पुलिस को ऐसा कोई बयान देने से भी मना किया। घायल कर्ण ने कहा कि वह भीड़ में धक्का लगने से गिरा था। अन्य गवाहों ने भी आरोपियों को पहचानने से इन्कार किया। अदालत ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट से चोटें स्थापित होती हैं। परंतु ये चोटें आरोपियों ने पहुंचाईं, यह साबित नहीं हुआ। सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया गया। अदालत ने वादी और घायलों को निर्देश दिया। उन्हें सरकारी कोष से मिली प्रतिकर या राहत राशि 15 दिन में राहत कोष में जमा करानी होगी।
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