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Noida News: कार को जब्त करने के आदेश को सही ठहराया, अपील खारिज
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(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने अवैध शराब की तस्करी में इस्तेमाल हुई एक कार को राज्य सरकार के पक्ष में जब्त करने के जिलाधिकारी के आदेश को बरकरार रखते हुए वाहन मालिक की अपील खारिज कर दी है। मामला बीते 31 जुलाई 2025 का है। जब ग्रेटर नोएडा के बीटा-2 थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक कार से 123 बोतलें/डिब्बे अवैध शराब बरामद की थीं। पुलिस रिपोर्ट मिलने के बाद जिलाधिकारी गौतमबुद्ध नगर ने जब्ती की कार्यवाही शुरू की और वाहन के पंजीकृत मालिक को नोटिस जारी किया।
बिहार के मुंगेर जिले के निवासी रोशन नामक मालिक की ओर से पेश आपत्ति में कहा गया कि वाहन उसकी कंपनी के नाम पर है और उसमें सवार व्यक्ति एक होटल में सुरक्षा गार्ड के तौर पर कार्यरत कर्मचारी था। यह भी दलील दी गई कि न तो कंपनी को और न ही प्रबंधन को शराब परिवहन की जानकारी थी। इसलिए इस गैरकानूनी गतिविधि में मालिक की कोई संलिप्तता नहीं मानी जा सकती। हालांकि जिलाधिकारी ने पुलिस रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संतुष्ट होकर वाहन को जब्त करने का आदेश पारित कर पंजीकृत मालिक को वाहन की बाजार कीमत जमा कर उसे छुड़ाने का विकल्प भी दिया। इसी आदेश को चुनौती देते हुए जिला अदालत में अपील दाखिल की थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि जब्ती की कार्यवाही आपराधिक मुकदमे से स्वतंत्र होती है और इसके लिए मुकदमे के निष्कर्ष अथवा दोषसिद्धि का इंतजार करना आवश्यक नहीं है। अदालत ने जिलाधिकारी के आदेश में कोई कानूनी खामी, अनियमितता या मनमानी नहीं पाई।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने अवैध शराब की तस्करी में इस्तेमाल हुई एक कार को राज्य सरकार के पक्ष में जब्त करने के जिलाधिकारी के आदेश को बरकरार रखते हुए वाहन मालिक की अपील खारिज कर दी है। मामला बीते 31 जुलाई 2025 का है। जब ग्रेटर नोएडा के बीटा-2 थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक कार से 123 बोतलें/डिब्बे अवैध शराब बरामद की थीं। पुलिस रिपोर्ट मिलने के बाद जिलाधिकारी गौतमबुद्ध नगर ने जब्ती की कार्यवाही शुरू की और वाहन के पंजीकृत मालिक को नोटिस जारी किया।
बिहार के मुंगेर जिले के निवासी रोशन नामक मालिक की ओर से पेश आपत्ति में कहा गया कि वाहन उसकी कंपनी के नाम पर है और उसमें सवार व्यक्ति एक होटल में सुरक्षा गार्ड के तौर पर कार्यरत कर्मचारी था। यह भी दलील दी गई कि न तो कंपनी को और न ही प्रबंधन को शराब परिवहन की जानकारी थी। इसलिए इस गैरकानूनी गतिविधि में मालिक की कोई संलिप्तता नहीं मानी जा सकती। हालांकि जिलाधिकारी ने पुलिस रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संतुष्ट होकर वाहन को जब्त करने का आदेश पारित कर पंजीकृत मालिक को वाहन की बाजार कीमत जमा कर उसे छुड़ाने का विकल्प भी दिया। इसी आदेश को चुनौती देते हुए जिला अदालत में अपील दाखिल की थी।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि जब्ती की कार्यवाही आपराधिक मुकदमे से स्वतंत्र होती है और इसके लिए मुकदमे के निष्कर्ष अथवा दोषसिद्धि का इंतजार करना आवश्यक नहीं है। अदालत ने जिलाधिकारी के आदेश में कोई कानूनी खामी, अनियमितता या मनमानी नहीं पाई।
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