{"_id":"6ac66c2aba13bf9b3e0bf724","slug":"fdsgdf-grnoida-news-c-1-noi1095-4808250-2026-10-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: यात्रियों की सुरक्षा या कागजी खानापूर्ति... फिटनेस के बाद भी बसों में लग रही आग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: यात्रियों की सुरक्षा या कागजी खानापूर्ति... फिटनेस के बाद भी बसों में लग रही आग
विज्ञापन
- परिवहन विभाग की जांच पर उठ रहे सवाल
फिटनेस में पास हो रहीं बसों में नहीं थम रही आग लगने की घटनाएं
कागजों में चमक रहे फिटनेस के दावे...बस बन रहीं आग को गोला
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सोचिए... बस में सफर के बीच अचानक धुआं उठे, कुछ ही पलों में आग की लपटें चारों तरफ फैल जाएं और यात्रियों के सामने जिंदगी बचाने के लिए बस से कूदने के अलावा कोई रास्ता न बचे। जिले में यात्री बसों की सुरक्षा को लेकर सामने आ रही घटनाएं अब इसी खौफ की तस्वीर दिखा रही हैं। महज 20 दिन में दो एक्सप्रेसवे पर बसों में आग लगने से सवाल उठ रहा है कि कागजों में फिट घोषित बसें सड़क पर यात्रियों के लिए कितनी सुरक्षित हैं। बसों में खामियां सामने आने के बाद भी परिवहन विभाग की ओर से बसों की जांच और कार्रवाई नहीं किए जाने से सवाल उठ रहे हैं।
बीते महीने 23 सितंबर की रात यमुना एक्सप्रेसवे पर चलती बस में आग लग गई थी। जहां 9 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद मंगलवार को नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे पर मंगलवार की शाम बस में आग लग गई। इस घटना में बस के आग की चपेट में आने से पहले यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों घटनाओं ने बसों की फिटनेस कागजों में तो फिट मिली थी, लेकिन असल में तकनीकी तौर पर फिटनेस, वायरिंग, रखरखाव और अग्निशमन इंतजामों की जांच पर सवाल खड़े किए हैं। तब से अब तक परिवहन विभाग ने तीन दर्जन से ज्यादा बसों पर कार्रवाई तो की, लेकिन उसका असर सड़कों पर नहीं दिख रहा है। यही कारण है कि सिर्फ 20 दिन के अंतराल में ही दूसरी बर्निंग बस की घटना सामने आई। ऐसे में यात्रियों ने सड़कों पर दौड़ रही बसों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच की मांग उठाई है।
तकनीकी जांच में फेल होने पर रद्द होगा फिटनेस : बता दें, परिवहन विभाग का कहना है कि जिन बसों के पास फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं हैं, उन पर कठोर कार्रवाई जारी है, लेकिन जिनके पास फिटनेस का कागज है, लेकिन तकनीकी जांच में वह फेल पाई जाती हैं तो उनका फिटनेस प्रमाण पत्र निलंबित किया जाएगा। साथ ही उन्हें नोटिस देकर अपना वाहन फिट कराने के निर्देश दिए जाएंगे।
विज्ञापन
एक्सप्रेसवे से अवैध रूप से यात्री ढोती हैं बसें : सेक्टर 142 में बसें अवैध रूप से सवारियों को भरती हैं। यह हाल सिर्फ एक दो दिन का नहीं बल्कि रोजाना का है। जहां एक्सप्रेसवे पर वाहन रोकने पर सख्त प्रतिबंध है, वहीं यात्री बसें बिना किसी रोकथाम और रोक-टोक के अवैध रूप से जगह-जगह से यात्रियों को रोककर बैठाती हैं और प्रशासन आंख मूंदे बैठा रहता है। अवैध अड्डा सिर्फ एक नहीं, बल्कि महामाया फ्लाईओवर, चिल्ला बॉर्डर समेत सेक्टर-142, 143 और परी चौक से पहले भी दो जगह पर बसें एक्सप्रेसवे के बीच रुकती हैं। जहां सुबह से शुरू होते हुए देर रात तक बसें की अराजकता बढ़ी रहती है।
नियमित रूप से नाकाबंदी करके चेकिंग की जा रही हैं, पांच टीमें जिले में तैनात हैं, जो चेकिंग कर रही हैं, तकनीकी जांच में यदि कोई बस फेल होती है तो उसका फिटनेस प्रमाण पत्र निलंबित किया जाएगा। -डॉ. उदित नारायण पांडेय, एआरटीओ प्रवर्तन, परिवहन विभाग, गौतमबुद्ध नगर
विज्ञापन
फिटनेस में पास हो रहीं बसों में नहीं थम रही आग लगने की घटनाएं
कागजों में चमक रहे फिटनेस के दावे...बस बन रहीं आग को गोला
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सोचिए... बस में सफर के बीच अचानक धुआं उठे, कुछ ही पलों में आग की लपटें चारों तरफ फैल जाएं और यात्रियों के सामने जिंदगी बचाने के लिए बस से कूदने के अलावा कोई रास्ता न बचे। जिले में यात्री बसों की सुरक्षा को लेकर सामने आ रही घटनाएं अब इसी खौफ की तस्वीर दिखा रही हैं। महज 20 दिन में दो एक्सप्रेसवे पर बसों में आग लगने से सवाल उठ रहा है कि कागजों में फिट घोषित बसें सड़क पर यात्रियों के लिए कितनी सुरक्षित हैं। बसों में खामियां सामने आने के बाद भी परिवहन विभाग की ओर से बसों की जांच और कार्रवाई नहीं किए जाने से सवाल उठ रहे हैं।
बीते महीने 23 सितंबर की रात यमुना एक्सप्रेसवे पर चलती बस में आग लग गई थी। जहां 9 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद मंगलवार को नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे पर मंगलवार की शाम बस में आग लग गई। इस घटना में बस के आग की चपेट में आने से पहले यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों घटनाओं ने बसों की फिटनेस कागजों में तो फिट मिली थी, लेकिन असल में तकनीकी तौर पर फिटनेस, वायरिंग, रखरखाव और अग्निशमन इंतजामों की जांच पर सवाल खड़े किए हैं। तब से अब तक परिवहन विभाग ने तीन दर्जन से ज्यादा बसों पर कार्रवाई तो की, लेकिन उसका असर सड़कों पर नहीं दिख रहा है। यही कारण है कि सिर्फ 20 दिन के अंतराल में ही दूसरी बर्निंग बस की घटना सामने आई। ऐसे में यात्रियों ने सड़कों पर दौड़ रही बसों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच की मांग उठाई है।
विज्ञापन
तकनीकी जांच में फेल होने पर रद्द होगा फिटनेस : बता दें, परिवहन विभाग का कहना है कि जिन बसों के पास फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं हैं, उन पर कठोर कार्रवाई जारी है, लेकिन जिनके पास फिटनेस का कागज है, लेकिन तकनीकी जांच में वह फेल पाई जाती हैं तो उनका फिटनेस प्रमाण पत्र निलंबित किया जाएगा। साथ ही उन्हें नोटिस देकर अपना वाहन फिट कराने के निर्देश दिए जाएंगे।
विज्ञापन
एक्सप्रेसवे से अवैध रूप से यात्री ढोती हैं बसें : सेक्टर 142 में बसें अवैध रूप से सवारियों को भरती हैं। यह हाल सिर्फ एक दो दिन का नहीं बल्कि रोजाना का है। जहां एक्सप्रेसवे पर वाहन रोकने पर सख्त प्रतिबंध है, वहीं यात्री बसें बिना किसी रोकथाम और रोक-टोक के अवैध रूप से जगह-जगह से यात्रियों को रोककर बैठाती हैं और प्रशासन आंख मूंदे बैठा रहता है। अवैध अड्डा सिर्फ एक नहीं, बल्कि महामाया फ्लाईओवर, चिल्ला बॉर्डर समेत सेक्टर-142, 143 और परी चौक से पहले भी दो जगह पर बसें एक्सप्रेसवे के बीच रुकती हैं। जहां सुबह से शुरू होते हुए देर रात तक बसें की अराजकता बढ़ी रहती है।
नियमित रूप से नाकाबंदी करके चेकिंग की जा रही हैं, पांच टीमें जिले में तैनात हैं, जो चेकिंग कर रही हैं, तकनीकी जांच में यदि कोई बस फेल होती है तो उसका फिटनेस प्रमाण पत्र निलंबित किया जाएगा। -डॉ. उदित नारायण पांडेय, एआरटीओ प्रवर्तन, परिवहन विभाग, गौतमबुद्ध नगर