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Noida News: कोर्ट में पलट गई पीड़िता, छेड़छाड़ और पॉक्सो केस में आरोपी बरी
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(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने गवाहों के पलटने से छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के मामले में एनजीओ संचालक आरोपी को बरी कर दिया। सेक्टर-31 नोएडा निवासी आरोपी पर छेड़छाड़ और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा चल रहा था।
अभियोजन के मुताबिक सेक्टर-20 थाने में 26 मार्च 2023 को मुकदमा दर्ज हुआ था। तहरीर में आरोप था कि 13 मार्च 2023 को आरोपी ने पीड़िता को अपने कार्यालय बुलाकर अभद्र व्यवहार किया और अश्लील हरकतें की। कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन ने तीन गवाह पेश किए। पीड़िता ने बयान में कहा कि जिस एनजीओ में वह काम करती थी। उसके संचालक आरोपी कार्यालय के काम को लेकर डांटते थे। यह बात उसने मां को बताई तो मां ने थाने जाकर रिपोर्ट लिखवा दी। उसने कहा कि आरोपी ने कभी उसके साथ छेड़छाड़ या अभद्रता नहीं की। धारा-164 के तहत दर्ज बयान के बारे में उसने बताया कि वह साथ गई महिला पुलिसकर्मी के प्रभाव में दिया गया था।
वहीं पीड़िता के पिता ने बताया कि आरोपी एक संस्था चलाता है। जहां गरीब छात्रों को पढ़ाया जाता है और पीड़िता भी वहां पढ़ाती थी। दोनों के बीच कहासुनी हुई थी, लेकिन आरोपी ने कोई गलत काम नहीं किया। वहीं अदालत ने पाया पीड़िता घटना के समय 18 वर्ष से अधिक आयु की थी। इस कारण अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने गवाहों के पलटने से छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के मामले में एनजीओ संचालक आरोपी को बरी कर दिया। सेक्टर-31 नोएडा निवासी आरोपी पर छेड़छाड़ और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा चल रहा था।
अभियोजन के मुताबिक सेक्टर-20 थाने में 26 मार्च 2023 को मुकदमा दर्ज हुआ था। तहरीर में आरोप था कि 13 मार्च 2023 को आरोपी ने पीड़िता को अपने कार्यालय बुलाकर अभद्र व्यवहार किया और अश्लील हरकतें की। कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन ने तीन गवाह पेश किए। पीड़िता ने बयान में कहा कि जिस एनजीओ में वह काम करती थी। उसके संचालक आरोपी कार्यालय के काम को लेकर डांटते थे। यह बात उसने मां को बताई तो मां ने थाने जाकर रिपोर्ट लिखवा दी। उसने कहा कि आरोपी ने कभी उसके साथ छेड़छाड़ या अभद्रता नहीं की। धारा-164 के तहत दर्ज बयान के बारे में उसने बताया कि वह साथ गई महिला पुलिसकर्मी के प्रभाव में दिया गया था।
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वहीं पीड़िता के पिता ने बताया कि आरोपी एक संस्था चलाता है। जहां गरीब छात्रों को पढ़ाया जाता है और पीड़िता भी वहां पढ़ाती थी। दोनों के बीच कहासुनी हुई थी, लेकिन आरोपी ने कोई गलत काम नहीं किया। वहीं अदालत ने पाया पीड़िता घटना के समय 18 वर्ष से अधिक आयु की थी। इस कारण अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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