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Noida News: निम्स अस्पताल पर गलत निदान और फर्जी बिल का गंभीर आरोप
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दवा की पर्ची का फोटो...
- परिजन का आरोप-दो दिन तक अस्पताल में रोक कर रखा
- डिस्चार्ज फाइल भी नहीं दी, मोबाइल से डाटा भी डिलीट करवा दी
फिरदौस आलम/दीपक सिंघल
यमुना सिटी/रबूपुरा।
गलत उपचार और फर्जी बिल के मामले में न्यायालय तृतीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने निम्स अस्पताल और मेडिकल स्टोर के खिलाफ प्रारंभिक जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने दनकौर थाना के जांच अधिकारी को दो सप्ताह के भीतर अपनी जांच आख्या अदालत में प्रस्तुत करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को तय की गई है।
न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के अनुसार, गौरव भाटी ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी को 10 सितंबर 2026 को पथरी के उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि डॉक्टरों ने गलत निदान करते हुए बताया कि बच्चेदानी में गांठ है और सर्जरी की आवश्यकता है, जिसे बाद में एमआरआई रिपोर्ट ने गलत साबित कर दिया। मामले को लेकर गौतमबुद्ध नगर के सीएमओ डॉ. मदन मोहन मणि त्रिपाठी से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। वहीं, मामले को लेकर दनकौर कोतवाली प्रभारी मनोज कुमार ने बताया कि घटना की जांच कराई जा रही है।
मोबाइल से डाटा डिलीट कराने का आरोप : गौरव भाटी ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया है कि उनको अस्पताल प्रबंधन ने जबरन दो दिन तक रोक कर रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन ने इस दौरान उन्हें, उनकी पत्नी और दो साल के बच्चों को परेशान किया। साथ ही, उनके मोबाइल फोन से जबरन संबंधित जरूरी डाटा भी डिलीट करा दिया, ताकि वे पुलिस के पास न जा सके और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कोई सबूत इकट्टा न कर सके।
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51, 293 रुपये का बनाया बिल : गौरव का आरोप है कि अस्पताल ने उन दवाओं के 51,293 रुपये के फर्जी बिल बनाए जो मरीज को दी ही नहीं गईं। विरोध करने पर उनसे पुरानी मेडिकल रिपोर्ट छीन ली गईं। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से उन्हें न ही एडमिशन की पर्ची दी गई और न ही डिस्चार्ज की फाइल दी गई। फिलहाल न्यायालय ने इसे गंभीर प्रवृत्ति का मामला मानते हुए प्रारंभिक जांच के आदेश दिए हैं।
कोर्ट का आदेश देखने के बाद मामले की जांच कराकर कोर्ट के सामने रिपोर्ट पेश की जाएगी।-- संतोष कुमार, एडीसीपी ग्रेटर नोएडा।
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- परिजन का आरोप-दो दिन तक अस्पताल में रोक कर रखा
- डिस्चार्ज फाइल भी नहीं दी, मोबाइल से डाटा भी डिलीट करवा दी
फिरदौस आलम/दीपक सिंघल
यमुना सिटी/रबूपुरा।
गलत उपचार और फर्जी बिल के मामले में न्यायालय तृतीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने निम्स अस्पताल और मेडिकल स्टोर के खिलाफ प्रारंभिक जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने दनकौर थाना के जांच अधिकारी को दो सप्ताह के भीतर अपनी जांच आख्या अदालत में प्रस्तुत करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को तय की गई है।
न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के अनुसार, गौरव भाटी ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी को 10 सितंबर 2026 को पथरी के उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि डॉक्टरों ने गलत निदान करते हुए बताया कि बच्चेदानी में गांठ है और सर्जरी की आवश्यकता है, जिसे बाद में एमआरआई रिपोर्ट ने गलत साबित कर दिया। मामले को लेकर गौतमबुद्ध नगर के सीएमओ डॉ. मदन मोहन मणि त्रिपाठी से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। वहीं, मामले को लेकर दनकौर कोतवाली प्रभारी मनोज कुमार ने बताया कि घटना की जांच कराई जा रही है।
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मोबाइल से डाटा डिलीट कराने का आरोप : गौरव भाटी ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया है कि उनको अस्पताल प्रबंधन ने जबरन दो दिन तक रोक कर रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन ने इस दौरान उन्हें, उनकी पत्नी और दो साल के बच्चों को परेशान किया। साथ ही, उनके मोबाइल फोन से जबरन संबंधित जरूरी डाटा भी डिलीट करा दिया, ताकि वे पुलिस के पास न जा सके और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कोई सबूत इकट्टा न कर सके।
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51, 293 रुपये का बनाया बिल : गौरव का आरोप है कि अस्पताल ने उन दवाओं के 51,293 रुपये के फर्जी बिल बनाए जो मरीज को दी ही नहीं गईं। विरोध करने पर उनसे पुरानी मेडिकल रिपोर्ट छीन ली गईं। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से उन्हें न ही एडमिशन की पर्ची दी गई और न ही डिस्चार्ज की फाइल दी गई। फिलहाल न्यायालय ने इसे गंभीर प्रवृत्ति का मामला मानते हुए प्रारंभिक जांच के आदेश दिए हैं।
कोर्ट का आदेश देखने के बाद मामले की जांच कराकर कोर्ट के सामने रिपोर्ट पेश की जाएगी।