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किसान कर्ज में डूबेगा, पूंजीपति जमीन हड़पेंगे : टिकैत
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जेवर किसान महापंचायत में पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत।
- फोटो : Grnoida
जेवर। साबौता अंडरपास पर रविवार को भारतीय किसान यूनियन की महापंचायत हुई। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत और राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह मौजूद रहे। इस दौरान सभी ने तीनों कृषि कानूनों को किसान, मजदूर और आमजन का विरोधी बताया। टिकैत ने कहा कि देश के लोग किसान आंदोलन से नहीं वैचारिक क्रांति से जुड़ रहे हैं। 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में होने वाली भारतीय किसान यूनियन की महापंचायत में आरपार की रणनीति तैयार होगी। उन्होंने क्षेत्र के किसानों से अधिक से अधिक संख्या में मुजफ्फरनगर की महापंचायत में पहुंचने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सरकार ने बड़ी चतुराई से किसानों को बर्बाद करने के लिए बिना मांगे तीनों कानून देश के किसानों पर थोप दिए हैं। इससे किसान पहले कर्ज में डूबेगा, फिर धीरे-धीरे जमीन को पूंजीपति किसानों से हड़पने का काम करेंगे। किसानों की सरकार से लड़ाई शुरू हो चुकी है जिसके खत्म होने का समय और लड़ाई के अंजाम की कोई जानकारी नहीं है। सरकार इसे केवल पश्चिमी यूपी का आंदोलन बताती है, लेकिन इससे 40 योद्धा लड़ रहे हैं। 550 से अधिक किसान संगठन जुड़े हुए हैं। सरकार अपने दिमाग की गलतफहमी निकाल दें कि किसान थककर घर वापस चला जाएगा।
महापंचायत में जेवर के अलावा बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा आदि के किसान भी पहुंचे। दोपहर बाद टिकैत जेवर झाझर मार्ग होते हुए मुख्य चौराहे पर पहुंचे। यहां उन्होंने ज्वालि ऋषि महाराज की प्रतिमा पर फूल चढ़ाए। इसके बाद वह महापंचायत में शामिल हुए। किसानों ने गर्मजोशी से फूल माला व पगड़ी बांधकर सभी पदाधिकारियों का स्वागत किया। इसके बाद किसान नेताओं ने महापंचायत में पहुंचे किसानों को तीनों कृषि कानूनों की कमियां गिनाते हुए सरकार से इन्हें वापस लेने की मांग की। युद्धवीर सिंह ने किसानों को विस्तार से तीनों कानूनों की जानकारी दी। उन्होंने सभी कानूनों को किसान विरोधी बताया।
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किसानों को लड़नी होगी आरपार की लड़ाई: राजपाल
वहीं, राष्ट्रीय महासचिव राजपाल शर्मा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसान कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं जबकि सरकार कानूनों को वापस न लेने पर अड़ी है। किसानों को सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़नी होगी। मुजफ्फरनगर में आयोजित किसान महापंचायत में सरकार से आरपार की लड़ाई की रणनीति बनाएंगे। महापंचायत में जो भी फैसला होगा किसान उस पर अमल करेंगे और कृषि कानूनों के वापस हुए बिना किसी भी कीमत पर घर वापसी नहीं करेंगे। बता दें कि तीनों कृषि कानूनों के विरोध में यमुना एक्सप्रेसवे के जेवर टोल पर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह चौरोली के नेतृत्व में धरना चल रहा है।
‘पड़ोसी को भी दूध नहीं बेच पाएगा किसान’
टिकैत ने कहा कि केवल यही तीन कृषि कानून ही नहीं, इसके अलावा भी सरकार और भी ऐसे कानून ला रही है। जैसे दूध का कानून जिसके तहत किसान डिब्बे में पड़ोसी को भी दूध नहीं बेच सकेगा। वह पहले उसे कंपनी को देगा, फिर पैकिंग होगी और दूध बाजार में खरीदा जा सकेगा। दूसरा बिजली अमेंडमेंट बिल जिसके तहत दो पशुओं से अधिक पशु रखने वाले किसान को कामर्शियल कनेक्शन लेना पड़ेगा। ऐसे में किसान तो मरेगा ही मरेगा उसके साथ मजदूर और मध्यम वर्ग के लोग भी बुरी तरह से प्रभावित होंगे। मंडी खत्म होने का दंश बिहार झेल रहा है। बिहार के लोग देश में सबसे अधिक मजदूरी करने को मजबूर हैं। इसकी बड़ी वजह बिहार में आज से 15 साल पहले मंडियों का खत्म होना है।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने बड़ी चतुराई से किसानों को बर्बाद करने के लिए बिना मांगे तीनों कानून देश के किसानों पर थोप दिए हैं। इससे किसान पहले कर्ज में डूबेगा, फिर धीरे-धीरे जमीन को पूंजीपति किसानों से हड़पने का काम करेंगे। किसानों की सरकार से लड़ाई शुरू हो चुकी है जिसके खत्म होने का समय और लड़ाई के अंजाम की कोई जानकारी नहीं है। सरकार इसे केवल पश्चिमी यूपी का आंदोलन बताती है, लेकिन इससे 40 योद्धा लड़ रहे हैं। 550 से अधिक किसान संगठन जुड़े हुए हैं। सरकार अपने दिमाग की गलतफहमी निकाल दें कि किसान थककर घर वापस चला जाएगा।
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महापंचायत में जेवर के अलावा बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा आदि के किसान भी पहुंचे। दोपहर बाद टिकैत जेवर झाझर मार्ग होते हुए मुख्य चौराहे पर पहुंचे। यहां उन्होंने ज्वालि ऋषि महाराज की प्रतिमा पर फूल चढ़ाए। इसके बाद वह महापंचायत में शामिल हुए। किसानों ने गर्मजोशी से फूल माला व पगड़ी बांधकर सभी पदाधिकारियों का स्वागत किया। इसके बाद किसान नेताओं ने महापंचायत में पहुंचे किसानों को तीनों कृषि कानूनों की कमियां गिनाते हुए सरकार से इन्हें वापस लेने की मांग की। युद्धवीर सिंह ने किसानों को विस्तार से तीनों कानूनों की जानकारी दी। उन्होंने सभी कानूनों को किसान विरोधी बताया।
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किसानों को लड़नी होगी आरपार की लड़ाई: राजपाल
वहीं, राष्ट्रीय महासचिव राजपाल शर्मा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसान कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं जबकि सरकार कानूनों को वापस न लेने पर अड़ी है। किसानों को सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़नी होगी। मुजफ्फरनगर में आयोजित किसान महापंचायत में सरकार से आरपार की लड़ाई की रणनीति बनाएंगे। महापंचायत में जो भी फैसला होगा किसान उस पर अमल करेंगे और कृषि कानूनों के वापस हुए बिना किसी भी कीमत पर घर वापसी नहीं करेंगे। बता दें कि तीनों कृषि कानूनों के विरोध में यमुना एक्सप्रेसवे के जेवर टोल पर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह चौरोली के नेतृत्व में धरना चल रहा है।
‘पड़ोसी को भी दूध नहीं बेच पाएगा किसान’
टिकैत ने कहा कि केवल यही तीन कृषि कानून ही नहीं, इसके अलावा भी सरकार और भी ऐसे कानून ला रही है। जैसे दूध का कानून जिसके तहत किसान डिब्बे में पड़ोसी को भी दूध नहीं बेच सकेगा। वह पहले उसे कंपनी को देगा, फिर पैकिंग होगी और दूध बाजार में खरीदा जा सकेगा। दूसरा बिजली अमेंडमेंट बिल जिसके तहत दो पशुओं से अधिक पशु रखने वाले किसान को कामर्शियल कनेक्शन लेना पड़ेगा। ऐसे में किसान तो मरेगा ही मरेगा उसके साथ मजदूर और मध्यम वर्ग के लोग भी बुरी तरह से प्रभावित होंगे। मंडी खत्म होने का दंश बिहार झेल रहा है। बिहार के लोग देश में सबसे अधिक मजदूरी करने को मजबूर हैं। इसकी बड़ी वजह बिहार में आज से 15 साल पहले मंडियों का खत्म होना है।