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यूरिया की कमी से जूझ रहे किसान
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नूंह। जिले में सरकार किसानों को खाद मुहैया कराने के बड़े-बड़े दावे कर रही है लेकिन सरकार द्वारा डीएपी के बाद अब यूरिया भी मंहगे दामों पर खरीदना पड़ रहा है। यूरिया की प्रति बैग की कीमत 267.50 पैसे तय की हुए है। इसके बावजूद नूंह के साथ जिले में धड़ल्ले से दुकानदारों द्वारा 330 से 350 रुपये प्रति बैग वसूले जा रहे हैं। इससे पूर्व किसानों डीएएपी के लिए काफी परेशान होना पड़ा था। अब फिर से उन्हें यूरिया के लिए मशक्कत उठानी पड़ रही है। अब किसानों को मंहगे दामों पर यूरिया खरीदना पड़ रहा है। जिले में इससे पहले भी इस तरह की शिकायतें सामने आई है। इसकी शिकायत के बाद खानापूर्ति के लिए विभाग द्वारा कार्रवाई की जाती है इसके कुछ समय बाद भोले भाले किसानों के साथ यूरिया के नाम पर ठगी शुरू हो जाती है। बता दें कि नूंह जिले में आज भी 80 प्रतिशत लोग सीधे कृषि कार्यों से जुड़े हुए है। जिले में लोगों के पास आजीविका का कोई और साधन नहीं है। इसी कारण लोग कृषि से जुड़े हुए है। लेकिन कृषि को बेहतर लाभ उठाने के लिए यहां पर भूजल स्तर काफी नीचे है दूसरा कई ब्लॅाक में खारा पानी जोकि कृषि के योगय नहीं है। रबी की फसलों में इन दिनों सरसों, जौ, गेहूं आदि फसलों में यूरिया खाद की अधिक जरूरत होती है लेकिन यूरिया को मजबूरी में किसानों को मंहगे दामों पर खरीदना पड़ रहा है। जिससे किसानों में काफी रोष है।
क्या कहते हैं अधिकारी
वहीं, इस बारे में कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. अजीत सिंह ने बताया कि किसानों को ऐसे दुकानदारों की शिकायत देनी चाहिए जिससे उचित कार्रवाई की जा सके। किसानों को खाद की कमी नहीं हो इसके लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। जिले में 19 हजार मीट्रिक टन की जरूरत है अभी हमारे पर 11 हजार मीट्रिक टन खाद आया है। एक दो दिन में कृभकों यूरिया के पलवल से आने की उम्मीद है। जिले में गेहूं 72 हजार हेक्टेयर, सरसों 35 हजार, जौ 1500, चना लगभग 200 अन्य फसलों में बरसीम 2000 व करीब 2500 हेक्टेयर में अन्य फसलें है। किसानों को जरूरत के हिसाब खाद मुहैया कराया जाएगा।
जिले में नूंह में यह समस्या नई नहीं बल्कि पूर्व से यहां पर किसानों को 267.50 रुपये का यूरिया का बैग 350 रुपये में दिया जा रहा है। इससे किसानों की जेब पर बोझ पड़ रहा है।
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सनाउल्ला अड़बर
रबी के सीजन में किसान लाखों यूरिया के बैग खरीदते हैं। नूंह में दुकानदारों के मनमाने रेट के आगे हम कुछ नहीं कर सकते हैं। एक यूरिया बैग पर 70 से 80 रुपये अधिक वसूले जा रहे हैं।
साबिर सरपंच मालब
जिले में दुकानदार अपने मनमाने ढंग से किसानों को लूट रहे हैं। इस ओर जिला प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है। यह किसानों का शोषण है सरकार किसान हितैषी होने का दिखावा करती है।
आजाद खान, कंकर खेड़ी
यह समस्या संबंधित विभाग के अधिकारियों के ढुलमुल रवैये से से आ रही है। अगर प्रशासन द्वारा सख्ती से इस ओर कड़े कदम उठाएं जाएं तो इस धांधली को रोका जा सकता है।
आनंद सरपंच, गांव आटा
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क्या कहते हैं अधिकारी
वहीं, इस बारे में कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. अजीत सिंह ने बताया कि किसानों को ऐसे दुकानदारों की शिकायत देनी चाहिए जिससे उचित कार्रवाई की जा सके। किसानों को खाद की कमी नहीं हो इसके लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। जिले में 19 हजार मीट्रिक टन की जरूरत है अभी हमारे पर 11 हजार मीट्रिक टन खाद आया है। एक दो दिन में कृभकों यूरिया के पलवल से आने की उम्मीद है। जिले में गेहूं 72 हजार हेक्टेयर, सरसों 35 हजार, जौ 1500, चना लगभग 200 अन्य फसलों में बरसीम 2000 व करीब 2500 हेक्टेयर में अन्य फसलें है। किसानों को जरूरत के हिसाब खाद मुहैया कराया जाएगा।
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जिले में नूंह में यह समस्या नई नहीं बल्कि पूर्व से यहां पर किसानों को 267.50 रुपये का यूरिया का बैग 350 रुपये में दिया जा रहा है। इससे किसानों की जेब पर बोझ पड़ रहा है।
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रबी के सीजन में किसान लाखों यूरिया के बैग खरीदते हैं। नूंह में दुकानदारों के मनमाने रेट के आगे हम कुछ नहीं कर सकते हैं। एक यूरिया बैग पर 70 से 80 रुपये अधिक वसूले जा रहे हैं।
साबिर सरपंच मालब
जिले में दुकानदार अपने मनमाने ढंग से किसानों को लूट रहे हैं। इस ओर जिला प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है। यह किसानों का शोषण है सरकार किसान हितैषी होने का दिखावा करती है।
आजाद खान, कंकर खेड़ी
यह समस्या संबंधित विभाग के अधिकारियों के ढुलमुल रवैये से से आ रही है। अगर प्रशासन द्वारा सख्ती से इस ओर कड़े कदम उठाएं जाएं तो इस धांधली को रोका जा सकता है।
आनंद सरपंच, गांव आटा