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18 दिन बाद भी किसानों नहीं मिला बाजरे का भुगतान
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खेड़ली दोसा गांव में बाजरे की फसल का भुगतान नहीं मिलने पर रोष प्रकट करते किसान।
- फोटो : Mewat
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नूंह(अंतराम खटाना)। शहर की अनाज मंडी में पिछले एक अक्तूबर से बाजरे की फसल की खरीद जारी है। दूर-दराज से कई गांवों के लोग फसल बेचने आ रहे हैं, लेकिन किसानों का आरोप है कि 18 दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें भुगतान नहीं किया गया है। सरकार के फसल खरीद के 24 से 72 घंटे में भुगतान करने के दावे की पोल खुल रही है।
नूंह अनाज मंडी में 2664 मीट्रिक टन बाजरे की आवक हुई है। किसानों के मुताबिक पहले तो उन्हें कागजी कार्रवाई के कारण परेशानी हुई। कई दिनों तक फसल मंडी में ही पड़ी रही। फसल की निगरानी भी खुद करनी पड़ी। कई बार कुछ किसान फसलों को वापस लेकर भी घर लौट गए। सत्यदेव, सतीश, सुखबीर, रविंद्र निवासी खेड़ली दोसा, सुरेंद्र निवासी छपेड़ा ने बताया कि करीब 15 दिन पहले फसलों को खरीदा गया था, लेकिन उन्हें भुगतान नहीं किया गया है। कोई सुनने वाला नहीं है।
नहीं मिल रहा दाम : सरकार द्वारा इस बार बाजरे का न्यूनतम रेट 2150 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करने वाले किसानों की फसल को ही इस दर पर खरीदा जा रहा है। ऑनलाइन आवेदन नहीं करने वाले किसानों की फसलों को 1000-1200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। (संवाद)
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सरकार ने बाजरे की खरीद के समय पर बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन अमल नहीं किया है। फसल बेचने के बाद अब किसानों को भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। - रणजीत नंबरदार, किसान।
अब किसान रबी की फसलों की तैयारी में जुटे हुए हैं। फसल बेचने के बाद भी किसानों को पैसे नहीं मिल रहे हैं। इससे सीधे तौर पर कृषि कार्य प्रभावित हो रहा है। - आनंद, सरपंच आटा।
सरकार किसानों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा सभी परेशान हैं। ये भाजपा का असली विकास है। - फकरुद्दीन एडवोकेट, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता।
किसानों की इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान कराया जाएगा। किसानों को उनकी फसलों के दाम जल्द दिलाए जाएंगे। इस बारे में उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी। - प्रदीप अहलावत, एसडीएम नूंह।
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नूंह अनाज मंडी में 2664 मीट्रिक टन बाजरे की आवक हुई है। किसानों के मुताबिक पहले तो उन्हें कागजी कार्रवाई के कारण परेशानी हुई। कई दिनों तक फसल मंडी में ही पड़ी रही। फसल की निगरानी भी खुद करनी पड़ी। कई बार कुछ किसान फसलों को वापस लेकर भी घर लौट गए। सत्यदेव, सतीश, सुखबीर, रविंद्र निवासी खेड़ली दोसा, सुरेंद्र निवासी छपेड़ा ने बताया कि करीब 15 दिन पहले फसलों को खरीदा गया था, लेकिन उन्हें भुगतान नहीं किया गया है। कोई सुनने वाला नहीं है।
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नहीं मिल रहा दाम : सरकार द्वारा इस बार बाजरे का न्यूनतम रेट 2150 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करने वाले किसानों की फसल को ही इस दर पर खरीदा जा रहा है। ऑनलाइन आवेदन नहीं करने वाले किसानों की फसलों को 1000-1200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। (संवाद)
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सरकार ने बाजरे की खरीद के समय पर बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन अमल नहीं किया है। फसल बेचने के बाद अब किसानों को भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। - रणजीत नंबरदार, किसान।
अब किसान रबी की फसलों की तैयारी में जुटे हुए हैं। फसल बेचने के बाद भी किसानों को पैसे नहीं मिल रहे हैं। इससे सीधे तौर पर कृषि कार्य प्रभावित हो रहा है। - आनंद, सरपंच आटा।
सरकार किसानों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा सभी परेशान हैं। ये भाजपा का असली विकास है। - फकरुद्दीन एडवोकेट, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता।
किसानों की इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान कराया जाएगा। किसानों को उनकी फसलों के दाम जल्द दिलाए जाएंगे। इस बारे में उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी। - प्रदीप अहलावत, एसडीएम नूंह।