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Noida News: किसानों की छह महीने की मेहनत का नहीं मिल पा रहा सही मोल

Thu, 11 Sep 2025 12:11 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 11 Sep 2025 12:11 AM IST
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Farmers are not getting the right price for their six months of hard work
सिरसा। घग्गर और बरसाती पानी के कारण हजारों एकड़ भूमि जलमग्न हो चुकी है। कहीं नरमे, ग्वार, बाजरे को नुकसान है तो कहीं धान पूरी तरह से जल समाधि ले चुका है। सरकार प्रति एकड़ 15,000 रुपये देने की घोषणा कर रही है। यह घोषणा प्रति एकड़ 32 से 35 हजार रुपये खर्च के आगे आधे भी नहीं है।
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प्रति एकड़ खर्च के अलावा किसान की छह महीने की मेहनत का का कोई मोल नहीं है। उसके श्रम को कोई देखता नहीं है। वहीं, कई लोगों ने प्रति एकड़ 70 से 90 हजार रुपये ठेके पर भूमि ली हुई थी। कई ऐसे छोटे जमींदार है, जिनको ठेके की रकम देने के लिए कर्ज लेना होगा या जिन्होंने कर्ज लेकर ठेके पर ली थी। वो किसान अब अपनी भूमि बेचते की स्थिति में पहुंच गए हैं।
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वहीं, किसान मांग कर रहे हैं कि सरकारी लोन के ब्याज को पूरी तरह से माफ किया जाएगा। साथ ही छोटे किसानों को लोन माफी भी दी जाए, जिससे किसानों को फिर से उभरने में मदद मिल सके। किसानों की अधिकतर भूमि बैंकों के अधीन है। ऐसे में किसानों को सरकार से बैंक राहत की उम्मीद है। वहीं, किसानों की मांग है कि मुआवजे की राशि को बढ़ाकर प्रति एकड़ 35 हजार रुपये किया जाए।
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धान पर प्रति एकड़ खर्च

जमीन की बुआई - 2500 रुपये

पनीरी - 500 से 900 मरला

रोपाई - 3500 रुपये

खाद - यूरिया - 1000, डीएपी - 1350, सुपर - 800

स्प्रे - 6000 रुपये

कटाई - 4000 रुपये

कढ़ाई - 3500 रुपये

पराली प्रबंधन - 3000 रुपये

बिजली मोटर व ट्रैक्टर का प्रयोग का खर्च -- 3000 रुपये

औसत पैदावार - 20 से 25 क्विंटल

औसतन भाव - 2700-3000 रुपये

प्रति एकड़ औसत खर्च - 32,000 से 35000 रुपये

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धान की फसल में खेत जोतने से लेकर रोपाई, लेबर सहित अब तक करीब 32 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से खर्च कर चुके हैं। धान की फसल को बच्चों की तरह से पालकर बड़ा किया था। आखों के सामने ही बाढ़ के पानी में बर्बाद हो गई है। सरकार को चाहिए कि किसानों को फसल की लागत के अनुसार मुआवजा दे, ताकि किसानों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। --- सिमरन, किसान, गांव केलनियां।

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गांव में 85 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दो एकड़ ठेके पर ली हुई थी जो घग्गर के पानी से बर्बाद हो गई है। प्रति एकड़ धान की फसल पर करीब 35 हजार का खर्च कर चुके हैं, लेकिन सरकार मुआवजे के नाम पर 15 हजार रुपये देने का वादा कर रही है जो किसान की लागत के अनुसार बेहद कम है तो सरकार को चाहिए कि किसान की फसल का सही मुआवजा दिया जाए।

----- बलविंद्र सिंह, किसान, गांव अहमदपुर।



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छह एकड़ फसल में धान लगाया हुआ था। इसमें प्रति एकड़ के हिसाब से 30 हजार के करीब खर्च हो चुका था। बाढ़ का पानी आने के कारण सारी फसल बाढ़ में नष्ट हो गई है। सरकार मुआवजे का वादा कर रही है, लेकिन जो राशि सरकार की ओर से तय की गई है वह किसान के लिए बहुत कम है। इससे किसान की लागत तक पुरी नही होती है ऐसे में सरकार को इसमें सुधार करना चाहिए। वहीं, कुछ छोटे किसानों ने गुजारे के लिए 85 से 90 हजार के करीब ठेके पर भी ले रखी होगी उसके लिए भरपाई करना बेहद मुश्किल है, सरकार को उनकी ओर भी ध्यान देना चाहिए। --- विरेंद्र कंबोज, किसान, गांव मीरपुर।
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