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परीक्षाएं करीब, ऑनलाइन पढ़ाई से कोसों दूर गांवों के बच्चे
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फिरोजपुर झिरका। कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के चलते स्कूलों पर लगे ताले बच्चों की पढ़ाई को लेकर अभिभावको में चिंता बढ़ने लगी है। बच्चों की परीक्षाएं पास हैं, लेकिन तैयारी नहीं हो पा रही है। हालांकि शिक्षा विभाग की ओर से ऑनलाइन पढ़ाई कराने दावा किया जा रहा है लेकिन जिले में 80 प्रतिशत गरीब बच्चों के पास सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में यह बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई से कोसों दूर हैं।
जिले में भले ही कोरोना वायरस के आंकड़े अन्य जिलों के मुकाबले कम हैं, लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से सतर्कता के आधार पर 30 नवंबर तक निजी व सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया है जबकि पहली से आठवीं के स्कूलों पर 8 माह से ताला लगा हुआ है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव ग्रामीण अंचल के गरीब बच्चों पर पड़ा है। साहुन बीवां, हनीफ रावली, हाजी फारुख, अकलिमपुर, सहीद, कंसाली, रजमल कोलगांव, हामिद सरपंच आदि ने कहा कि यह सही है की सरकार कोरेना वायरस के बचाव में स्कूलों को बंद कर रही है। उसके आधार पर शिक्षा विभाग बच्चो को घर बैठे ऑनलाइन पढ़ाई करवा रहा है। लेकिन जिले में 80 प्रतिशत गरीब परिवार हैं। उनके बच्चे सरकारी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करते है। ऐसे परिवार में एक मोबाइल है, उसमें नेट नहीं चल सकता, महंगे मोबाइल खरीदना गरीब परिवारों की बस की बात नहीं है। किसी के पास मोबाइल है, तो नेट रिचार्ज कराने के पैसे नही है। उससे भी ज्यादा परेशानी यह कि गांवों में आज भी नेटवर्क नहीं आता। इसलिए शिक्षा विभाग की ऑनलाइन पढ़ाई से गांवों के गरीब बच्चे कोसो दूर है।
वर्जन-
पढ़ाई से पहले बच्चों का कोरोना वायरस से बचाना जरूरी है। शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार स्कूल बंद किए गए हैं। ऑनलाइन पढ़ाई की निरंतर जारी है। अगर मोबाइल नेटवर्क की समस्या है तो सभी समस्याओं का समाधान शिक्षा विभाग के पास भी नहीं है। - इंद्रजीत सिंह मजोका, खंड शिक्षा अधिकारी, फिरोजपुर झिरका
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जिले में भले ही कोरोना वायरस के आंकड़े अन्य जिलों के मुकाबले कम हैं, लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से सतर्कता के आधार पर 30 नवंबर तक निजी व सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया है जबकि पहली से आठवीं के स्कूलों पर 8 माह से ताला लगा हुआ है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव ग्रामीण अंचल के गरीब बच्चों पर पड़ा है। साहुन बीवां, हनीफ रावली, हाजी फारुख, अकलिमपुर, सहीद, कंसाली, रजमल कोलगांव, हामिद सरपंच आदि ने कहा कि यह सही है की सरकार कोरेना वायरस के बचाव में स्कूलों को बंद कर रही है। उसके आधार पर शिक्षा विभाग बच्चो को घर बैठे ऑनलाइन पढ़ाई करवा रहा है। लेकिन जिले में 80 प्रतिशत गरीब परिवार हैं। उनके बच्चे सरकारी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करते है। ऐसे परिवार में एक मोबाइल है, उसमें नेट नहीं चल सकता, महंगे मोबाइल खरीदना गरीब परिवारों की बस की बात नहीं है। किसी के पास मोबाइल है, तो नेट रिचार्ज कराने के पैसे नही है। उससे भी ज्यादा परेशानी यह कि गांवों में आज भी नेटवर्क नहीं आता। इसलिए शिक्षा विभाग की ऑनलाइन पढ़ाई से गांवों के गरीब बच्चे कोसो दूर है।
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वर्जन-
पढ़ाई से पहले बच्चों का कोरोना वायरस से बचाना जरूरी है। शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार स्कूल बंद किए गए हैं। ऑनलाइन पढ़ाई की निरंतर जारी है। अगर मोबाइल नेटवर्क की समस्या है तो सभी समस्याओं का समाधान शिक्षा विभाग के पास भी नहीं है। - इंद्रजीत सिंह मजोका, खंड शिक्षा अधिकारी, फिरोजपुर झिरका
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