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छह साल पहले भी चली थीं कोर्ट रूम में गोलियां

Sat, 25 Sep 2021 12:50 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 25 Sep 2021 12:50 AM IST
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Even six years ago, there were bullets in the court room
धीरज बेनीवाल
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नई दिल्ली। रोहिणी जिला अदालत में शुक्रवार को हुई वारदात की ही तरह ही छह साल पहले कड़कड़डूमा अदालत के कोर्ट रूम में भी गोलियां चली थीं। ये गोलीबारी भी गैंगवार का ही नतीजा थी लेकिन इसे चार नाबालिगों ने अंजाम दिया था।
इस वारदात में जज साहब बाल-बाल बचे थे, लेकिन दिल्ली पुलिस के सिपाही रामकुमार की गोली लगने से मौत हो गई थी। वहीं इस वारदात में पेशी पर आया बदमाश इरफान उर्फ छेनू पहलवान भी गोली लगने से घायल हो गया था।
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23 दिसंबर 2015 को कोर्ट रूम संख्या 73 में हुई वारदात में तत्कालीन कोर्ट रूम में सुनवाई कर रहे थे। उस दौरान हथियार लेकर वहां पहुंचे नाबालिगों ने पेशी पर आए बदमाश पर गोलियां चला दी थीं। ये इस तरह का पहला मामला था।
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इस तरह कोर्ट रूम में गोली चलने से चारों तरह अफरा तफरी मच गई थी। एक गोली जज साहब के नजदीक से निकल गई थी और उन्होंने नीचे झुककर अपने आप को बचाया था।
इसके बाद कोर्ट रूम में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। यहां आने वालों के लिए पास जारी करने की व्यवस्था शुरू की गई थी। मीडियाकर्मियों को भी पास जारी करने की व्यवस्था शुरू हुई थी।
उस समय पुलिस ने कहा था कि जेल में बंद इरफान उर्फ छेनू पहलवान और अब्दुल नासिर उर्फ खैबर हैयार के बीच चल रही गैंगवार के कारण ही कोर्ट रूम में ये गोलीबारी हुई। दोनों के बीच लंबे समय से विवादित प्रॉपर्टी, सट्टे और वर्चस्व की लड़ाई को लेकर गैंगवार चल रही थी।
ये बात निकलकर सामने आई थी कि नासिर ने ही योजना बनाकर नाबालिगों से इरफान उर्फ छेनू की हत्या करवाने की साजिश कथित रूप से रची थी। दोनों के बीच 2011 में आतिफ की हत्या के बाद गैंगवार शुरू हुई थी।
पेश मामले से वकील रहे एसएन खान ने बताया कि चारों नाबालिगों को मौके से ही पकड़ लिया गया था। इस बाबत पुलिस ने थाना फर्श बाजार में एफआईआर संख्या 1009/2015 दर्ज की थी।
पुलिस ने इस मामले में नासिर को साजिशकर्ता बताया था। इस मामले में पुलिस ने नासिर, शिव शक्ति नायडू, शाहरुख, आजीम, जमाल उर्फ रांझा के अलावा चार नाबालिगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।

एसएन खान ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान तीन साल की अवधि के अदालत ने चारों नाबालिगों को जमानत पर रिहा कर दिया था। हालांकि अन्य आरोपियों पर मुकदमा अभी भी कोर्ट में विचाराधीन है। इनमें शिव शक्ति नायडू की पुलिस एनकाउंटर में मौत हो चुकी है।
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