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‘त्रिवेणी’ के संगम से बेहतर होगा पर्यावरण, मिलेगी घनी छाया
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ग्रेटर नोएडा। शहर के युवाओं की एक टीम ने त्रिवेणी रोपण मिशन-2022 शुरू किया है। इसके तहत टीम 101 जगहों पर तीन पौधों यानी त्रिवेणी (वट, नीम और पीपल) लगाएंगे। इनसे पर्यावरण को काफी लाभ पहुंचेगा। युवाओं की टीम त्रिवेणी रोपण के प्रति लोगों को जागरूक करेगी, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें। जागो युवा संगठन और सोशल एक्शन फॉर फोरेस्ट एंड एनवायरनमेंट संगठन के युवाओं ने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस से यह मुहिम शुरू की है। पर्यावरणविद् विकास तोंगड़ ने बताया कि मुहिम के तहत ग्रेनो वेस्ट के खैरपुर गांव में संगोष्ठी हुई। जहां ग्रामीणों को मिशन की जानकारी दी गई।
टीम के सदस्य हर माह 10 जगह पर त्रिवेणी रोपण करेंगे। त्रिवेणी में तीन पौधे होंगे। उन्होंने बताया कि नीम, वट और पीपल दूसरे पेड़ों की तुलना में अधिक ऑक्सीजन देते हैं। इनकी आयु भी लंबी होती है और घनी छाया मिलती है। भूस्खलन रोकने में भी दूसरे पेड़ों की तुलना में अधिक कारगर होते हैं। लंबे समय तक देखभाल करने की भी जरूरत नहीं है। इंसान के साथ-साथ पक्षियों को भी इन पेड़ों का बड़ा फायदा होता है। वो आसानी से घोंसले बना लेते हैं। उन्होंने बताया कि 40 से 50 गांवों में 101 स्थानों पर त्रिवेणी रोपण किया जाएगा। इसके साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए संगोष्ठी की जाएगी। खैरपुर में आयोजित संगोष्ठी में अजीपाल, दीपेंद्र, सागर, सतेंद्र, नवीन, सुमित, अरुण, विशाल, विनोद, मानवेंद्र, नागेंद्र, धर्मेंद्र, महरचंद, मोनू, प्रवीण, राजीव और राकेश आदि मौजूद रहे।
क्या है त्रिवेणी
त्रिवेणी के तहत वट, नीम और पीपल के पौधों को त्रिकोण आकार में लगाया जाता है। छह से सात फीट तक बढ़ने पर इनको आपस में मिला दिया जाता है। जब इनका संगम हो जाता है तो त्रिवेणी कहलाता है। त्रिवेणी को खुले और सार्वजनिक स्थानों पर लगाया जाता है।
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टीम के सदस्य हर माह 10 जगह पर त्रिवेणी रोपण करेंगे। त्रिवेणी में तीन पौधे होंगे। उन्होंने बताया कि नीम, वट और पीपल दूसरे पेड़ों की तुलना में अधिक ऑक्सीजन देते हैं। इनकी आयु भी लंबी होती है और घनी छाया मिलती है। भूस्खलन रोकने में भी दूसरे पेड़ों की तुलना में अधिक कारगर होते हैं। लंबे समय तक देखभाल करने की भी जरूरत नहीं है। इंसान के साथ-साथ पक्षियों को भी इन पेड़ों का बड़ा फायदा होता है। वो आसानी से घोंसले बना लेते हैं। उन्होंने बताया कि 40 से 50 गांवों में 101 स्थानों पर त्रिवेणी रोपण किया जाएगा। इसके साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए संगोष्ठी की जाएगी। खैरपुर में आयोजित संगोष्ठी में अजीपाल, दीपेंद्र, सागर, सतेंद्र, नवीन, सुमित, अरुण, विशाल, विनोद, मानवेंद्र, नागेंद्र, धर्मेंद्र, महरचंद, मोनू, प्रवीण, राजीव और राकेश आदि मौजूद रहे।
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क्या है त्रिवेणी
त्रिवेणी के तहत वट, नीम और पीपल के पौधों को त्रिकोण आकार में लगाया जाता है। छह से सात फीट तक बढ़ने पर इनको आपस में मिला दिया जाता है। जब इनका संगम हो जाता है तो त्रिवेणी कहलाता है। त्रिवेणी को खुले और सार्वजनिक स्थानों पर लगाया जाता है।
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