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किसी भी तरह बाधित न हो दिल्ली की पानी आपूर्ति : हाईकोर्ट
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किसी भी तरह बाधित न हो दिल्ली की पानी आपूर्ति : हाईकोर्ट
नई दिल्ली। दिल्ली की जल समस्या पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि राजधानी को आने वाले पानी की आपूर्ति किसी भी तरह बाधित नहीं होनी चाहिए। दिल्ली सरकार ने हरियाणा सरकार पर उसके हिस्से का पानी नहीं देने का आरोप लगाया था। हाईकोर्ट ने इसके लिए सेवानिवृत्त जज इंदरमीत कौर की अगुवाई में कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने हाईकोर्ट में दाखिल अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हरियाणा ने पानी रोकने के लिए 11 स्थानों पर छोटे-छोटे बांध बना दिए हैं, जिससे पानी का प्रवाह रुक रहा है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति एजे भंभानी की खंडपीठ ने जस्टिस इंदरमीत कौर की रिपोर्ट पर विचार के बाद कहा कि राजधानी की ओर आने वाले पानी के प्रवाह में किसी तरह की बाधा न रहे। कमेटी ने यह भी कहा कि बांधों के अलावा हरियाणा में रेत खनन भी हो रहा है। इससे पर्यावरण व वनस्पति को भारी नुकसान हो रहा है। कमेटी ने रिपोर्ट में कहा है कि हरियाणा ने जान-बूझकर यमुना नदी में स्वीकृत रेत खनन की साइटों की जानकारी छिपाई। पानी की अबाध आपूर्ति के लिए सभी छोटे बांधों को हटाना बेहद जरूरी है। हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यमुना में पानी के प्रवाह पर निगरानी रखने और प्रवाह मापने के लिए मीटर लगाने की जरूरत है।
इन सुझावों का हरियाणा सरकार ने विरोध करते हुए कहा कि वह इस रिपोर्ट पर अपनी दलीलें पेश करना चाहती है। हाईकोर्ट ने इसके लिए 22 जुलाई तक का समय अपनी दलीलें पेश करने के लिए दिया है। कोर्ट ने कहा कि यमुना में कोई बांध न बनाया जाए। हरियाणा सरकार इन बांधों को हटाए और इन्हें बनाने वालों पर फौरन कार्रवाई करे। हाईकोर्ट ने यमुना में प्रवाह मापने के लिए मीटर लगाने के सुझाव पर सहमति जताते हुए कहा कि इससे दिल्ली को पर्याप्त पानी देने संबंधी आदेश का पालन कराने में मदद मिलेगी। कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली को उतना पानी मिलना ही चाहिए, जितने का आश्वासन हरियाणा सरकार ने दिसंबर 2014 में दिया था। इसके मुताबिक, राजधानी के लिए हरियाणा सरकार को रोज मुनक नहर में 719 क्यूसेक और सब ब्रांच कैनाल में 330 क्यूसेक पानी छोड़ना होता है।
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नई दिल्ली। दिल्ली की जल समस्या पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि राजधानी को आने वाले पानी की आपूर्ति किसी भी तरह बाधित नहीं होनी चाहिए। दिल्ली सरकार ने हरियाणा सरकार पर उसके हिस्से का पानी नहीं देने का आरोप लगाया था। हाईकोर्ट ने इसके लिए सेवानिवृत्त जज इंदरमीत कौर की अगुवाई में कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने हाईकोर्ट में दाखिल अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हरियाणा ने पानी रोकने के लिए 11 स्थानों पर छोटे-छोटे बांध बना दिए हैं, जिससे पानी का प्रवाह रुक रहा है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति एजे भंभानी की खंडपीठ ने जस्टिस इंदरमीत कौर की रिपोर्ट पर विचार के बाद कहा कि राजधानी की ओर आने वाले पानी के प्रवाह में किसी तरह की बाधा न रहे। कमेटी ने यह भी कहा कि बांधों के अलावा हरियाणा में रेत खनन भी हो रहा है। इससे पर्यावरण व वनस्पति को भारी नुकसान हो रहा है। कमेटी ने रिपोर्ट में कहा है कि हरियाणा ने जान-बूझकर यमुना नदी में स्वीकृत रेत खनन की साइटों की जानकारी छिपाई। पानी की अबाध आपूर्ति के लिए सभी छोटे बांधों को हटाना बेहद जरूरी है। हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यमुना में पानी के प्रवाह पर निगरानी रखने और प्रवाह मापने के लिए मीटर लगाने की जरूरत है।
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इन सुझावों का हरियाणा सरकार ने विरोध करते हुए कहा कि वह इस रिपोर्ट पर अपनी दलीलें पेश करना चाहती है। हाईकोर्ट ने इसके लिए 22 जुलाई तक का समय अपनी दलीलें पेश करने के लिए दिया है। कोर्ट ने कहा कि यमुना में कोई बांध न बनाया जाए। हरियाणा सरकार इन बांधों को हटाए और इन्हें बनाने वालों पर फौरन कार्रवाई करे। हाईकोर्ट ने यमुना में प्रवाह मापने के लिए मीटर लगाने के सुझाव पर सहमति जताते हुए कहा कि इससे दिल्ली को पर्याप्त पानी देने संबंधी आदेश का पालन कराने में मदद मिलेगी। कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली को उतना पानी मिलना ही चाहिए, जितने का आश्वासन हरियाणा सरकार ने दिसंबर 2014 में दिया था। इसके मुताबिक, राजधानी के लिए हरियाणा सरकार को रोज मुनक नहर में 719 क्यूसेक और सब ब्रांच कैनाल में 330 क्यूसेक पानी छोड़ना होता है।
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