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समान बिल्डिंग बायलॉज लागू करना उद्योगों के साथ छलावा : नाहटा
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एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने की प्रस्ताव वापस लेने की मांग, कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने यूपी सरकार से मांग की है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण (यीडा) पर प्रदेश के अन्य शहरी विकास प्राधिकरणों की तरह समान बिल्डिंग बायलॉज लागू करने के प्रस्ताव को तत्काल वापस ले। एसोसिएशन ने इसे उद्योगों के साथ सीधा छलावा और कानूनी ढांचे के खिलाफ बताया है। चेतावनी दी कि यदि प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो एसोसिएशन इसे न्यायालय तक ले जाएगी।
एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह नाहटा ने कहा कि औद्योगिक प्राधिकरणों का गठन उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम 1976 के तहत हुआ था जबकि अन्य विकास प्राधिकरण नगर निगम व शहरी विकास अधिनियम 1973 के अंतर्गत आते हैं। दोनों अधिनियमों के उद्देश्य अलग हैं। एक का मकसद उद्योगों बढ़ावा देना व रोजगार सृजन करना है जबकि दूसरा निवासी व व्यावसायिक क्षेत्रों के विकास पर केंद्रित है।
उन्होंने कहा कि हजारों उद्यमियों ने मौजूदा औद्योगिक नीति और बायलॉज के आधार पर भूखंड खरीदकर उद्योग स्थापित किए हैं। ऐसे में समान बिल्डिंग बायलॉज लागू करना पहले से स्थापित उद्योगों के साथ ठगी के समान है। इससे निवेश और उत्पादन दोनों प्रभावित होंगे।
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एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि समान बिल्डिंग बायलॉज का प्रस्ताव वापस लिया जाए। औद्योगिक प्राधिकरणों के लिए अलग उद्योग हितैषी बायलॉज तैयार किए जाएं। उद्यमियों के निवेश और अधिकारों की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने यूपी सरकार से मांग की है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण (यीडा) पर प्रदेश के अन्य शहरी विकास प्राधिकरणों की तरह समान बिल्डिंग बायलॉज लागू करने के प्रस्ताव को तत्काल वापस ले। एसोसिएशन ने इसे उद्योगों के साथ सीधा छलावा और कानूनी ढांचे के खिलाफ बताया है। चेतावनी दी कि यदि प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो एसोसिएशन इसे न्यायालय तक ले जाएगी।
एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह नाहटा ने कहा कि औद्योगिक प्राधिकरणों का गठन उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम 1976 के तहत हुआ था जबकि अन्य विकास प्राधिकरण नगर निगम व शहरी विकास अधिनियम 1973 के अंतर्गत आते हैं। दोनों अधिनियमों के उद्देश्य अलग हैं। एक का मकसद उद्योगों बढ़ावा देना व रोजगार सृजन करना है जबकि दूसरा निवासी व व्यावसायिक क्षेत्रों के विकास पर केंद्रित है।
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उन्होंने कहा कि हजारों उद्यमियों ने मौजूदा औद्योगिक नीति और बायलॉज के आधार पर भूखंड खरीदकर उद्योग स्थापित किए हैं। ऐसे में समान बिल्डिंग बायलॉज लागू करना पहले से स्थापित उद्योगों के साथ ठगी के समान है। इससे निवेश और उत्पादन दोनों प्रभावित होंगे।
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एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि समान बिल्डिंग बायलॉज का प्रस्ताव वापस लिया जाए। औद्योगिक प्राधिकरणों के लिए अलग उद्योग हितैषी बायलॉज तैयार किए जाएं। उद्यमियों के निवेश और अधिकारों की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।