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Noida News: इको-फ्रेंडली बप्पा की धूम, 27 से शुरू होगा उत्सव
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इको-फ्रेंडली बप्पा की धूम, 27 से शुरू होगा उत्सव
मिट्टी व अन्य प्राकृतिक पदार्थों से बनाई जाती हैं मूर्तियां, जो पानी में आसानी से घुल जाती हैं
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त से धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस बार शहर के कई परिवार और मूर्तिकार पारंपरिक मूर्तियों की बजाय इको-फ्रेंडली गणेश की ओर रुख कर रहे हैं। लोग पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण से बचाव के लिए मिट्टी, गोबर, बीज और शुद्ध रंगों से बनी मूर्तियों को अपना रहे हैं।
शहर के कई इलाकों में मूर्तिकार पहले से ही प्राकृतिक रंगों और प्रकृति में जल्दी घुल जाने वाली (इको फ्रेंडली) सामग्री से मूर्तियां तैयार कर रहे हैं। यह मिट्टी आमतौर पर यमुना और गंगा जैसी नदियों के किनारे और किसानों के खेतों से लाई गई है। इन मूर्तियों में प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) या रासायनिक रंगों का उपयोग नहीं किया गया है। गेरू, हल्दी, चावल का आटा और पत्तों से तैयार रंगों से मूर्तियों को सजाया जा रहा है। हालांकि कुछ बड़ी मूर्तियां ऐसी भी हैं, जिन्हें मजबूती देने के लिए पीओपी का भी प्रयोग किया जा रहा है। सेक्टर-12 के मूर्तिकार अशोक कुमार ने बताया कि इस बार उन्हें ज्यादा ऑर्डर इको-फ्रेंडली मूर्तियों के मिले हैं। वहीं कई आरडब्ल्यूए और मंदिर समितियां भी लोगों से अपील कर रही हैं कि इस बार घर और सोसाइटी में अधिक से अधिक इको-फ्रेंडली गणेश की मूर्तियों का ही उपयोग करें। इसी तरह सेक्टर-18 की अट्टा मार्केट, सेक्टर 27 की इंदिरा मार्केट समेत हरौला, सेक्टर-12-22 समेत अन्य स्थानों पर छोटे आकार की मिट्टी की मूर्तियां बिक रही हैं।
शिक्षण संस्थान भी दे रहे इको फ्रेंडली को बढ़ावा
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्रों को मिट्टी के गणेश और उनमें अंकुरित बीजों के उपयोग से मूर्तियां तैयार कराने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जहां उन्हें इसकी महत्ता और पर्यावरण संरक्षण के फायदे बताए जा रहे हैं। वनस्पति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ संघमित्रा का कहना है कि इको-फ्रेंडली गणेश का चलन भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
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नोएडा एक्सटेंशन सेक्टर-1 निवासी ऐश्वर्या पर्यावरण का ध्यान रखते हुए इस बार मिट्टी से गणेश की मूर्ति को तैयार कर रही हैं। उन्होंने बताया कि इसमें तुलसी समेत अन्य पौधों के बीजों को भी मिलाया है। जब गणेश की मूर्ति का विसर्जन होगा, तो अगले कुछ ही दिन में इस घुल चुकी मिट्टी में पौधे उगने लगेंगे।
सेक्टर-31 निठारी निवासी मंजू छाबरा इको फ्रेंडली मूर्तियां तैयार कर रही हैं। वह अपने मोर देन आर्ट स्टूडियो में हर साल इको फ्रेंडली मूर्तियां तैयार करती हैं, जो सुंदर होने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी उपयोगी हैं। यह मूर्तियां आस पड़ोस व अन्य लोगों को भेंट करती हैं।
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मूर्ति की ऊंचाई अनुमानित कीमत
6 इंच 200 – 400
9 इंच 400 – 700
12 इंच 700 – 1,200
24 इंच 2,500- 4,000
30 इंच (2.5 फीट) 4,500 – 7,000
36 इंच (3 फीट) 7,000 – 12,000
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नोट : डिजाइन व स्थान के अनुसार इनके रेट बदलते हैं।
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मिट्टी व अन्य प्राकृतिक पदार्थों से बनाई जाती हैं मूर्तियां, जो पानी में आसानी से घुल जाती हैं
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त से धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस बार शहर के कई परिवार और मूर्तिकार पारंपरिक मूर्तियों की बजाय इको-फ्रेंडली गणेश की ओर रुख कर रहे हैं। लोग पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण से बचाव के लिए मिट्टी, गोबर, बीज और शुद्ध रंगों से बनी मूर्तियों को अपना रहे हैं।
शहर के कई इलाकों में मूर्तिकार पहले से ही प्राकृतिक रंगों और प्रकृति में जल्दी घुल जाने वाली (इको फ्रेंडली) सामग्री से मूर्तियां तैयार कर रहे हैं। यह मिट्टी आमतौर पर यमुना और गंगा जैसी नदियों के किनारे और किसानों के खेतों से लाई गई है। इन मूर्तियों में प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) या रासायनिक रंगों का उपयोग नहीं किया गया है। गेरू, हल्दी, चावल का आटा और पत्तों से तैयार रंगों से मूर्तियों को सजाया जा रहा है। हालांकि कुछ बड़ी मूर्तियां ऐसी भी हैं, जिन्हें मजबूती देने के लिए पीओपी का भी प्रयोग किया जा रहा है। सेक्टर-12 के मूर्तिकार अशोक कुमार ने बताया कि इस बार उन्हें ज्यादा ऑर्डर इको-फ्रेंडली मूर्तियों के मिले हैं। वहीं कई आरडब्ल्यूए और मंदिर समितियां भी लोगों से अपील कर रही हैं कि इस बार घर और सोसाइटी में अधिक से अधिक इको-फ्रेंडली गणेश की मूर्तियों का ही उपयोग करें। इसी तरह सेक्टर-18 की अट्टा मार्केट, सेक्टर 27 की इंदिरा मार्केट समेत हरौला, सेक्टर-12-22 समेत अन्य स्थानों पर छोटे आकार की मिट्टी की मूर्तियां बिक रही हैं।
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शिक्षण संस्थान भी दे रहे इको फ्रेंडली को बढ़ावा
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्रों को मिट्टी के गणेश और उनमें अंकुरित बीजों के उपयोग से मूर्तियां तैयार कराने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जहां उन्हें इसकी महत्ता और पर्यावरण संरक्षण के फायदे बताए जा रहे हैं। वनस्पति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ संघमित्रा का कहना है कि इको-फ्रेंडली गणेश का चलन भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
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नोएडा एक्सटेंशन सेक्टर-1 निवासी ऐश्वर्या पर्यावरण का ध्यान रखते हुए इस बार मिट्टी से गणेश की मूर्ति को तैयार कर रही हैं। उन्होंने बताया कि इसमें तुलसी समेत अन्य पौधों के बीजों को भी मिलाया है। जब गणेश की मूर्ति का विसर्जन होगा, तो अगले कुछ ही दिन में इस घुल चुकी मिट्टी में पौधे उगने लगेंगे।
सेक्टर-31 निठारी निवासी मंजू छाबरा इको फ्रेंडली मूर्तियां तैयार कर रही हैं। वह अपने मोर देन आर्ट स्टूडियो में हर साल इको फ्रेंडली मूर्तियां तैयार करती हैं, जो सुंदर होने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी उपयोगी हैं। यह मूर्तियां आस पड़ोस व अन्य लोगों को भेंट करती हैं।
मूर्ति की ऊंचाई अनुमानित कीमत
6 इंच 200 – 400
9 इंच 400 – 700
12 इंच 700 – 1,200
24 इंच 2,500- 4,000
30 इंच (2.5 फीट) 4,500 – 7,000
36 इंच (3 फीट) 7,000 – 12,000
नोट : डिजाइन व स्थान के अनुसार इनके रेट बदलते हैं।