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रिपोर्ट देखते ही एचआईवी पॉजिटिव मरीज को किया रेफर
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रिपोर्ट देखते ही एचआईवी पॉजिटिव मरीज को किया रेफर
नोएडा। एक ओर आयुष्मान योजना के तहत गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है। स्वास्थ्य महकमा इसके लिए खासी जद्दोजहद भी कर रहा है। लेकिन, ऐसे दावे तब हवा हो जाते हैं, जब मरीजों को उपचार के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। जिसमें एक रिपोर्ट देखते ही एचआईवी पॉजिटिव मरीज को जिला अस्पताल समेत चार सरकारी हॉस्पिटल से रेफर कर दिया गया। इतना ही नहीं, इस दौरान चिकित्सकों ने उसे हाथ लगाना तो दूर तकलीफ तक नहीं पूछी। हद तो तब हो गई जब सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद भी उसे उपचार मुहैया नहीं हो सका। मजबूरी में उसे निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ रहा है। हालांकि, मामले की जानकारी होने पर सीएमओ ने जांच के आदेश दिए हैं। पीड़ित ने बताया कि फरवरी के प्रथम सप्ताह में ग्रेटर नोएडा स्थित कांशीराम अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचा था। जांच के बाद मिली रिपोर्ट में उसे एचआईवी पॉजिटिव होने का पता चला। उसने बताया कि डॉक्टर ने रिपोर्ट देखते ही उसे तुरंत जिला अस्पताल रेफर कर दिया। एंबुलेंस से जब जिला अस्पताल पहुंचा तो इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर ने डॉक्टर ने हाथ लगाना तो दूर की बात है। बिना तकलीफ पूछे ही तुरंत दिल्ली रेफर कर दिया। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल पहुंचने पर वहां तैनात डॉक्टर ने एक बार फिर उसे महरौली के अस्पताल रेफर कर दिया। चार सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद भी उसे इलाज नहीं मिला। अब मजबूरी में निजी अस्पताल में जाना पड़ा है।
मरीज की नहीं की गई काउंसलिंग
सरकार की तरफ से जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की काउंसलिंग के लिए काउंसलर नियुक्त किए गए हैं। इनका काम मरीज की काउंसिलिंग कर उनमें सकारात्मक सोच और बीमारी से लड़ने की हिम्मत पैदा करना है। उक्त मामले में ऐसा कुछ नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार, जब पीड़ित जिला अस्पताल पहुंचा तो उसकी काउसंलिंग कराने के बजाए सीधे रेफर कर दिया गया।
सीएमओ ने दिए जांच के आदेश
सीएमओ डॉक्टर अनुराग भार्गव ने बताया कि मरीज में एचआईवी पॉजिटिव की पुष्टि होने के बाद पहली बार दवाइयां लेने के लिए उसे गाजियाबाद भेजा जाता है। इसके बाद जिला अस्पताल में ही दवाइयां मिलती हैं। उक्त मामले की जांच की जाएगी कि मरीज को सफदरजंग क्यों रेफर किया गया है। उन्होंने बताया कि हो सकता है मरीज को कोई और भी बीमारी हो। छूने से एचआईवी नहीं फैलता है। अगर डॉक्टर ने ऐसा किया है तो गलत किया है। जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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नोएडा। एक ओर आयुष्मान योजना के तहत गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है। स्वास्थ्य महकमा इसके लिए खासी जद्दोजहद भी कर रहा है। लेकिन, ऐसे दावे तब हवा हो जाते हैं, जब मरीजों को उपचार के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। जिसमें एक रिपोर्ट देखते ही एचआईवी पॉजिटिव मरीज को जिला अस्पताल समेत चार सरकारी हॉस्पिटल से रेफर कर दिया गया। इतना ही नहीं, इस दौरान चिकित्सकों ने उसे हाथ लगाना तो दूर तकलीफ तक नहीं पूछी। हद तो तब हो गई जब सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद भी उसे उपचार मुहैया नहीं हो सका। मजबूरी में उसे निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ रहा है। हालांकि, मामले की जानकारी होने पर सीएमओ ने जांच के आदेश दिए हैं। पीड़ित ने बताया कि फरवरी के प्रथम सप्ताह में ग्रेटर नोएडा स्थित कांशीराम अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचा था। जांच के बाद मिली रिपोर्ट में उसे एचआईवी पॉजिटिव होने का पता चला। उसने बताया कि डॉक्टर ने रिपोर्ट देखते ही उसे तुरंत जिला अस्पताल रेफर कर दिया। एंबुलेंस से जब जिला अस्पताल पहुंचा तो इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर ने डॉक्टर ने हाथ लगाना तो दूर की बात है। बिना तकलीफ पूछे ही तुरंत दिल्ली रेफर कर दिया। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल पहुंचने पर वहां तैनात डॉक्टर ने एक बार फिर उसे महरौली के अस्पताल रेफर कर दिया। चार सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद भी उसे इलाज नहीं मिला। अब मजबूरी में निजी अस्पताल में जाना पड़ा है।
मरीज की नहीं की गई काउंसलिंग
सरकार की तरफ से जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की काउंसलिंग के लिए काउंसलर नियुक्त किए गए हैं। इनका काम मरीज की काउंसिलिंग कर उनमें सकारात्मक सोच और बीमारी से लड़ने की हिम्मत पैदा करना है। उक्त मामले में ऐसा कुछ नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार, जब पीड़ित जिला अस्पताल पहुंचा तो उसकी काउसंलिंग कराने के बजाए सीधे रेफर कर दिया गया।
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सीएमओ ने दिए जांच के आदेश
सीएमओ डॉक्टर अनुराग भार्गव ने बताया कि मरीज में एचआईवी पॉजिटिव की पुष्टि होने के बाद पहली बार दवाइयां लेने के लिए उसे गाजियाबाद भेजा जाता है। इसके बाद जिला अस्पताल में ही दवाइयां मिलती हैं। उक्त मामले की जांच की जाएगी कि मरीज को सफदरजंग क्यों रेफर किया गया है। उन्होंने बताया कि हो सकता है मरीज को कोई और भी बीमारी हो। छूने से एचआईवी नहीं फैलता है। अगर डॉक्टर ने ऐसा किया है तो गलत किया है। जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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