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ओबीसी से भेदभाव संविधान की मूल भावना के खिलाफ : बलबीर
Wed, 17 Sep 2025 01:39 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
Updated Wed, 17 Sep 2025 01:39 AM IST
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ऊना। किसान योद्धा सरदार रुड़का सिंह कल्याण समिति के अध्यक्ष इंजीनियर बलबीर चौधरी ने कहा कि हिमाचल सरकार को संविधान के 103वें संशोधन की तर्ज पर 93वां संशोधन लागू करना चाहिए था। मगर ऐसा न होने के कारण ओबीसी की 48 जातियों को सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में कोटा नहीं मिल रहा है।
वह सोमवार को चौधरी सभा ललड़ी की बैठक में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। इस बैठक में 20 सितंबर को कांगड़ा से धर्मशाला तक निकाली जाने वाली पैदल यात्रा की रणनीति बनाई गई। उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 प्रतिशत और दलित वर्ग को 15 प्रतिशत कोटा दिया जा रहा है, ओबीसी के साथ भेदभाव संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
बलबीर चौधरी ने शिक्षा क्षेत्र में भी सरकार की लापरवाही पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने 2010 में राइट टू एजुकेशन एक्ट लागू किया था, जिसके तहत प्रदेश सरकार को पक्के शिक्षक तैनात करने थे। मगर 2012 से 2017 तक 2555 एसएमसी कच्चे शिक्षक भर्ती कर लिए गए। इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता गिर गई और बच्चों की संख्या भी कम हुई।
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उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि सरकारी स्कूलों में दाखिला बढ़ाने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए पक्के नर्सरी शिक्षक तुरंत तैनात किए जाएं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि हिमाचल प्रदेश लोकसेवा आयोग में लिखित परीक्षा को 65 प्रतिशत और साक्षात्कार को 35 प्रतिशत महत्व दिया जाए, ताकि ओबीसी के अभ्यर्थियों को उचित अवसर मिल सके। इस मौके पर सभा के प्रधान अशोक कुमार, सुखविंदर कौर, महासचिव कमल प्रसाद, सचिव राजेश चौधरी सहित अन्य उपस्थित रहे। संवाद
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वह सोमवार को चौधरी सभा ललड़ी की बैठक में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। इस बैठक में 20 सितंबर को कांगड़ा से धर्मशाला तक निकाली जाने वाली पैदल यात्रा की रणनीति बनाई गई। उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 प्रतिशत और दलित वर्ग को 15 प्रतिशत कोटा दिया जा रहा है, ओबीसी के साथ भेदभाव संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
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बलबीर चौधरी ने शिक्षा क्षेत्र में भी सरकार की लापरवाही पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने 2010 में राइट टू एजुकेशन एक्ट लागू किया था, जिसके तहत प्रदेश सरकार को पक्के शिक्षक तैनात करने थे। मगर 2012 से 2017 तक 2555 एसएमसी कच्चे शिक्षक भर्ती कर लिए गए। इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता गिर गई और बच्चों की संख्या भी कम हुई।
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उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि सरकारी स्कूलों में दाखिला बढ़ाने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए पक्के नर्सरी शिक्षक तुरंत तैनात किए जाएं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि हिमाचल प्रदेश लोकसेवा आयोग में लिखित परीक्षा को 65 प्रतिशत और साक्षात्कार को 35 प्रतिशत महत्व दिया जाए, ताकि ओबीसी के अभ्यर्थियों को उचित अवसर मिल सके। इस मौके पर सभा के प्रधान अशोक कुमार, सुखविंदर कौर, महासचिव कमल प्रसाद, सचिव राजेश चौधरी सहित अन्य उपस्थित रहे। संवाद