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संसाधन व संरचना स्तर पर कई परिवर्तन लाती है शिक्षा : प्राचार्य
Fri, 12 Sep 2025 12:07 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
Updated Fri, 12 Sep 2025 12:07 AM IST
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डाॅयट एकीकृत शिक्षक प्रशिक्षण संपूर्ण मॉडल पर प्रशिक्षण समाप्ति के बाद प्रशिक्षु शिक्षकों के सा
मेंहदावल। एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम में शिक्षक-प्रशिक्षण अधिक व्यावहारिक प्रभावी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। कार्यक्रम न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने की दिशा में प्रयास करता है, बल्कि शिक्षकों की पेशेवर पहचान को प्रारंभिक स्तर से सुदृढ़ करता है। बृहस्पतिवार को डायट में चल रहे प्रशिक्षण के समापन पर शिक्षकों से डाॅयट प्राचार्य धीरेंद्र त्रिपाठी ने कही।
उन्होंने बताया विषय ज्ञान और शिक्षण कौशल के एकीकरण के कारण यह पारंपरिक बीएड प्रणाली की तुलना में अधिक समग्र व उपयोगी सिद्ध होता है। शिक्षण क्षेत्र में समय, संसाधन व संरचना स्तर पर कई सकारात्मक परिवर्तन लाता है। इसके लाभ बहुआयामी हैं। अध्यापन निस्संदेह एक महान पेशा है। जिसका उद्देश्य एक बच्चे का पालन-पोषण करना व उसे एक मूल्यवान एवं योग्य इंसान के रूप में विकसित करना है।
शिक्षक बनने से पहले, बाल मनोविज्ञान और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया की जटिलताओं को समझने के लिए एक व्यापक सेवा-पूर्व शिक्षक प्रशिक्षण से गुजरना आवश्यक है। उन्होंने कहा सेवा-पूर्व प्रशिक्षण हर समय नौकरी के लिए पर्याप्त नहीं होता। समय के साथ जीवन के सभी क्षेत्रों में परिवर्तन होते हैं और इन सबके साथ बच्चे की ज़रूरतें और सीखने के तरीके भी बदलते हैं।
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यह माना जा रहा है कि शिक्षा एक आजीवन प्रक्रिया है और सेवा-पूर्व प्रशिक्षण के अलावा, सेवारत शिक्षकों के लिए समय-समय पर सेवाकालीन शिक्षक प्रशिक्षण भी आवश्यक है। उन्हें सेवा-पूर्व प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों और कार्यक्रमों के माध्यम से समय-समय पर अद्यतन करना आवश्यक है। प्रशिक्षण प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों के शिक्षकों के लिए तैयार किया गया है। जिले के सभी ब्लाकों के शिक्षकों को इसके तहत प्रशिक्षित किया जा रहा है।
इस अवसर पर डाॅयट प्रवक्ता अभीष्ट देव पांडेय, डॉ सुमित कुमार भास्कर, उपेंद्र यादव, अखंड प्रताप सिंह, डॉ. मनीष मोहन श्रीवास्तव, तृप्ति श्रीवास्तव समेत सभी प्रशिक्षु शिक्षक मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया विषय ज्ञान और शिक्षण कौशल के एकीकरण के कारण यह पारंपरिक बीएड प्रणाली की तुलना में अधिक समग्र व उपयोगी सिद्ध होता है। शिक्षण क्षेत्र में समय, संसाधन व संरचना स्तर पर कई सकारात्मक परिवर्तन लाता है। इसके लाभ बहुआयामी हैं। अध्यापन निस्संदेह एक महान पेशा है। जिसका उद्देश्य एक बच्चे का पालन-पोषण करना व उसे एक मूल्यवान एवं योग्य इंसान के रूप में विकसित करना है।
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शिक्षक बनने से पहले, बाल मनोविज्ञान और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया की जटिलताओं को समझने के लिए एक व्यापक सेवा-पूर्व शिक्षक प्रशिक्षण से गुजरना आवश्यक है। उन्होंने कहा सेवा-पूर्व प्रशिक्षण हर समय नौकरी के लिए पर्याप्त नहीं होता। समय के साथ जीवन के सभी क्षेत्रों में परिवर्तन होते हैं और इन सबके साथ बच्चे की ज़रूरतें और सीखने के तरीके भी बदलते हैं।
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यह माना जा रहा है कि शिक्षा एक आजीवन प्रक्रिया है और सेवा-पूर्व प्रशिक्षण के अलावा, सेवारत शिक्षकों के लिए समय-समय पर सेवाकालीन शिक्षक प्रशिक्षण भी आवश्यक है। उन्हें सेवा-पूर्व प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों और कार्यक्रमों के माध्यम से समय-समय पर अद्यतन करना आवश्यक है। प्रशिक्षण प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों के शिक्षकों के लिए तैयार किया गया है। जिले के सभी ब्लाकों के शिक्षकों को इसके तहत प्रशिक्षित किया जा रहा है।
इस अवसर पर डाॅयट प्रवक्ता अभीष्ट देव पांडेय, डॉ सुमित कुमार भास्कर, उपेंद्र यादव, अखंड प्रताप सिंह, डॉ. मनीष मोहन श्रीवास्तव, तृप्ति श्रीवास्तव समेत सभी प्रशिक्षु शिक्षक मौजूद रहे।