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Noida News: सीटू ने सात सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
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सीटू ने सात सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीआईटीयू) के पदाधिकारियों ने किसानों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सात सूत्रीय मांगों को पूरा करने की मांग की गई है।
सीटू के अध्यक्ष विरेंद्र गौड़ के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन में बताया गया कि संगठन के गौतमबुद्ध नगर के जिला महासचिव राम स्वारथ और जिला सचिव गंगेश्वर दत्त शर्मा को 9 अप्रैल से बिना किसी स्पष्ट कारण के हाउस अरेस्ट में रखा गया है, जो अनुचित है। इसके साथ ही नोएडा फेज-2 स्थित होजरी कॉम्प्लेक्स में चल रहे मजदूरों के तीन दिवसीय आंदोलन का उल्लेख करते हुए उनकी मांगों के शीघ्र समाधान के लिए प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की गई। यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि गैस की कालाबाजारी और बढ़ती महंगाई के कारण मजदूरों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। खाने-पीने की वस्तुओं और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। उदाहरण के तौर पर, पहले जो भोजन थाली 60 रुपये में मिलती थी, वह अब 100 रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि अधिकांश कंपनियों में ठेका मजदूरों को मात्र 10 से 11 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है, जबकि उनसे 12 से 13 घंटे तक काम कराया जाता है। ज्ञापन में प्रमुख मांगों में मजदूर आंदोलनों और संगठनों पर दबाव व दमन की कार्रवाई बंद करने, हाउस अरेस्ट किए गए पदाधिकारियों को रिहा करने समेत कई मांगे शामिल है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीआईटीयू) के पदाधिकारियों ने किसानों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सात सूत्रीय मांगों को पूरा करने की मांग की गई है।
सीटू के अध्यक्ष विरेंद्र गौड़ के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन में बताया गया कि संगठन के गौतमबुद्ध नगर के जिला महासचिव राम स्वारथ और जिला सचिव गंगेश्वर दत्त शर्मा को 9 अप्रैल से बिना किसी स्पष्ट कारण के हाउस अरेस्ट में रखा गया है, जो अनुचित है। इसके साथ ही नोएडा फेज-2 स्थित होजरी कॉम्प्लेक्स में चल रहे मजदूरों के तीन दिवसीय आंदोलन का उल्लेख करते हुए उनकी मांगों के शीघ्र समाधान के लिए प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की गई। यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि गैस की कालाबाजारी और बढ़ती महंगाई के कारण मजदूरों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। खाने-पीने की वस्तुओं और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। उदाहरण के तौर पर, पहले जो भोजन थाली 60 रुपये में मिलती थी, वह अब 100 रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि अधिकांश कंपनियों में ठेका मजदूरों को मात्र 10 से 11 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है, जबकि उनसे 12 से 13 घंटे तक काम कराया जाता है। ज्ञापन में प्रमुख मांगों में मजदूर आंदोलनों और संगठनों पर दबाव व दमन की कार्रवाई बंद करने, हाउस अरेस्ट किए गए पदाधिकारियों को रिहा करने समेत कई मांगे शामिल है।
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