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Noida News: नालों से निकली सिल्ट से हवां में घुल रहा प्रदूषण का जहर
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नोएडा। सेक्टर 40 में सफाई के बाद भी फुटपाथ की हालत बदहाल। संवाद
अभियान पार्ट-2
-फोटो
-ग्रीन बेल्ट में निकालकर छोड़ दी कई कुंतल सिल्ट, आसानी से हवा में घुुल जाते हैं कण
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नाले तो साफ हो गए, मगर शहर की सासें धूल से भर गई है। सड़क किनारे छोड़ी गई सिल्ट अब सूखकर हवा का हिस्सा बन रही है और हर गुजरते वाहन के साथ प्रदूषण की एक नई परत शहर पर बिछ रही है। अगर सिल्ट को जल्द नहीं हटाया गया तो सिल्ट के छोटे-छोटे कण आसानी से हवा में घुुलकर लोगों के शरीर में प्रवेश कर जाएंगे। वाहनों के गुजरने पर ये जहरीले कण हवां में फैल रहे हैं।
बता दें, शहर के कई सेक्टरों और मुख्य मार्गों के किनारे नालों से निकाली गई सिल्ट के ढेर पड़े हैं। भारी और हल्के वाहनों के गुजरने पर सिल्ट के बारीक कण हवा में घुल रहे हैं जिससे आसपास के क्षेत्रों में धूल का गुबार बन जाता है। इससे राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों और आसपास रहने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मानसून से पहले जलभराव की समस्या से निपटने के लिए प्राधिकरण के ठेकेदारों ने नालों की सफाई का अभियान चलाया है। लेकिन सिल्ट की सफाई न होने से शहरवासियों की दुश्वारियां बढ़ गई है। सेक्टर 100, 5, 41 और 40 मेंं सड़क किनारे ही सिल्ट को छोड़ दिया गया है। कई जगहों पर तो ग्रीन बेल्ट में सिल्ट निकालकर डाल दी है। सफाई के दौरान निकाली गई सिल्ट को निर्धारित समय के भीतर उठाया जाना था लेकिन कई स्थानों पर यह केवल कागजों तक सीमित रह गया। नतीजतन अब यही सिल्ट प्रदूषण का कारण बन रही है।
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छोटे कण होने के कारण हवा में बने रहते हैं : सिल्ट के कणों का आकार बेहद छोटा होता है। सूखने के बाद ये कण आसानी से टूटकर और भी बारीक धूल में बदल जाते हैं। वाहनों के गुजरने से री-सस्पेंशन की प्रक्रिया होती है। सड़क पर पड़े सिल्ट के कण वाहनों के पहियों और उनके पीछे बनने वाले वायु दबाव के कारण दोबारा हवा में उड़ जाते हैं। यही कण वातावरण में लंबे समय तक तैरते रहते हैं। नालों से निकाली गई सिल्ट केवल मिट्टी नहीं होती, बल्कि इसमें जैविक अपशिष्ट, सड़े-गले पदार्थ, भारी धातुओं के सूक्ष्म अंश, बैक्टीरिया और अन्य प्रदूषक तत्व भी मौजूद हो सकते हैं।
सिल्ट के कण बेहद सूक्ष्म होते हैं, ये हवा में घुलकर कई बीमारियां फैला सकते हैं। संक्रमित बीमारियाें के अलावा त्वचा रोग की दिक्कतें भी हो सकती हैं। बारिश के दौरान यही केस आते हैं। -डॉ. हरि मोहन गर्ग, चिकित्सक
उद्योग विहार के सेक्टर 82 में गेट नंबर 2 के बाहर नाले की सफाई के दौरान सिल्ट लंबे समय तक नहीं उठाई जाती। इससे निवासियों को काफी दिक्कतें होती हैं प्रदूषण बढ़ने के साथ आवागमन भी बिगड़ता है। -उमा रानी, आरडब्ल्यूए सदस्य सेक्टर 82
सेक्टर में अक्सर सफाई के दौरान सिल्ट को सड़क पर ही छोड़ दिया जाता है। जिसे सूखने के बाद भी नहीं हटाया जाता। हाल ही में सफाई तो हुई लेकिन सिल्ट को सड़क किनारे छोड़ दिया। -संजीव कुमार, महासचिव सेक्टर 51
नाले से निकाली गई गंदगी के कारण प्रदूषण भी बढ़ता जा रहा है। नियमित सफाई होनी चाहिए, जब नाले की सफाई होती है उसी दौरान सिल्ट को उठा लेना चाहिए। -मयंक चौहान, अध्यक्ष आरडब्ल्यूए सेक्टर 82
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-फोटो
-ग्रीन बेल्ट में निकालकर छोड़ दी कई कुंतल सिल्ट, आसानी से हवा में घुुल जाते हैं कण
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नाले तो साफ हो गए, मगर शहर की सासें धूल से भर गई है। सड़क किनारे छोड़ी गई सिल्ट अब सूखकर हवा का हिस्सा बन रही है और हर गुजरते वाहन के साथ प्रदूषण की एक नई परत शहर पर बिछ रही है। अगर सिल्ट को जल्द नहीं हटाया गया तो सिल्ट के छोटे-छोटे कण आसानी से हवा में घुुलकर लोगों के शरीर में प्रवेश कर जाएंगे। वाहनों के गुजरने पर ये जहरीले कण हवां में फैल रहे हैं।
बता दें, शहर के कई सेक्टरों और मुख्य मार्गों के किनारे नालों से निकाली गई सिल्ट के ढेर पड़े हैं। भारी और हल्के वाहनों के गुजरने पर सिल्ट के बारीक कण हवा में घुल रहे हैं जिससे आसपास के क्षेत्रों में धूल का गुबार बन जाता है। इससे राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों और आसपास रहने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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मानसून से पहले जलभराव की समस्या से निपटने के लिए प्राधिकरण के ठेकेदारों ने नालों की सफाई का अभियान चलाया है। लेकिन सिल्ट की सफाई न होने से शहरवासियों की दुश्वारियां बढ़ गई है। सेक्टर 100, 5, 41 और 40 मेंं सड़क किनारे ही सिल्ट को छोड़ दिया गया है। कई जगहों पर तो ग्रीन बेल्ट में सिल्ट निकालकर डाल दी है। सफाई के दौरान निकाली गई सिल्ट को निर्धारित समय के भीतर उठाया जाना था लेकिन कई स्थानों पर यह केवल कागजों तक सीमित रह गया। नतीजतन अब यही सिल्ट प्रदूषण का कारण बन रही है।
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छोटे कण होने के कारण हवा में बने रहते हैं : सिल्ट के कणों का आकार बेहद छोटा होता है। सूखने के बाद ये कण आसानी से टूटकर और भी बारीक धूल में बदल जाते हैं। वाहनों के गुजरने से री-सस्पेंशन की प्रक्रिया होती है। सड़क पर पड़े सिल्ट के कण वाहनों के पहियों और उनके पीछे बनने वाले वायु दबाव के कारण दोबारा हवा में उड़ जाते हैं। यही कण वातावरण में लंबे समय तक तैरते रहते हैं। नालों से निकाली गई सिल्ट केवल मिट्टी नहीं होती, बल्कि इसमें जैविक अपशिष्ट, सड़े-गले पदार्थ, भारी धातुओं के सूक्ष्म अंश, बैक्टीरिया और अन्य प्रदूषक तत्व भी मौजूद हो सकते हैं।
सिल्ट के कण बेहद सूक्ष्म होते हैं, ये हवा में घुलकर कई बीमारियां फैला सकते हैं। संक्रमित बीमारियाें के अलावा त्वचा रोग की दिक्कतें भी हो सकती हैं। बारिश के दौरान यही केस आते हैं। -डॉ. हरि मोहन गर्ग, चिकित्सक
उद्योग विहार के सेक्टर 82 में गेट नंबर 2 के बाहर नाले की सफाई के दौरान सिल्ट लंबे समय तक नहीं उठाई जाती। इससे निवासियों को काफी दिक्कतें होती हैं प्रदूषण बढ़ने के साथ आवागमन भी बिगड़ता है। -उमा रानी, आरडब्ल्यूए सदस्य सेक्टर 82
सेक्टर में अक्सर सफाई के दौरान सिल्ट को सड़क पर ही छोड़ दिया जाता है। जिसे सूखने के बाद भी नहीं हटाया जाता। हाल ही में सफाई तो हुई लेकिन सिल्ट को सड़क किनारे छोड़ दिया। -संजीव कुमार, महासचिव सेक्टर 51
नाले से निकाली गई गंदगी के कारण प्रदूषण भी बढ़ता जा रहा है। नियमित सफाई होनी चाहिए, जब नाले की सफाई होती है उसी दौरान सिल्ट को उठा लेना चाहिए। -मयंक चौहान, अध्यक्ष आरडब्ल्यूए सेक्टर 82

नोएडा। सेक्टर 40 में सफाई के बाद भी फुटपाथ की हालत बदहाल। संवाद

नोएडा। सेक्टर 40 में सफाई के बाद भी फुटपाथ की हालत बदहाल। संवाद

नोएडा। सेक्टर 40 में सफाई के बाद भी फुटपाथ की हालत बदहाल। संवाद

नोएडा। सेक्टर 40 में सफाई के बाद भी फुटपाथ की हालत बदहाल। संवाद

नोएडा। सेक्टर 40 में सफाई के बाद भी फुटपाथ की हालत बदहाल। संवाद