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Noida News: फायरिंग के मामले में तीन आरोपी बरी
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अदालत से-- -
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने वर्ष 2018 के दादरी फायरिंग मामले में तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने जांच में गंभीर खामियां पाईं। इसके चलते चार विवेचकों समेत पांच उपनिरीक्षकों पर विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है। दोषमुक्त किए गए आरोपियों में उमेश पंडित, जुगला उर्फ जुगेन्द्र और योगेश शामिल हैं। वादी कमल भाटी ने 30 अक्तूबर 2018 को दादरी थाने में तहरीर दी थी। उन्होंने अपने भांजे संदीप नागर के साथ फायरिंग का आरोप लगाया था। वादी ने 10 लाख रुपये और हत्याकांड में फैसले के लिए दबाव बनाने की बात कही थी। आरोपी मनोज की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी थी। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की कहानी में कई विसंगतियां पाईं।
जांच में खामियां : अदालत ने कहा कि फायरिंग का दावा किए गए वाहन का तकनीकी मुआयना नहीं हुआ। उसे माल मुकदमाती भी नहीं बनाया गया। प्रथम विवेचक सोनू कुमार ने अहम साक्ष्य कब्जे में नहीं लिया। बाद के विवेचकों अनुज कुमार, जौहर सिंह, अशोक कुमार और यशपाल सिंह ने भी गलतियां सुधारने का प्रयास नहीं किया। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए पांचों उपनिरीक्षकों पर कार्रवाई की अनुशंसा की। तीनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा से रिहा करने का आदेश दिया गया। उमेश तिहाड़ जेल, योगेश मंडोली जेल और जुगला गौतमबुद्धनगर जिला कारागार से वीसी के जरिये पेश हुए।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने वर्ष 2018 के दादरी फायरिंग मामले में तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने जांच में गंभीर खामियां पाईं। इसके चलते चार विवेचकों समेत पांच उपनिरीक्षकों पर विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है। दोषमुक्त किए गए आरोपियों में उमेश पंडित, जुगला उर्फ जुगेन्द्र और योगेश शामिल हैं। वादी कमल भाटी ने 30 अक्तूबर 2018 को दादरी थाने में तहरीर दी थी। उन्होंने अपने भांजे संदीप नागर के साथ फायरिंग का आरोप लगाया था। वादी ने 10 लाख रुपये और हत्याकांड में फैसले के लिए दबाव बनाने की बात कही थी। आरोपी मनोज की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी थी। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की कहानी में कई विसंगतियां पाईं।
जांच में खामियां : अदालत ने कहा कि फायरिंग का दावा किए गए वाहन का तकनीकी मुआयना नहीं हुआ। उसे माल मुकदमाती भी नहीं बनाया गया। प्रथम विवेचक सोनू कुमार ने अहम साक्ष्य कब्जे में नहीं लिया। बाद के विवेचकों अनुज कुमार, जौहर सिंह, अशोक कुमार और यशपाल सिंह ने भी गलतियां सुधारने का प्रयास नहीं किया। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए पांचों उपनिरीक्षकों पर कार्रवाई की अनुशंसा की। तीनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा से रिहा करने का आदेश दिया गया। उमेश तिहाड़ जेल, योगेश मंडोली जेल और जुगला गौतमबुद्धनगर जिला कारागार से वीसी के जरिये पेश हुए।
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