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Noida News: चेक बाउंस मामले में महिला की पुनरीक्षण याचिका खारिज
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(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में परिवादिनी सरोज शर्मा की पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। विशेष न्यायालय ने 18 मार्च 2026 को सरोज शर्मा को परिवादी को अंतरिम मुआवजे के रूप में चेक राशि का 20 प्रतिशत भुगतान करने का आदेश दिया था। इ
आरोपी के अधिवक्ता ने सत्र अदालत ने कहा कि निचली अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों की उचित जांच किए बिना यह आदेश पारित किया है। परिवादिनी के पुत्र दिनेश कुमार ने वर्ष 2021 से 2022 के बीच विभिन्न तिथियों पर प्रत्यर्थी के पुत्र के खाते में कुल 2.68 लाख रुपये स्थानांतरित किए थे, जो कथित चेक से संबंधित लेन-देन का हिस्सा थे। बचाव पक्ष का कहना था कि प्रत्यर्थी ने अपने परिवाद में यह तथ्य जानबूझकर छिपाया और निचली अदालत ने खाता विवरण और दाखिल आपत्ति पर विचार नहीं किया। चेक राशि का आंशिक भुगतान हो जाने पर कार्यवाही स्वतः निरर्थक हो जाती है।
वहीं प्रत्यर्थी पक्ष की ओर से कोई लिखित आपत्ति दाखिल नहीं की गई, लेकिन बहस के दौरान अभियोजन ने पुनरीक्षण याचिका को निरस्त करने की मांग करते हुए कहा कि इसमें कोई कानूनी आधार नहीं है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि निचली अदालत ने अपने आदेश में परिवादी द्वारा प्रस्तुत सभी साक्ष्यों पर विस्तार से विचार किया था। आरोपी ने अपने बयान में स्वयं स्वीकार किया था कि उसने परिवादी को चेक दिया था। आदेश में कोई तथ्यात्मक या विधिक त्रुटि नहीं होती, इसलिए हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। निचली अदालत के 18 मार्च 2026 के आदेश की को बरकरार रखा।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में परिवादिनी सरोज शर्मा की पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। विशेष न्यायालय ने 18 मार्च 2026 को सरोज शर्मा को परिवादी को अंतरिम मुआवजे के रूप में चेक राशि का 20 प्रतिशत भुगतान करने का आदेश दिया था। इ
आरोपी के अधिवक्ता ने सत्र अदालत ने कहा कि निचली अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों की उचित जांच किए बिना यह आदेश पारित किया है। परिवादिनी के पुत्र दिनेश कुमार ने वर्ष 2021 से 2022 के बीच विभिन्न तिथियों पर प्रत्यर्थी के पुत्र के खाते में कुल 2.68 लाख रुपये स्थानांतरित किए थे, जो कथित चेक से संबंधित लेन-देन का हिस्सा थे। बचाव पक्ष का कहना था कि प्रत्यर्थी ने अपने परिवाद में यह तथ्य जानबूझकर छिपाया और निचली अदालत ने खाता विवरण और दाखिल आपत्ति पर विचार नहीं किया। चेक राशि का आंशिक भुगतान हो जाने पर कार्यवाही स्वतः निरर्थक हो जाती है।
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वहीं प्रत्यर्थी पक्ष की ओर से कोई लिखित आपत्ति दाखिल नहीं की गई, लेकिन बहस के दौरान अभियोजन ने पुनरीक्षण याचिका को निरस्त करने की मांग करते हुए कहा कि इसमें कोई कानूनी आधार नहीं है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि निचली अदालत ने अपने आदेश में परिवादी द्वारा प्रस्तुत सभी साक्ष्यों पर विस्तार से विचार किया था। आरोपी ने अपने बयान में स्वयं स्वीकार किया था कि उसने परिवादी को चेक दिया था। आदेश में कोई तथ्यात्मक या विधिक त्रुटि नहीं होती, इसलिए हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। निचली अदालत के 18 मार्च 2026 के आदेश की को बरकरार रखा।
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