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Noida News: मकान से बेदखली का आदेश रद्द, बिना हस्ताक्षर राहत देने पर उठाए सवाल
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(अदालत से)
-किराया अधिकरण ने पलटा किराया प्राधिकारी का फैसला-बिना हस्ताक्षर और मांगे बिना राहत देने पर उठाए सवाल
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा। किराया अधिकरण (अपर जनपद न्यायाधीश, त्वरित न्यायालय) ने नोएडा के सेक्टर-45 स्थित एक मकान से किरायेदार कंपनी की बेदखली का आदेश रद कर दिया है। अधिकरण ने किराया प्राधिकारी के 26 सितंबर 2025 के फैसले को विधि के विपरीत मानते हुए निरस्त किया। यह फैसला बिना हस्ताक्षर और बिना मांगे राहत देने पर गंभीर सवाल उठाता है। नोएडा निवासी रजनी शर्मा ने मकान खाली कराने के लिए किराया प्राधिकारी के समक्ष वाद दायर किया था। उनका मकान 20 अक्तूबर 2022 से 20 अप्रैल 2025 तक 30 माह के लिए 17,500 रुपये मासिक किराये पर दिया गया था। अवधि समाप्त होने के बाद भी मकान खाली नहीं हुआ। प्राधिकारी ने 26 सितंबर 2025 को वाद स्वीकार कर एक माह में कब्जा और बकाया राशि देने का निर्देश दिया। उन्होंने जनवरी 2025 के बाद पहले दो माह के लिए दोगुना 35 रुपये और उसके बाद चार गुना 70 रुपये मासिक किराया देने का भी आदेश दिया। कंपनी ने यूपी नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम के तहत अपील की। कंपनी ने आदेश को अहस्ताक्षरित, एकतरफा सुनवाई वाला और अपर्याप्त नोटिस वाला बताया।
अधिकरण ने कहा कि वादिनी ने बकाया किराया मांगा ही नहीं था और न उस पर न्यायशुल्क दिया। फिर भी प्राधिकारी ने दोगुना और चार गुना किराया दिला दिया। प्रतिवादी की आपत्ति के बावजूद प्राधिकारी ने इस पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया। अधिकांश आदेश पत्रों पर पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं थे और निर्णय में उनका नाम भी अंकित नहीं था। अधिकरण ने इसे न्यायिक मस्तिष्क का प्रयोग न होने का संकेत मानते हुए स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया। वादिनी नए आधारों पर फिर वाद दायर कर सकेंगी। जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर से स्थिति सुधारने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की अपेक्षा की गई है।
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-किराया अधिकरण ने पलटा किराया प्राधिकारी का फैसला-बिना हस्ताक्षर और मांगे बिना राहत देने पर उठाए सवाल
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा। किराया अधिकरण (अपर जनपद न्यायाधीश, त्वरित न्यायालय) ने नोएडा के सेक्टर-45 स्थित एक मकान से किरायेदार कंपनी की बेदखली का आदेश रद कर दिया है। अधिकरण ने किराया प्राधिकारी के 26 सितंबर 2025 के फैसले को विधि के विपरीत मानते हुए निरस्त किया। यह फैसला बिना हस्ताक्षर और बिना मांगे राहत देने पर गंभीर सवाल उठाता है। नोएडा निवासी रजनी शर्मा ने मकान खाली कराने के लिए किराया प्राधिकारी के समक्ष वाद दायर किया था। उनका मकान 20 अक्तूबर 2022 से 20 अप्रैल 2025 तक 30 माह के लिए 17,500 रुपये मासिक किराये पर दिया गया था। अवधि समाप्त होने के बाद भी मकान खाली नहीं हुआ। प्राधिकारी ने 26 सितंबर 2025 को वाद स्वीकार कर एक माह में कब्जा और बकाया राशि देने का निर्देश दिया। उन्होंने जनवरी 2025 के बाद पहले दो माह के लिए दोगुना 35 रुपये और उसके बाद चार गुना 70 रुपये मासिक किराया देने का भी आदेश दिया। कंपनी ने यूपी नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम के तहत अपील की। कंपनी ने आदेश को अहस्ताक्षरित, एकतरफा सुनवाई वाला और अपर्याप्त नोटिस वाला बताया।
अधिकरण ने कहा कि वादिनी ने बकाया किराया मांगा ही नहीं था और न उस पर न्यायशुल्क दिया। फिर भी प्राधिकारी ने दोगुना और चार गुना किराया दिला दिया। प्रतिवादी की आपत्ति के बावजूद प्राधिकारी ने इस पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया। अधिकांश आदेश पत्रों पर पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं थे और निर्णय में उनका नाम भी अंकित नहीं था। अधिकरण ने इसे न्यायिक मस्तिष्क का प्रयोग न होने का संकेत मानते हुए स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया। वादिनी नए आधारों पर फिर वाद दायर कर सकेंगी। जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर से स्थिति सुधारने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की अपेक्षा की गई है।
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