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निजी अस्पतालों को इलाज की मंजूरी देकर फंसा महकमा
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नोएडा। कोरोना की दूसरी लहर में निजी अस्पतालों में न बेड मिले थे और न ही ऑक्सीजन। इलाज पर लाखों खर्च करने के बाद भी कोरोना का कहर 377 जिंदगियों पर भारी पड़ा था। निजी अस्पतालों की खुली मनमानी की शिकायतों की जांच आज भी जारी है। अब तीसरी लहर में मरीज बढ़े तो निजी अस्पतालों को कोरोना के इलाज की मंजूरी दी गई, लेकिन इसके साथ ही जिले में मौतों का सिलसिला फिर शुरू हो गया। ऐसे में लगातार दम तोड़ते मरीजों की सूचना पाकर शासन ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जवाब भी तलब कर लिया।
एक जनवरी से शुरू महामारी की तीसरी लहर में अब तक 17 लोग जान गंवा चुके हैं। इनमें करीब 13 मौतें निजी अस्पतालों में हुई हैं। नौ दिनों से मौतों का सिलसिला जारी है। बुधवार को भी जिला स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना से एक मौत की पुष्टि की है। कोरोना की तीसरी लहर का पीक 4 जनवरी से शुरू हो गया था। 15 जनवरी तक जनपद में 12 हजार से ज्यादा मरीज सक्रिय हो चुके थे। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने उपचार के लिए जिले के 31 अस्पतालों में 4585 बेड चिह्नित किए थे, लेकिन सेक्टर-39 के कोविड अस्पताल के अलावा किसी अस्पताल को कोरोना के मरीज भर्ती करने की अनुमति नहीं थी।
इस बार 99 फीसदी संक्रमित मरीजों का होम आइसोलेशन में ही उपचार चला। अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या एक फीसदी रही। जनपद में 13 जनवरी तक कोरोना से सिर्फ एक मौत हुई थी, लेकिन निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों का प्रवेश शुरू होते ही मरीज दम तोड़ने लगे। नौ दिनों में ही 14 लोगों की मौत हो चुकी है।
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आखिर जिसका डर था वही हुआ
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दूसरी लहर में निजी अस्पतालों की शिकायतों की फेहरिस्त लंबी थी, इसेे देखते हुए तीसरी लहर में नियंत्रित हालात देखते हुए ज्यादा अस्पतालों को इलाज की अनुमति नहीं दी गई। इस बार सेक्टर-39 के 240 बेड की क्षमता वाले अस्पताल के 50 बेड भी नहीं भर सके, लेकिन तीसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार इतनी तेज थी कि 10 से अधिक अस्पतालों को इलाज के लिए नोटिफाइड करना पड़ा।
पहले से बीमार पर ही कोरोना का वार
डिप्टी सर्विलांस ऑफिसर डॉ. मनोज कुशवाहा का कहना है कि जनवरी से अब तक कोरोना से जितनी मौतें हुई हैं, उनमें सभी पहले से गंभीर बीमारियों से पीड़ित शामिल हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इस बार पूरी एहतियात बरते गए हैं। पूरे देश और प्रदेश में मौतें बढ़ीं तो जनपद में भी इसका असर देखा गया। अब लगातार सक्रिय मरीजों की संख्या कम हो रही है।
बुजुर्ग महिला की मौत, 295 नए मामले
जिला स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को 84 वर्षीय महिला की मौत की पुष्टि की है। हाइपरटेंशन, रक्तचाप और मधुमेह से पीड़ित महिला का उपचार कई दिन से यथार्थ अस्पताल में चल रहा था। वहीं, मंगलवार को 3105 संदिग्धों की जांच में 295 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई जबकि 686 मरीज स्वस्थ हो गए। जिले में सक्रिय मरीजों की संख्या घटकर 2284 रह गई है। अब तक 485 संक्रमितों की मौत हो चुकी है।
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एक जनवरी से शुरू महामारी की तीसरी लहर में अब तक 17 लोग जान गंवा चुके हैं। इनमें करीब 13 मौतें निजी अस्पतालों में हुई हैं। नौ दिनों से मौतों का सिलसिला जारी है। बुधवार को भी जिला स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना से एक मौत की पुष्टि की है। कोरोना की तीसरी लहर का पीक 4 जनवरी से शुरू हो गया था। 15 जनवरी तक जनपद में 12 हजार से ज्यादा मरीज सक्रिय हो चुके थे। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने उपचार के लिए जिले के 31 अस्पतालों में 4585 बेड चिह्नित किए थे, लेकिन सेक्टर-39 के कोविड अस्पताल के अलावा किसी अस्पताल को कोरोना के मरीज भर्ती करने की अनुमति नहीं थी।
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इस बार 99 फीसदी संक्रमित मरीजों का होम आइसोलेशन में ही उपचार चला। अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या एक फीसदी रही। जनपद में 13 जनवरी तक कोरोना से सिर्फ एक मौत हुई थी, लेकिन निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों का प्रवेश शुरू होते ही मरीज दम तोड़ने लगे। नौ दिनों में ही 14 लोगों की मौत हो चुकी है।
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आखिर जिसका डर था वही हुआ
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दूसरी लहर में निजी अस्पतालों की शिकायतों की फेहरिस्त लंबी थी, इसेे देखते हुए तीसरी लहर में नियंत्रित हालात देखते हुए ज्यादा अस्पतालों को इलाज की अनुमति नहीं दी गई। इस बार सेक्टर-39 के 240 बेड की क्षमता वाले अस्पताल के 50 बेड भी नहीं भर सके, लेकिन तीसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार इतनी तेज थी कि 10 से अधिक अस्पतालों को इलाज के लिए नोटिफाइड करना पड़ा।
पहले से बीमार पर ही कोरोना का वार
डिप्टी सर्विलांस ऑफिसर डॉ. मनोज कुशवाहा का कहना है कि जनवरी से अब तक कोरोना से जितनी मौतें हुई हैं, उनमें सभी पहले से गंभीर बीमारियों से पीड़ित शामिल हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इस बार पूरी एहतियात बरते गए हैं। पूरे देश और प्रदेश में मौतें बढ़ीं तो जनपद में भी इसका असर देखा गया। अब लगातार सक्रिय मरीजों की संख्या कम हो रही है।
बुजुर्ग महिला की मौत, 295 नए मामले
जिला स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को 84 वर्षीय महिला की मौत की पुष्टि की है। हाइपरटेंशन, रक्तचाप और मधुमेह से पीड़ित महिला का उपचार कई दिन से यथार्थ अस्पताल में चल रहा था। वहीं, मंगलवार को 3105 संदिग्धों की जांच में 295 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई जबकि 686 मरीज स्वस्थ हो गए। जिले में सक्रिय मरीजों की संख्या घटकर 2284 रह गई है। अब तक 485 संक्रमितों की मौत हो चुकी है।