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खतरनाक रूप ले रहा डेंगू, 24 घंटे में 21 नए मरीज मिले
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नोएडा। जिले में डेंगू का डंक अब खतरनाक रूप लेने लगा है। 24 घंटे में डेंगू के 21 नए मरीजों की पुष्टि हुई है। जिले में मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 425 पहुंच गया है। अक्तूबर में मच्छरों से फैलने वाली इस बीमारी ने भयावह रूप धारण किया है। इस माह डेंगू के 376 मामले सामने आए हैं। इतने ही मामले निजी अस्पतालों के मानें जाएं तो लगभग हर घंटे जिले में डेंगू का एक नया मरीज अस्पताल पहुंचा है। पिछले साल सितंबर और अक्तूबर में मरीजों का आंकड़ा 20 से कम था, लेकिन इस साल इन दो महीनों में संख्या 400 के पार पहुंच गई है।
इस साल डेंगू से संदिग्ध मौतों का आंकड़ा दस से ज्यादा हो गया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अब तक केवल एक मौत की पुष्टि की है। डेंगू से बिगड़े हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रक्त में प्लेटलेट्स की कमी के कारण तमाम मरीज मल्टीपल आर्गन फेल्योर, हेमरेजिक फीवर की स्थिति में पहुंच रहे हैं। इस तरह के अधिकांश मामले निजी अस्पतालों में देखे जा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में डेंगू के गंभीर मरीजों के उपचार की पुख्ता व्यवस्था नहीं हैं। इन अस्पतालों से मरीजों को हायर सेंटर के लिए रेफर किया जा रहा है।
दो महीने में सिर्फ 40 परिसरों में मिला लार्वा
कोरोना की संभावित तीसरी लहर के खतरे के बीच इस साल डेंगू का स्वरूप बेहद डराने वाला है। स्वास्थ्य विभाग ने इससे निपटने के लिए पुख्ता तैयारियों का दावा किया था, लेकिन लगातार बढ़ रहे मामले विभाग के दावों की पोल खोल रहे हैं। दो महीने में सिर्फ 40 परिसरों में ही मलेरिया विभाग मच्छरों का लार्वा तलाश सका है। इन परिसरों को नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं।
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साधारण डेंगू के लक्षण : तेज बुखार, सिर दर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द, भूख न लगना, शरीर पर चकत्ते, जी मिचलाना, प्लेटलेट्स की कमी।
हेमरेजिक डेंगू के लक्षण : नाक, मुंह व मसूढ़ों से रक्त आना, खून में प्लेटलेट्स की भारी कमी होना, शरीर पर चकत्तों के साथ घाव जैसा दिखना, गला सूखना, शरीर में तेज दर्द, सांस लेने में तकलीफ।
शॉक सिंड्रोम के लक्षण : रक्तचाप कम होना, शरीर का ठंडा पड़ना, बेचैनी महसूस होना, पेट में देज दर्द होना, नब्ज तेज चलना आदि।
गांव के बाद शहर की ओर बढ़ा डेंगू, अस्पताल फुल
वायरल के साथ मलेरिया व डेंगू के संभावित मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में बेकाबू हो चुके डेंगू ने अब शहरी क्षेत्र में भी असर दिखाना शुरू कर दिया है। कई सेक्टरों के लोग विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। इससे अस्पतालों में बेडों की किल्लत होने लगी है। अस्पतालों में भर्ती करीब 50 प्रतिशत से अधिक डेंगू के संदिग्ध मरीज हैं। जेवर के थोरा व दनकौर के नवादा गांव में डेंगू का सबसे अधिक प्रकोप रहा। यहां कई लोगों की मौतें भी हुई हैं। ग्रामीणों ने ग्रेनो प्राधिकरण, जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के समक्ष नाराजगी जताकर फॉगिंग व स्वास्थ्य जांच की मांग उठाई। वहीं, अब शहरी क्षेत्र के अस्पतालों में भी मरीजों का दबाव बढ़ रहा है। जिम्स के निदेशक ब्रिगेडियर डॉक्टर राकेश गुप्ता ने बताया कि रोज औसतन 50 मरीज आ रहे हैं। करीब 300 मरीज भर्ती हैं। कैलाश अस्पताल के डॉक्टर राज शर्मा ने बताया कि 225 मरीज भर्ती हैं। इनमें 50 प्रतिशत डेंगू संभावित हैं। शारदा अस्पताल के निदेशक जनसंपर्क अजीत कुमार ने बताया कि मरीजों का दबाव है। 100 बेड बढ़ाए जा रहे हैं।
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इस साल डेंगू से संदिग्ध मौतों का आंकड़ा दस से ज्यादा हो गया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अब तक केवल एक मौत की पुष्टि की है। डेंगू से बिगड़े हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रक्त में प्लेटलेट्स की कमी के कारण तमाम मरीज मल्टीपल आर्गन फेल्योर, हेमरेजिक फीवर की स्थिति में पहुंच रहे हैं। इस तरह के अधिकांश मामले निजी अस्पतालों में देखे जा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में डेंगू के गंभीर मरीजों के उपचार की पुख्ता व्यवस्था नहीं हैं। इन अस्पतालों से मरीजों को हायर सेंटर के लिए रेफर किया जा रहा है।
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दो महीने में सिर्फ 40 परिसरों में मिला लार्वा
कोरोना की संभावित तीसरी लहर के खतरे के बीच इस साल डेंगू का स्वरूप बेहद डराने वाला है। स्वास्थ्य विभाग ने इससे निपटने के लिए पुख्ता तैयारियों का दावा किया था, लेकिन लगातार बढ़ रहे मामले विभाग के दावों की पोल खोल रहे हैं। दो महीने में सिर्फ 40 परिसरों में ही मलेरिया विभाग मच्छरों का लार्वा तलाश सका है। इन परिसरों को नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं।
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साधारण डेंगू के लक्षण : तेज बुखार, सिर दर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द, भूख न लगना, शरीर पर चकत्ते, जी मिचलाना, प्लेटलेट्स की कमी।
हेमरेजिक डेंगू के लक्षण : नाक, मुंह व मसूढ़ों से रक्त आना, खून में प्लेटलेट्स की भारी कमी होना, शरीर पर चकत्तों के साथ घाव जैसा दिखना, गला सूखना, शरीर में तेज दर्द, सांस लेने में तकलीफ।
शॉक सिंड्रोम के लक्षण : रक्तचाप कम होना, शरीर का ठंडा पड़ना, बेचैनी महसूस होना, पेट में देज दर्द होना, नब्ज तेज चलना आदि।
गांव के बाद शहर की ओर बढ़ा डेंगू, अस्पताल फुल
वायरल के साथ मलेरिया व डेंगू के संभावित मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में बेकाबू हो चुके डेंगू ने अब शहरी क्षेत्र में भी असर दिखाना शुरू कर दिया है। कई सेक्टरों के लोग विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। इससे अस्पतालों में बेडों की किल्लत होने लगी है। अस्पतालों में भर्ती करीब 50 प्रतिशत से अधिक डेंगू के संदिग्ध मरीज हैं। जेवर के थोरा व दनकौर के नवादा गांव में डेंगू का सबसे अधिक प्रकोप रहा। यहां कई लोगों की मौतें भी हुई हैं। ग्रामीणों ने ग्रेनो प्राधिकरण, जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के समक्ष नाराजगी जताकर फॉगिंग व स्वास्थ्य जांच की मांग उठाई। वहीं, अब शहरी क्षेत्र के अस्पतालों में भी मरीजों का दबाव बढ़ रहा है। जिम्स के निदेशक ब्रिगेडियर डॉक्टर राकेश गुप्ता ने बताया कि रोज औसतन 50 मरीज आ रहे हैं। करीब 300 मरीज भर्ती हैं। कैलाश अस्पताल के डॉक्टर राज शर्मा ने बताया कि 225 मरीज भर्ती हैं। इनमें 50 प्रतिशत डेंगू संभावित हैं। शारदा अस्पताल के निदेशक जनसंपर्क अजीत कुमार ने बताया कि मरीजों का दबाव है। 100 बेड बढ़ाए जा रहे हैं।