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दिल्ली दंगा : विभाजन के बाद सबसे खतरनाक सांप्रदायिक दंगा

Fri, 23 Oct 2020 12:42 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 23 Oct 2020 12:42 AM IST
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Delhi riot: most dangerous communal riot after partition
नई दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुए दंगे विभाजन के बाद राजधानी में सबसे खतरनाक सांप्रदायिक दंगे थे। यह दंगा विश्व शक्ति बनने की राह पर अग्रसर एक राष्ट्र की आत्मा पर कभी न भरने वाला घाव है। अदालत ने बृहस्पतिवार को तीन मामलों में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए यह तल्ख टिप्पणी की।
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कड़कड़डूमा अदालत ने कहा कि 24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कुछ इलाकों में हुए दंगों ने विभाजन के समय की याद दिला दी। इन दंगों ने देखते ही देखते कई इलाकों और मासूम जिंदगियों को अपनी चपेट में ले लिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने ताहिर हुसैन की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि बेशक आरोपी पर हिंसा में शामिल होने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है, लेकिन उस दौरान उसके घर की छत को दंगाइयों ने अपना अड्डा बना लिया था। वहां से दूसरे समुदाय के लोगों पर हमला किया गया। इन तथ्यों के मद्देनजर वह अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।
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आग से खेलने पर हवाओं को नहीं दे सकते दोष...
अदालत ने कहा कि इतने कम समय में व्यापक स्तर पर हिंसा बिना पूर्व नियोजित साजिश के संभव नहीं है। इस मौके पर वह कहावत याद आती है कि आप आग से खेलते हैं तो चिंगारी भड़कने का दोष हवाओं को नहीं दे सकते। इन हालात में आरोपी यह कहकर नहीं बच सकता है कि उसने खुद हिंसा नहीं की, इसलिए दंगों में उसकी कोई भूमिका नहीं है। यह साफ है कि आरोपी ने अपने बाहुबल और सियासी ताकत का इस्तेमाल दंगा भड़काने के लिए किया। एजेंसी
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