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पुलिस दाखिल नहीं कर पाई आरोपपत्र हाईकोर्ट ने यूएपीए के आरोपी को दी जमानत
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने दंगों से जुड़े अवैध गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) मामले में आरोपपत्र दाखिल न होने पर आरोपी को जमानत दे दी। दिल्ली पुलिस ने राजकुमार उर्फ लवप्रीत को आतंक रोधी कानून यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया था लेकिन निर्धारित अवधि में जांच पूरी नहीं कर पाई। इसके मद्देनजर अदालत ने आरोपी को जमानत प्रदान कर दी।
न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने राजकुमार को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके तथा इतनी राशि के दो जमानती पेश करने की शर्त पर जमानत प्रदान की है। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि निर्धारित अवधि के बाद अतिरिक्त समय मिलने के बाद भी पुलिस आरोपपत्र दाखिल नहीं कर पाई। उपरोक्त तथ्यों तथा कानूनी स्थिति के अनुसार कोर्ट मानती है कि आरोपी को 11 नवंबर 2020 को जमानत मिल जानी चाहिए थी।
कोर्ट के समक्ष आरोपी के वकील राजीव मोहन व अन्य ने कहा कि शुरुआती 90 दिन तथा उसके बाद दी गई अतिरिक्त अवधि 11 नवंबर 2020 को समाप्त हो गई थी लेकिन इसके बाद भी आज तक आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया है। इसके बावजूद निचली अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका 17 नवंबर को खारिज कर दी थी जबकि वह जमानत पाने का अधिकारी था।
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बचाव पक्ष ने ये भी कहा कि दिल्ली पुलिस ने तथ्यों को छिपाकर जांच अवधि बढ़वाई थी। कानून की नजर में उक्त आदेश सही नहीं था और इसलिए पुलिस को आरोपपत्र दाखिल करना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया। इसके मद्देनजर आरोपी को जमानत पाने का अधिकार मिल जाता है।
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने 16 जून 2020 को दर्ज मामले में आरोपी को 18 जून 2020 को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उससे तीन दिन पूछताछ की थी। उसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में मंडोली जेल भेज दिया गया था। ------ एजेंसी
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न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने राजकुमार को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके तथा इतनी राशि के दो जमानती पेश करने की शर्त पर जमानत प्रदान की है। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि निर्धारित अवधि के बाद अतिरिक्त समय मिलने के बाद भी पुलिस आरोपपत्र दाखिल नहीं कर पाई। उपरोक्त तथ्यों तथा कानूनी स्थिति के अनुसार कोर्ट मानती है कि आरोपी को 11 नवंबर 2020 को जमानत मिल जानी चाहिए थी।
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कोर्ट के समक्ष आरोपी के वकील राजीव मोहन व अन्य ने कहा कि शुरुआती 90 दिन तथा उसके बाद दी गई अतिरिक्त अवधि 11 नवंबर 2020 को समाप्त हो गई थी लेकिन इसके बाद भी आज तक आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया है। इसके बावजूद निचली अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका 17 नवंबर को खारिज कर दी थी जबकि वह जमानत पाने का अधिकारी था।
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बचाव पक्ष ने ये भी कहा कि दिल्ली पुलिस ने तथ्यों को छिपाकर जांच अवधि बढ़वाई थी। कानून की नजर में उक्त आदेश सही नहीं था और इसलिए पुलिस को आरोपपत्र दाखिल करना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया। इसके मद्देनजर आरोपी को जमानत पाने का अधिकार मिल जाता है।
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने 16 जून 2020 को दर्ज मामले में आरोपी को 18 जून 2020 को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उससे तीन दिन पूछताछ की थी। उसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में मंडोली जेल भेज दिया गया था। ------ एजेंसी