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Noida News: दुधारू पशुओं की संख्या में आई कमी, दूध उत्पादन पर पड़ेगा असर

Thu, 03 Sep 2026 06:04 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2026 06:04 PM IST
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Decline in the number of milch animals to impact milk production
20वीं गणना के मुकाबले 87,291 पशु कम हुए, भैंसों की संख्या में 73,797 की कमी
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चारे की बढ़ती लागत व जमीन अधिग्रहण प्रमुख कारण

राजेश भाटी
ग्रेटर नोएडा। जिले में 21वीं पशुगणना में पशुओं की संख्या में भारी कमी दर्ज की गई है। दुधारू पशुओं की घटती संख्या से आने वाले समय में दूध उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है, जिससे जिले को बाहरी क्षेत्रों पर निर्भरता बढ़ानी पड़ सकती है।
गौतमबुद्धनगर के जेवर, दनकौर, दादरी व बिसरख ब्लॉक दूध उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। इन्हीं इलाकों से दिल्ली के बड़े हिस्से में आपूर्ति होती है, जिसके लिए दनकौर स्टेशन से शटल रेलगाड़ी भी चलती है, जो सवेरे और दोपहर बाद दिल्ली दूध लेकर जाती है।
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जिला पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 20वीं गणना में कुल 3,35,909 पशु दर्ज थे, जो 21वीं गणना में घटकर 2,48,618 रह गए। भैंसों की संख्या 2,38,761 से घटकर 1,64,964 हो गई। जबकि गोवंश 72,219 से घटकर 64,174 रह गए।
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पशुपालन में गिरावट का मुख्य कारण जमीनों का अधिग्रहण, चारे की बढ़ती लागत और औद्योगिक व आवासीय विकास को माना जा रहा है। बिसरख, दादरी व दनकौर में नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण के विकास के चलते आवासीय सेक्टरों में पशुपालन पर प्रतिबंध व कृषि भूमि के अधिग्रहण से पशुपालकों के सामने जगह व चारे की समस्या बढ़ी है।


लागत अधिक, मुनाफा कम
जेवर के पशुपालक सुनील प्रधान बताते हैं कि एक भैंस के चारे पर प्रतिदिन करीब 250 से 300 रुपये तक खर्च हो जाता है। इसके मुकाबले दूध की कीमत करीब 60 से 70 रुपये प्रति लीटर है। चारा, पशु चिकित्सा और देखभाल का खर्च निकालने के बाद मुनाफा काफी कम रह जाता है। इस कारण अब लोग पशुपालन को पहले की तरह लाभकारी व्यवसाय नहीं मान रहे हैं।

कोट-


दुधारू पशुओं की संख्या में कमी आने से आने वाले समय में जिले के दूध उत्पादन पर असर पड़ सकता है। विभाग की ओर से पशुपालकों को अनुदान देने और उन्नत नस्ल के पशुओं को पालने के लिए प्रोत्साहित करने की योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
अरुण कुमार सचान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी गौतमबुद्धनगर
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