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तीन बुजुर्ग कैदियों में एनएचएम ने जगाई रिहाई की आस

Tue, 25 Sep 2018 05:48 AM IST
Updated Tue, 25 Sep 2018 05:48 AM IST
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तीन बुजुर्ग कैदियों में एनएचएम ने जगाई रिहाई की आस
बुलंदशहर और मथुरा के लिए भी उपयोगी
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तीन बुजुर्ग कैदियों में जगी रिहाई की आस
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने प्रदेश सरकार से कार्रवाई के लिए कहा
- लुकसर जेल में 105 वर्षीय और दिव्यांग भी हैं बंद
जेपी शर्मा
ग्रेटर नोएडा। लुकसर स्थित जिला कारागार में तीन कैदियों में रिहाई की आस जगी है। इनमें एक की उम्र 105 साल है। दूसरा दिव्यांग है। तीसरा भी बुजुर्ग है। तीनों की रिहाई से संबंधित प्रार्थना पत्र पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश शासन को 14 अक्तूबर तक आवश्यक कार्रवाई के लिए लिखा है।
हत्या के मामले में जेल से जमानत पर छूटे चंद्रमोहन शर्मा ने मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखा था। लुकसर जेल में लगभग 20 बुजुर्ग बंदी व कैदी हैं। चंद्रमोहन ने जेल में रहने के दौरान सजा काट रहे तीन बुजुर्ग बंदियों की दुर्दशा का जिक्र करते हुए उनकी रिहाई कराने की मांग की थी। उनका कहना है कि कानून में उम्रदराज बंदियों की रिहाई का प्रावधान है, लेकिन गंभीर हालत में होने के बावजूद इन बंदियों की रिहाई का प्रयास नहीं किया गया है। जानकारी के अभाव में बंदी शासन से रिहाई की मांग नहीं कर पाते।
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लाचार हैं बुजुर्ग कैदी
चंद्रमोहन ने पत्र में लिखा है कि मूल रूप से बुलंदशहर निवासी चतर सिंह (105) मथुरा के अपहरण व हत्या के केस में वर्ष 2006 से जेल में सजा काट रहा है। वह 2006 से जेल में बंद है और मथुरा जेल से स्थानांतरित होकर आया है। वह इतना बुजुर्ग हो चुका है कि उसे दिखाई भी नहीं देता और न ही वह ठीक से चल पाता है। वहीं, घोड़ी बछेड़ा निवासी भंवर सिंह (85) हत्या के केस में बंद है। वह बीमार रहता है। गांव चौड़ा गौतमबुद्ध नगर निवासी खेमचंद (70) का एक पैर बीमारी के चलते कट चुका है। उसे आंखों से भी कम दिखता है।
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शासनादेश के बाद ही किसी कैदी की रिहाई संभव है। अभी इस संबंध में कोई शासनादेश नहीं मिला है।
- विपिन मिश्रा, जेल अधीक्षक, जिला कारागार
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