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Noida News: प्रदूषण फैलाने पर क्रेसेंट होम्स पर लगा 10 लाख का जुर्माना
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- सेक्टर-134 स्थित निर्माणाधीन परियोजना में खुले में मिला बिल्डिंग मैटेरियल, ग्रीन नेट और टायर वाशिंग सिस्टम भी नहीं मिला
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। ग्रेप लागू होने के बावजूद निर्माण कार्यों में नियमों की अनदेखी जारी है। सेक्टर-134 स्थित जेपी ग्रीन्स विश्टाउन की निर्माणाधीन क्रेसेंट होम्स परियोजना में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निरीक्षण के दौरान कई खामियां मिली। इसके बाद बोर्ड ने परियोजना के खिलाफ 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एई किशन सिंह ने बताया कि क्षेत्रीय अधिकारी रितेश तिवारी के नेतृत्व वाली टीम ने 28 अक्तूबर को परियोजना का निरीक्षण किया था। सोशल मीडिया पर मिली शिकायत मिली थी। जिसके बाद हुए निरीक्षण के दौरान मिट्टी और बिल्डिंग मैटेरियल परिसर के अंदर और बाहर खुले में रखा मिला। परियोजना के चारों तरफ मानकों के अनुसार विंड ब्रेकिंग वॉल भी नहीं मिली। निर्माणाधीन इमारत के तलों पर ग्रीन नेट नहीं लगा था, जिससे धूल का उत्सर्जन हो रहा था। इसके अलावा आरएमसी प्लांट के पास खुले में बिल्डिंग मैटेरियल रखा मिला। यहां धूल रोकने के लिए वाटर स्प्रिंकलर की व्यवस्था भी नहीं थी। परियोजना के मुख्य मार्ग पर टायर वाशिंग सिस्टम नहीं मिला। ऐसे में भारी वाहनों के आवागमन से मिट्टी सड़क पर आने और वाहनों के गुजरने से धूल उड़ने की आशंका जताई गई। बोर्ड ने एनजीटी के आदेशों का उल्लंघन करने कर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। ग्रेप लागू होने के बावजूद निर्माण कार्यों में नियमों की अनदेखी जारी है। सेक्टर-134 स्थित जेपी ग्रीन्स विश्टाउन की निर्माणाधीन क्रेसेंट होम्स परियोजना में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निरीक्षण के दौरान कई खामियां मिली। इसके बाद बोर्ड ने परियोजना के खिलाफ 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एई किशन सिंह ने बताया कि क्षेत्रीय अधिकारी रितेश तिवारी के नेतृत्व वाली टीम ने 28 अक्तूबर को परियोजना का निरीक्षण किया था। सोशल मीडिया पर मिली शिकायत मिली थी। जिसके बाद हुए निरीक्षण के दौरान मिट्टी और बिल्डिंग मैटेरियल परिसर के अंदर और बाहर खुले में रखा मिला। परियोजना के चारों तरफ मानकों के अनुसार विंड ब्रेकिंग वॉल भी नहीं मिली। निर्माणाधीन इमारत के तलों पर ग्रीन नेट नहीं लगा था, जिससे धूल का उत्सर्जन हो रहा था। इसके अलावा आरएमसी प्लांट के पास खुले में बिल्डिंग मैटेरियल रखा मिला। यहां धूल रोकने के लिए वाटर स्प्रिंकलर की व्यवस्था भी नहीं थी। परियोजना के मुख्य मार्ग पर टायर वाशिंग सिस्टम नहीं मिला। ऐसे में भारी वाहनों के आवागमन से मिट्टी सड़क पर आने और वाहनों के गुजरने से धूल उड़ने की आशंका जताई गई। बोर्ड ने एनजीटी के आदेशों का उल्लंघन करने कर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।