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Noida News: फर्जी जीपीए से जमीन बेचने के आरोपी को नहीं मिली राहत
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(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। फर्जी जीपीए और दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपये की जमीन बेचने के आरोप में जेल भेजे गए आरोपी राकेश यादव को अदालत से राहत नहीं मिली। अदालत ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर कहा कि विवेचना अभी जारी है और प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ पर्याप्त आरोप मौजूद हैं।
मामला थाना सेक्टर-113 क्षेत्र में दर्ज मुकदमा से जुड़ा है। वादिनी मुन्नी देवी ने आरोप लगाया है कि उनकी गांव हैबतपुर की जमीन पर फर्जी तरीके से कब्जा कर लिया गया और फर्जी जीपीए बनाकर विभिन्न लोगों को प्लॉट बेच दिए गए। उनके नाम से फर्जी बैंक खाता खोला गया और उसी के आधार पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन के बैनामे किए गए। उन्होंने कभी किसी को मुख्तारनामा नहीं दिया और न ही विक्रय से संबंधित कोई रकम उनके खाते में आई। मामले की जानकारी होने पर जब वह अपने भतीजे के साथ जमीन पर पहुंचीं तो आरोपियों ने उनके साथ अभद्रता और जानलेवा हमला करने का प्रयास किया।
बचाव पक्ष ने कहा कि राकेश यादव और उसका भाई सतपाल यादव अनपढ़ और अंगूठा टेक व्यक्ति हैं। जिनका इस्तेमाल कथित रूप से मुन्नी देवी और अजय यादव ने खुद किया। मुन्नी देवी और अजय यादव स्वयं जमीन की प्लाटिंग करवा रहे थे और रजिस्ट्री के दौरान नकद लेन-देन भी वही करते थे। जीपीए भले ही पंजीकृत न हो, लेकिन उसे फर्जी नहीं कहा जा सकता। जिस जमीन को लेकर विवाद बताया जा रहा है, वहां पिछले करीब 10 वर्षों से मकान बने हुए हैं और लोग रह रहे हैं। ऐसे में 10 साल बाद एफआईआर दर्ज कराना आरोपी को फंसाने की साजिश है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आरोपी को जमानत देने से मना कर दिया।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। फर्जी जीपीए और दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपये की जमीन बेचने के आरोप में जेल भेजे गए आरोपी राकेश यादव को अदालत से राहत नहीं मिली। अदालत ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर कहा कि विवेचना अभी जारी है और प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ पर्याप्त आरोप मौजूद हैं।
मामला थाना सेक्टर-113 क्षेत्र में दर्ज मुकदमा से जुड़ा है। वादिनी मुन्नी देवी ने आरोप लगाया है कि उनकी गांव हैबतपुर की जमीन पर फर्जी तरीके से कब्जा कर लिया गया और फर्जी जीपीए बनाकर विभिन्न लोगों को प्लॉट बेच दिए गए। उनके नाम से फर्जी बैंक खाता खोला गया और उसी के आधार पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन के बैनामे किए गए। उन्होंने कभी किसी को मुख्तारनामा नहीं दिया और न ही विक्रय से संबंधित कोई रकम उनके खाते में आई। मामले की जानकारी होने पर जब वह अपने भतीजे के साथ जमीन पर पहुंचीं तो आरोपियों ने उनके साथ अभद्रता और जानलेवा हमला करने का प्रयास किया।
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बचाव पक्ष ने कहा कि राकेश यादव और उसका भाई सतपाल यादव अनपढ़ और अंगूठा टेक व्यक्ति हैं। जिनका इस्तेमाल कथित रूप से मुन्नी देवी और अजय यादव ने खुद किया। मुन्नी देवी और अजय यादव स्वयं जमीन की प्लाटिंग करवा रहे थे और रजिस्ट्री के दौरान नकद लेन-देन भी वही करते थे। जीपीए भले ही पंजीकृत न हो, लेकिन उसे फर्जी नहीं कहा जा सकता। जिस जमीन को लेकर विवाद बताया जा रहा है, वहां पिछले करीब 10 वर्षों से मकान बने हुए हैं और लोग रह रहे हैं। ऐसे में 10 साल बाद एफआईआर दर्ज कराना आरोपी को फंसाने की साजिश है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आरोपी को जमानत देने से मना कर दिया।
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