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Noida News: नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी की जमानत खारिज
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(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) की अदालत ने पॉक्सो के मामले में आरोपी राजेश की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। मामला नाबालिग के साथ दुष्कर्म और अपहरण का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार 16 अप्रैल 2025 को सुबह 9 बजे के आसपास शिकायतकर्ता की 15 वर्षीय बहन बिना किसी को बताए घर से निकल गई थी। शिकायतकर्ता ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। मामले की जांच कर रही सेक्टर 20 कोतवाली पुलिस ने आरोपी राजेश को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा था।
आरोपी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसे गलत तरीके से फंसाया गया है। आरोपी का नाम एफआईआर में नहीं था और उसने कोई अपराध नहीं किया है। वहीं विशेष लोक अभियोजक ने आरोपी की जमानत का विरोध किया और इसे खारिज करने की प्रार्थना की। न्यायाधीश ने केस डायरी का अध्ययन करने के बाद पाया कि पीड़िता की उम्र 14 वर्ष 1 महीने है। अदालत ने कहा कि 15 साल से कम उम्र की नाबालिग लड़की की सहमति को डर या अनुचित दबाव से मुक्त सहमति नहीं कहा जा सकता। मामले की अन्य परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को जमानत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं पाया और आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) की अदालत ने पॉक्सो के मामले में आरोपी राजेश की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। मामला नाबालिग के साथ दुष्कर्म और अपहरण का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार 16 अप्रैल 2025 को सुबह 9 बजे के आसपास शिकायतकर्ता की 15 वर्षीय बहन बिना किसी को बताए घर से निकल गई थी। शिकायतकर्ता ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। मामले की जांच कर रही सेक्टर 20 कोतवाली पुलिस ने आरोपी राजेश को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा था।
आरोपी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसे गलत तरीके से फंसाया गया है। आरोपी का नाम एफआईआर में नहीं था और उसने कोई अपराध नहीं किया है। वहीं विशेष लोक अभियोजक ने आरोपी की जमानत का विरोध किया और इसे खारिज करने की प्रार्थना की। न्यायाधीश ने केस डायरी का अध्ययन करने के बाद पाया कि पीड़िता की उम्र 14 वर्ष 1 महीने है। अदालत ने कहा कि 15 साल से कम उम्र की नाबालिग लड़की की सहमति को डर या अनुचित दबाव से मुक्त सहमति नहीं कहा जा सकता। मामले की अन्य परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को जमानत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं पाया और आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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