{"_id":"5ffdecde8ebc3e2e7117b729","slug":"court-grants-bail-to-two-riots-accused-pausing-doubt-over-statement-of-police-witnesses-noida-news-noi5595392101","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली दंगा: अदालत ने दो आरोपियों को दी जमानत, पुलिसवालों की गवाही पर जताया शक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली दंगा: अदालत ने दो आरोपियों को दी जमानत, पुलिसवालों की गवाही पर जताया शक
विज्ञापन
नई दिल्ली। अदालत ने दिल्ली दंगा मामले में दो पुलिसवालों की गवाही पर शक जाहिर करते हुए दो आरोपियों को जमानत प्रदान की है। इन आरोपियों को गोकुलपुरी इलाके में दंगा के दौरान तोड़फोड़ तथा अन्य धाराओं में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इन आरोपियों की पहचान इन पुलिसकर्मियों ने करीब दो माह बाद की थी।
कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने आरोपी मोहम्मद शोएब तथा शाहरुख को 20-20 हजार के निजी मुचलकों तथा इतनी राशि के जमानती मुचलकों पर जमानत प्रदान की है। अदालत ने जमानत प्रदान करते हुए इस बात पर गौर किया कि अभियोजन याचिका का हवलदार हरी बाबू तथा सिपाही विपिन के सात अप्रैल 2020 के बयानों तथा पहचान के आधार पर विरोध कर रहा था।
अदालत ने पुलिसकर्मियों की गवाही पर सवाल उठाते हुए कहा उनकी गवाही कोई अहमियत नहीं रखती है। बेशक वह उस इलाके में बीट अफसर थे और उन्होंने आरोपियों को 25 फरवरी 2020 को दंगा करते हुए देखा था। इसके बाद भी उन्होंने आरोपियों की पहचान करने और बयान देने में अप्रैल तक समय लगा दिया।
विज्ञापन
अदालत ने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा क्या था जो पुलिसकर्मी होने के बाद भी उन्हें मामले की सूचना अपने थाने और वरिष्ठ अधिकारियों को देने से रोक रहा था। इससे दोनों पुलिसकर्मियों की गवाही पर गहरा शक जाहिर होता है। इसके अलावा पुलिस ने जो सीसीटीवी फुटेज दी है वो 24 फरवरी की है जबकि ये मामला कथित तौर पर उसके अगले दिन का है। अदालत ने अंत में कहा दोनों आरोपियों को मौके से नहीं बल्कि घटना के 55 दिन बाद मंडोली जेल से 15 अप्रैल 2020 को गिरफ्तार किया गया। - एजेंसी
विज्ञापन
कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने आरोपी मोहम्मद शोएब तथा शाहरुख को 20-20 हजार के निजी मुचलकों तथा इतनी राशि के जमानती मुचलकों पर जमानत प्रदान की है। अदालत ने जमानत प्रदान करते हुए इस बात पर गौर किया कि अभियोजन याचिका का हवलदार हरी बाबू तथा सिपाही विपिन के सात अप्रैल 2020 के बयानों तथा पहचान के आधार पर विरोध कर रहा था।
विज्ञापन
अदालत ने पुलिसकर्मियों की गवाही पर सवाल उठाते हुए कहा उनकी गवाही कोई अहमियत नहीं रखती है। बेशक वह उस इलाके में बीट अफसर थे और उन्होंने आरोपियों को 25 फरवरी 2020 को दंगा करते हुए देखा था। इसके बाद भी उन्होंने आरोपियों की पहचान करने और बयान देने में अप्रैल तक समय लगा दिया।
विज्ञापन
अदालत ने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा क्या था जो पुलिसकर्मी होने के बाद भी उन्हें मामले की सूचना अपने थाने और वरिष्ठ अधिकारियों को देने से रोक रहा था। इससे दोनों पुलिसकर्मियों की गवाही पर गहरा शक जाहिर होता है। इसके अलावा पुलिस ने जो सीसीटीवी फुटेज दी है वो 24 फरवरी की है जबकि ये मामला कथित तौर पर उसके अगले दिन का है। अदालत ने अंत में कहा दोनों आरोपियों को मौके से नहीं बल्कि घटना के 55 दिन बाद मंडोली जेल से 15 अप्रैल 2020 को गिरफ्तार किया गया। - एजेंसी