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दो गोल्डन रिट्रीवर कुत्तों लव और कुश को उनके मालिक को सौंपने का निर्देश
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नई दिल्ली। अदालत ने दो गोल्डन रिट्रीवर कुत्तों लव और कुश को उनके व्यवसायी मालिक को सौंपने का निर्देश दिया है। दोनों कुत्तों को मेनका गांधी के एनजीओ- पीपल फॉर एनिमल्स ने पुलिस के साथ मिलकर अपने कब्जे में ले लिया था। एनजीओ ने व्यवसायी पर कुत्तों पर क्रूरता करने का अरोप लगाते हुए ये कार्यवाही की थी। अदालत ने कहा कि पालतू जानवरों को न सौंपना उनके प्रति अन्याय होगा।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल अंतिल ने अपने फैसले में कहा पुलिस की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि व्यवसायी ने दोनों कुत्तों के रहने के लिए अपने फिरोज शाह रोड़ स्थित आवास में 400 वर्ग मीटर में कमरा बनवाया हुआ है। इतना ही नहीं उनकी देखभाल के लिए एक कर्मचारी रखा गया है। इसके अलावा जानवरों के डॉक्टर की रिपोर्ट में भी स्पष्ट है कि कुत्तों केेे समय-समय पर टीकाकरण करवाने के अलावा, चिकित्सा प्रदान की जाती है। उन्होंने कहा डॉक्टर ने इस बात की भी पुष्टी की है कि कुत्तों को परवो वायरस के लिए वैक्सीन भी दी गई है।
अदालत ने कहा कि इन तथ्यों और परिस्थितियों में कुत्तों के मालिक को इन्हें न सौंपना अनुचित होगा। ऐसे में न्यायिक हित में लव और कुश नाम के दो पालतू जानवरों को उन्हें सौंपने का निर्देश देते हैं। अदालत ने उन्हें दोनों के लिए 40-40 हजार रुपये जमानत के रूप में भरने व प्रति माह कुत्तों की चिकित्सा रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है।
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पेश मामले के अनुसार 30 जनवरी को एनजीओ ने व्यवसायी मोहता के निवास पर छापा मार कर कुत्तों को कब्जे में लिया था। एनजीओ का आरोप था कि छापे के दौरान पाया गया कि दोनों को बुखार था और उनकी उचित देखभाल नहीं की जा रही थी। इसके अलावा अस्पताल में चिकित्सा करवाने पर वे परवो वायरस से पीड़ित पाए गए।
वहीं व्यवसायी ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में आरोपों से इनकार करते हुए कुत्तों को उनको सौंपने का आग्रह किया था लेकिन अदालत के मना करने पर उन्होंने सत्र न्यायाधीश के समक्ष अपील की थी।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल अंतिल ने अपने फैसले में कहा पुलिस की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि व्यवसायी ने दोनों कुत्तों के रहने के लिए अपने फिरोज शाह रोड़ स्थित आवास में 400 वर्ग मीटर में कमरा बनवाया हुआ है। इतना ही नहीं उनकी देखभाल के लिए एक कर्मचारी रखा गया है। इसके अलावा जानवरों के डॉक्टर की रिपोर्ट में भी स्पष्ट है कि कुत्तों केेे समय-समय पर टीकाकरण करवाने के अलावा, चिकित्सा प्रदान की जाती है। उन्होंने कहा डॉक्टर ने इस बात की भी पुष्टी की है कि कुत्तों को परवो वायरस के लिए वैक्सीन भी दी गई है।
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अदालत ने कहा कि इन तथ्यों और परिस्थितियों में कुत्तों के मालिक को इन्हें न सौंपना अनुचित होगा। ऐसे में न्यायिक हित में लव और कुश नाम के दो पालतू जानवरों को उन्हें सौंपने का निर्देश देते हैं। अदालत ने उन्हें दोनों के लिए 40-40 हजार रुपये जमानत के रूप में भरने व प्रति माह कुत्तों की चिकित्सा रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है।
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पेश मामले के अनुसार 30 जनवरी को एनजीओ ने व्यवसायी मोहता के निवास पर छापा मार कर कुत्तों को कब्जे में लिया था। एनजीओ का आरोप था कि छापे के दौरान पाया गया कि दोनों को बुखार था और उनकी उचित देखभाल नहीं की जा रही थी। इसके अलावा अस्पताल में चिकित्सा करवाने पर वे परवो वायरस से पीड़ित पाए गए।
वहीं व्यवसायी ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में आरोपों से इनकार करते हुए कुत्तों को उनको सौंपने का आग्रह किया था लेकिन अदालत के मना करने पर उन्होंने सत्र न्यायाधीश के समक्ष अपील की थी।