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अनिश्चितकाल के लिए लटका हरियाणा वक्फ बोर्ड चेयरमैन का चुनाव
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चंडीगढ़। हरियाणा वक्फ बोर्ड चेयरमैन चुनाव के लिए आयोजित होने वाली बैठक अब अनिश्चित काल के लिए टल गई है। उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि चुनाव से जुड़ी इस याचिका पर अदालत में सुनवाई आरंभ होने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। इधर हरियाणा सरकार ने न्यायालय में अंडरटेकिंग दी है कि बिना याचिका पर फैसला आए चुनाव नहीं करवाए जाएंगे।
एडवोकेट मोहम्मद अरशद ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करते हुए बताया था कि हरियाणा वक्फ बोर्ड एक्ट 1995 में बना था जिसे 2013 में संशोधित किया गया। एक्ट में चुनाव और अन्य प्रक्रियाओं के लिए तय प्रावधान है और इन प्रावधानों के अनुरूप ही बोर्ड का संचालन होता है। एक्ट के अनुरूप बोर्ड के सदस्यों को नामित करने की तय प्रक्रिया है। सरकार चाहे तो इन्हें खुद नामित कर सकती है लेकिन इसके लिए उसे लिखित में इसका कारण सौंपना जरूरी है। याची ने कहा था कि नूंह के पूर्व विधायक जाकिर हुसैन को नामित करते हुए सारी प्रक्रियाओं को दर किनार कर दिया गया।
याचिकाकर्ता ने कहा था कि एडवोकेट जनरल ने आश्वासन दिया था कि मुख्य याचिका पर अगली सुनवाई तक चेयरमैन चयन के लिए बैठक आयोजित नहीं की जाएगी। एडवोकेट जनरल की ओर से बताया गया कि बोर्ड के चेयरमैन के चयन की बैठक पर रोक थी न की बोर्ड की बैठक पर। न तो चेयरमैन के चुनाव की बैठक हुई है और ना ही जाकिर हुसैन को बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया गया। यह बोर्ड की एक आम बैठक थी जिसे आयोजित करने के लिए उस बैठक के चेयरमैन का चुनाव करना था और बैठक के चेयरमैन के रूप में जाकिर हुसैन को चुना गया था। उच्च न्यायालय ने अब अवमानना याचिका को खारिज कर दिया है और मुख्य याचिका जिसमें बोर्ड के सदस्यों के चयन की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है उस पर सुनवाई अब अदालत में मौजूदगी वाली सुनवाई आरंभ होने के बाद करने का निर्णय लिया है।
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एडवोकेट मोहम्मद अरशद ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करते हुए बताया था कि हरियाणा वक्फ बोर्ड एक्ट 1995 में बना था जिसे 2013 में संशोधित किया गया। एक्ट में चुनाव और अन्य प्रक्रियाओं के लिए तय प्रावधान है और इन प्रावधानों के अनुरूप ही बोर्ड का संचालन होता है। एक्ट के अनुरूप बोर्ड के सदस्यों को नामित करने की तय प्रक्रिया है। सरकार चाहे तो इन्हें खुद नामित कर सकती है लेकिन इसके लिए उसे लिखित में इसका कारण सौंपना जरूरी है। याची ने कहा था कि नूंह के पूर्व विधायक जाकिर हुसैन को नामित करते हुए सारी प्रक्रियाओं को दर किनार कर दिया गया।
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याचिकाकर्ता ने कहा था कि एडवोकेट जनरल ने आश्वासन दिया था कि मुख्य याचिका पर अगली सुनवाई तक चेयरमैन चयन के लिए बैठक आयोजित नहीं की जाएगी। एडवोकेट जनरल की ओर से बताया गया कि बोर्ड के चेयरमैन के चयन की बैठक पर रोक थी न की बोर्ड की बैठक पर। न तो चेयरमैन के चुनाव की बैठक हुई है और ना ही जाकिर हुसैन को बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया गया। यह बोर्ड की एक आम बैठक थी जिसे आयोजित करने के लिए उस बैठक के चेयरमैन का चुनाव करना था और बैठक के चेयरमैन के रूप में जाकिर हुसैन को चुना गया था। उच्च न्यायालय ने अब अवमानना याचिका को खारिज कर दिया है और मुख्य याचिका जिसमें बोर्ड के सदस्यों के चयन की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है उस पर सुनवाई अब अदालत में मौजूदगी वाली सुनवाई आरंभ होने के बाद करने का निर्णय लिया है।
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