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Noida News: अदालत ने मारपीट मामले में तीनों आरोपियों को किया बरी
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। वर्ष 2013 में थाना सूरजपुर क्षेत्र में दुकान पर मारपीट, गाली-गलौज और जातिसूचक शब्द कहने के मामले में विशेष न्यायाधीश की अदालत ने तीनों आरोपियों सतेन्द्र, अंकित लोहिया और जोन्टी उर्फ अमन अवान को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन अपने आरोप संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
अभियोजन के अनुसार वादी गजेन्द्र सिंह ने 30 दिसंबर 2013 को थाना सूरजपुर में तहरीर दी थी। इसमें कहा गया कि 29 दिसंबर 2013 की शाम पिको रफू की दुकान पर उनकी पत्नी और पुत्र मौजूद थे। तभी देवेन्द्र पुत्र सुन्दर और अमन उर्फ जोन्टी, सतेन्द्र और अंकित लोहिया समेत 10-12 अज्ञात युवक पहुंचे। उन्होंने जातिसूचक शब्द कहकर गालियां दीं, विरोध करने पर डंडे और लात-घूंसों से मारपीट की और पिस्टल निकालकर जान से मारने तथा दुकान में आग लगाने की धमकी दी। घटना में वादी की पत्नी रामवती और पुत्र अनिल को चोटें आई थीं। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोप-पत्र दाखिल किया था। अदालत ने कहा कि मेडिकल दस्तावेजों से यह तो साबित होता है कि घटना की तारीख पर घायलों को चोटें आई थीं, लेकिन ये चोटें आरोपियों ने पहुंचाईं, यह अभियोजन साक्ष्य से स्थापित नहीं होता। गवाहों ने एक समान बयान देकर अभियोजन कथानक का समर्थन नहीं किया। धारा 313 के तहत बयान में आरोपियों ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए झूठा फंसाए जाने की बात कही थी। अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया।
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ग्रेटर नोएडा। वर्ष 2013 में थाना सूरजपुर क्षेत्र में दुकान पर मारपीट, गाली-गलौज और जातिसूचक शब्द कहने के मामले में विशेष न्यायाधीश की अदालत ने तीनों आरोपियों सतेन्द्र, अंकित लोहिया और जोन्टी उर्फ अमन अवान को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन अपने आरोप संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
अभियोजन के अनुसार वादी गजेन्द्र सिंह ने 30 दिसंबर 2013 को थाना सूरजपुर में तहरीर दी थी। इसमें कहा गया कि 29 दिसंबर 2013 की शाम पिको रफू की दुकान पर उनकी पत्नी और पुत्र मौजूद थे। तभी देवेन्द्र पुत्र सुन्दर और अमन उर्फ जोन्टी, सतेन्द्र और अंकित लोहिया समेत 10-12 अज्ञात युवक पहुंचे। उन्होंने जातिसूचक शब्द कहकर गालियां दीं, विरोध करने पर डंडे और लात-घूंसों से मारपीट की और पिस्टल निकालकर जान से मारने तथा दुकान में आग लगाने की धमकी दी। घटना में वादी की पत्नी रामवती और पुत्र अनिल को चोटें आई थीं। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोप-पत्र दाखिल किया था। अदालत ने कहा कि मेडिकल दस्तावेजों से यह तो साबित होता है कि घटना की तारीख पर घायलों को चोटें आई थीं, लेकिन ये चोटें आरोपियों ने पहुंचाईं, यह अभियोजन साक्ष्य से स्थापित नहीं होता। गवाहों ने एक समान बयान देकर अभियोजन कथानक का समर्थन नहीं किया। धारा 313 के तहत बयान में आरोपियों ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए झूठा फंसाए जाने की बात कही थी। अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया।
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