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जिला अस्पताल से बना कोरोना जांच सर्टिफिकेट एयरपोर्ट पर वैध नहीं

Sun, 07 Mar 2021 12:02 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 07 Mar 2021 12:02 AM IST
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Corona examination certificate made from district hospital is not valid at the airport
नोएडा। हवाई सफर से पहले कोरोना से जुड़े निर्देशों को जानकारी जरूर कर ले, सिस्टम के फेर में फंसकर पैसे और समय बर्बादी के अलावा कुछ हाथ नहीं लगेगा। सेक्टर 30 स्थित जिला अस्पताल में सामने आए एक ऐसे मामले ने सिस्टम की पोल खोल दी है। विदेश जाने के लिए बुजुर्ग दंपती द्वारा जिला अस्पताल से बनवाया गया सर्र्टिफिकेट एयरपोर्ट पर वैध नहीं माना गया। बुजुर्ग दंपती की लाख मिन्नतों के बाद अधिकारियों ने उन्हें हवाई जहाज में बैठने नहीं दिया। इसके बाद भी बुजुर्ग दंपती का समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
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सेक्टर-27 स्थित कैलाश अस्पताल में कार्यरत डॉ. एचके चंद्रमणी पत्नी मंजू के साथ विदेश यात्रा करने वाले थे। इसके लिए उन्होंने 46 हजार रुपये में एयर इंडिया का टिकट बुक कराया था। टिकट बुकिंग के दौरान उन्हें सरकारी अस्पताल से कोविड जांच रिपोर्ट लाने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने जिला अस्पताल में कोविड जांच कराई। इसके बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी को दिखाने के लिए वैध दस्तावेज मांगा।
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रिपोर्ट आने में समय लगने के कारण अस्पताल प्रशासन ने अपने लेटर पैड पर जांच और आईडी सहित जरूरी सूचनाएं लिखकर दे दीं। उस पर अस्पताल की मुहर थी, लेकिन एयरपोर्ट स्टाफ ने इसे वैध दस्तावेज मानने से इनकार कर दिया। दंपती को बताया गया कि प्रिंटेड फार्म में उन्हें रिपोर्ट चाहिए। बिना उसके यात्रा की अनुमति नहीं दी जा सकती है। डॉ. एच के चंद्रमणि ने कर्मचारियों को बताया कि वह खुद एक डॉक्टर हैं और राम मनोहर लोहिया एवं कैलाश जैसे अस्पतालों में कार्य अनुभव है। यही नहीं पूर्व में स्वास्थ्य विभाग में ज्वाइंट सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत रह चुके हैं।
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उन्होंने नियमों का पालन करते हुए सारी प्रक्रियाओं को पूरा किया है। उनके लाख मिन्नतों के बाद भी एयरपोर्ट प्रबंधन एक न सुनी। अब वह दो दिन से आर्थिक, मानसिक परेशानी सहते हुए पत्नी के साथ समस्या के समाधान के लिए भटक रहे हैं, लेकिन कोई मदद नहीं मिल रही है।
हृदय रोग ने बढ़ाई दिक्कत
डॉ. एचके चंद्रमणि ने कहा कि उनकी आयु 73 और पत्नी की उम्र 61 वर्ष है। वह 30 साल से हृदय रोग से पीड़ित हैं और उसका इलाज करा रहे हैं। 5 बार सर्जरी भी हो चुकी है। ऐसे में घंटों एयरपोर्ट अधिकारी एवं जिला अस्पताल में चक्कर काटने से दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। उनके लिए यह यात्रा जरूरी थी।

मामले में एयरपोर्ट स्टाफ की गलती है। जिला अस्पताल के लेटर पर जरूरी जानकारियां दी गई थीं। यदि उन्हें कोई संदेह था तो दंपती के पंजीकृत मोबाइल नंबर लेकर ऑनलाइन रिपोर्ट चेक कर सकते थे।
डॉ. रेनू अग्रवाल, सीएमएस, जिला अस्पताल
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