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सोसाइटियों के पार्कों में फुटबॉल-क्रिकेट नहीं खेल पाएंगे बच्चे
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नोएडा। नोएडा की कई सोसाइटियों के पार्कों में बच्चे अब क्रिकेट और फुटबॉल नहीं खेल सकेंगे। प्राधिकरण ने इस प्रतिबंध लगा दिया है। प्राधिकरण की ओर से ज्यादातर पार्कों में बोर्ड लगाकर इसकी सूचना सार्वजनिक कर दी गई है। निवासियों ने प्राधिकरण अधिकारियों की इस कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया है।
विश्व हिंदू महासंघ की मातृशक्ति संगठन की अध्यक्ष संप्रिती दत्ता ने बताया कि प्राधिकरण ने सेक्टर-47 के सेंट्रल पार्क, सेक्टर-40 के पार्क, सेक्टर-40 के बी ब्लॉक पार्क, सेक्टर-40 में साईं बाबा मंदिर के सामने बने पार्क और सेक्टर-39 के पार्क में बोर्ड लगा दिए हैं। इन पर लिखा गया है कि 14 साल से ज्यादा की उम्र वाले बच्चों को झूला झूलने से प्रतिबंधित किया गया है। इसके अलावा कोई भी व्यक्ति इन पार्क में पालतू कुत्तों को भी नहीं ले जा सकेगा। बच्चे यहां क्रिकेट और फुटबॉल भी नहीं खेल सकते हैं।
दत्ता का कहना है कि कोई भी उद्यान किसी व्यक्ति विशेष, समुदाय विशेष या प्राधिकरण की निजी संपत्ति नहीं है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति या संस्था इन पर अपनी मनमानी नहीं चला सकती। बच्चे पार्क में नहीं तो कहां खेलेंगे। बच्चों के खेलने पर कोई किसी प्रकार रोक लगा सकता है। पार्कों में लगाए गए नोटिस बोर्ड के सभी बिंदु न केवल नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर हस्तक्षेप करते हैं, बल्कि उनके बीच भेद भाव करने की मानसिकता को बढ़ावा देते हैं। इनके खिलाफ अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
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विश्व हिंदू महासंघ की मातृशक्ति संगठन की अध्यक्ष संप्रिती दत्ता ने बताया कि प्राधिकरण ने सेक्टर-47 के सेंट्रल पार्क, सेक्टर-40 के पार्क, सेक्टर-40 के बी ब्लॉक पार्क, सेक्टर-40 में साईं बाबा मंदिर के सामने बने पार्क और सेक्टर-39 के पार्क में बोर्ड लगा दिए हैं। इन पर लिखा गया है कि 14 साल से ज्यादा की उम्र वाले बच्चों को झूला झूलने से प्रतिबंधित किया गया है। इसके अलावा कोई भी व्यक्ति इन पार्क में पालतू कुत्तों को भी नहीं ले जा सकेगा। बच्चे यहां क्रिकेट और फुटबॉल भी नहीं खेल सकते हैं।
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दत्ता का कहना है कि कोई भी उद्यान किसी व्यक्ति विशेष, समुदाय विशेष या प्राधिकरण की निजी संपत्ति नहीं है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति या संस्था इन पर अपनी मनमानी नहीं चला सकती। बच्चे पार्क में नहीं तो कहां खेलेंगे। बच्चों के खेलने पर कोई किसी प्रकार रोक लगा सकता है। पार्कों में लगाए गए नोटिस बोर्ड के सभी बिंदु न केवल नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर हस्तक्षेप करते हैं, बल्कि उनके बीच भेद भाव करने की मानसिकता को बढ़ावा देते हैं। इनके खिलाफ अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
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