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टूलकिट से खुद करें टीबी की जांच, डॉक्टरों से भी फोन पर लें सलाह
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फिरोजपुर झिरका। टीबी की जांच और इलाज सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त है। इलाज के दौरान प्रत्येक मरीज को महीने में 500 रुपये भी सरकार की तरफ से दिए जाते हैं। यह बातें जिला सिविल सर्जन डॉ. सुरेंद्र यादव ने जिला नागरिक अस्पताल अलआफिया मांडीखेड़ा में अंतरराष्ट्रीय टीबी दिवस के मौके पर कही। उन्होंने कहा कि गैर सरकारी संगठन जेडएमक्यू ने एमडीआर टीबी के इलाज की टूलकिट जारी की है। जिसमें मरीज की सभी समस्याओं का समाधान फोन पर ही डॉक्टर से बातचीत करके हो सकेगा। टूलकिट से लोग घर बैठे अपनी जांच कर सकेंगे, जिसके तहत संस्था मरीजों के घर से सैंपल उठाएगी।
जिला स्वास्थ्य विभाग एवं गैर सरकारी संगठन जेडएमक्यू की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में सिविल सर्जन ने जेडएमक्यू संस्था की दो पुस्तकों का अनावरण किया। जिला टीबी अधिकारी डॉ. प्रवीण राज तंवर ने कहा कि जिले में 3000 से अधिक मरीज प्रत्येक वर्ष आते हैं। उनकी जांच और इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पूरी व्यवस्था मुफ्त में की हुई है। मरीज का एक रुपया खर्च नहीं होता है। वहीं उसे 500 रुपये प्रतिमाह दिए भी जाते हैं। उसके लिए मरीजों को अपना आधार कार्ड और बैंक पासबुक की फोटो कॉपी अस्पताल में जमा करनी होता है।
संस्था की हेमलता यादव ने कहा कि टीबी सेल्फ स्कैनिंग टूलकिट का मकसद टीबी के बारे में अधिक से अधिक जानकारी घर बैठे देना है। वहीं मरीज डॉक्टर द्वारा सीधा वार्तालाप कर सकता है। संस्था देश के सबसे पिछड़े नूंह जिले में पिछले 6 साल से काम कर रही हैं। इस मौके पर संस्था के जिला प्रभारी वसीम अकरम, डॉ. हेमंत, डॉ. आरके सिंगला, डॉ. पंकज वत्स आदि मौजूद रहे।
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जिला स्वास्थ्य विभाग एवं गैर सरकारी संगठन जेडएमक्यू की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में सिविल सर्जन ने जेडएमक्यू संस्था की दो पुस्तकों का अनावरण किया। जिला टीबी अधिकारी डॉ. प्रवीण राज तंवर ने कहा कि जिले में 3000 से अधिक मरीज प्रत्येक वर्ष आते हैं। उनकी जांच और इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पूरी व्यवस्था मुफ्त में की हुई है। मरीज का एक रुपया खर्च नहीं होता है। वहीं उसे 500 रुपये प्रतिमाह दिए भी जाते हैं। उसके लिए मरीजों को अपना आधार कार्ड और बैंक पासबुक की फोटो कॉपी अस्पताल में जमा करनी होता है।
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संस्था की हेमलता यादव ने कहा कि टीबी सेल्फ स्कैनिंग टूलकिट का मकसद टीबी के बारे में अधिक से अधिक जानकारी घर बैठे देना है। वहीं मरीज डॉक्टर द्वारा सीधा वार्तालाप कर सकता है। संस्था देश के सबसे पिछड़े नूंह जिले में पिछले 6 साल से काम कर रही हैं। इस मौके पर संस्था के जिला प्रभारी वसीम अकरम, डॉ. हेमंत, डॉ. आरके सिंगला, डॉ. पंकज वत्स आदि मौजूद रहे।
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