एनबीसीसी के पूर्व सीजीएम पर कार्रवाई: सीबीआई और इनकम टैक्स की संयुक्त टीम ने मारा छापा, कैश और आभूषण मिले
सीबीआई और इनकम टैक्स की संयुक्त टीम ने देर रात छापा मारा था। मित्तल पर भष्ट्राचार का आरोप है। बताया जा रहा है कि पैसे गिनने के लिए मशीन मंगाई गई है।
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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भ्रष्टाचार के मामले में नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (एनबीसीसी) के पूर्व सीजीएम डीके मित्तल के दिल्ली-एनसीआर स्थित 10 ठिकानों पर छापे मारे। अब तक कार्रवाई में करीब 1.5 करोड़ नकद, 1.2 करोड़ के आभूषण, 69 लाख सावधि जमा राशि भी मिली है।
सीबीआई ने 38 करोड़ रुपये के अनुबंध में एक अपात्र निजी कंपनी का पक्ष लेने के लिए दिल्ली जल बोर्ड और एनबीसीसी के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एनबीसीसी के तत्कालीन महाप्रबंधक के आवास से संपत्ति के कई दस्तावेज भी मिले हैं। एनबीसीसी के तत्कालीन महाप्रबंधक डी के मित्तल और परियोजना कार्यकारी साधन कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व मुख्य, अभियंता समेत अन्य पर केस
जांच एजेंसी ने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के पूर्व अधिकारियों, मुख्य अभियंता जगदीश कुमार अरोड़ा, अधीक्षक अभियंता पी के गुप्ता, कार्यकारी अभियंता सुशील कुमार गोयल, सहायक अभियंता अशोक शर्मा, एएओ रंजीत कुमार के अलावा निजी कंपनी एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
एनबीसीसी पर झूठे प्रमाण, पत्र जारी करने का आरोप
सीबीआई के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि आरोप है कि आरोपियों ने निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए साजिश के तहत इसे तकनीकी तौर पर पात्र बनाया। आरोप है कि दिसंबर 2017 में पांच साल के लिए दिल्ली जल बोर्ड के विद्युत चुम्बकीय प्रवाह मीटरों की आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण व कमीशनिंग और संबंधित ओ एवं एम संचालन के लिए निविदा जारी की गई थी। बयान में कहा गया है, यह भी आरोप है कि संबंधित निजी कंपनी के साथ आरोपियों की मिलीभगत और एनबीसीसी द्वारा जारी झूठे प्रमाण पत्र व मनगढ़ंत बयान जारी किए जाने के कारण निजी कंपनी ने 38.02 करोड़ रुपये की निविदा हासिल की थी।