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मनरेगा घोटाले में 6 बीडीपीओ सहित 43 कर्मियों पर केस
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पलवल। विजिलेंस जांच में मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमिताएं उजागर होने के बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए रविवार को छह थानों में 6 खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों (बीडीपीओ) सहित 43 कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवाए। जिला विजिलेंस कमेटी के अध्यक्ष और अतिरिक्त उपायुक्त उत्तम सिंह द्वारा गठित कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। इस मामले में पहल भी दो केस दर्ज हो चुके हैं और 40 से अधिक कर्मचारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। गबन की राशि का अभी आकलन नहीं हो पाया है। पंचायत राज मंत्री देवेंद्र बबली ने पुलिस से मुकदमे दर्ज कर कार्रवाई रिपोर्ट का ब्योरा मांगा है।
अतिरिक्त उपायुक्त के निर्देश पर जिला परिषद की सीईओ मनीषा शर्मा ने सदर थाना, चांदहट, गदपुरी, होडल, हथीन और हसनपुर थाने के पृथला, अलावलपुर, हरफली, बड़ौली, राजूपुर खादर, घोड़ी, चांदहट, असावटा, बढ़ा, किशोरपुर, दुर्गापुर, टहरकी, जलालपुर, बुराका, कोट, मेहलूका, पावसर, रणसीका, मंढनाका, जोधपुर, गुलावद, कांशीपुर, रामगढ़, लुलवाड़ी, जटोली, बंचारी, भुलवाना, डाड़का, करमन, लाडियाका, पालड़ी समेत अन्य गांवों में हुए कार्यों में अनियमितताएं बरतने पर मुकदमे दर्ज करवाए हैं। आरोपियों में बीडीपीओ उपमा अरोड़ा, बीडीपीओ कुलदीप सिंह, बीडीपीओ नरेश कुमार, बीडीपीओ अमित कुमार, बीडीपीओ नरेंद्र मल्होत्रा, बीडीपीओ रेनू लता, एबीपीओ आनंद मलिक, मन्नू मलिक, मनोज कुमार, तालिब हुसैन, संजीत, संगीत, ग्राम सचिव दिनेश कुमार, गजराज सिंह, यशवीर, वीर सिंह, महेंद्र चौहान, महेश गौतम, मनोज कुमार, रवि भारद्वाज, कुंवरपाल, दिगम्बर, भीष्म, जय भगवान, संजीव, दिनेश, चरण सिंह, नरेंद्र, लक्ष्मण, फखरुद्दीन, अजय कुमार, अनिल पांडे, आलोक, शमीम, प्रवेश, कुलदीप, परशुराम, करण सिंह, रामबीर, अनिल कुमार, हरिओम शर्मा, विजयपाल और नवीन कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी व अमानत में खयानत के केस दर्ज करवाए हैं।
सभी खंडों में हुईं अनियमितताएं
गांवों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए छह खंड बनाए गए हैं, जिनमें पलवल, होडल, हथीन, हसनपुर, पृथला और बड़ौली शामिल हैं। वित्तीय सत्र 2020-2021 में कोरोना काल के दौरान सभी खंडों में मनरेगा के तहत हुए कार्यों में अनियमितताएं बरती गईं। जिला परिषद के पूर्व सीईओ प्रशांत द्वारा की गई जांच में यह घोटाला उजागर हुआ। इसके बाद 8 कर्मचारियों को नौकरी से हटाया गया, जबकि 8 कर्मचारी स्वेच्छा से इस्तीफा दे गए। इसके बाद मनरेगा लोकपाल पंकज शर्मा ने मामले की जांच की तो चौंकाने वाले खुुलासे हुए। लोकपाल ने दो गांवों के निवर्तमान सरपंच सहित 13 लोगों पर एक-एक हजार का जुर्माना लगाया तथा 3.61 लाख रुपये वसूलने के निर्देश दिए। मामला मुख्यमंत्री दरबार तक जा पहुंचा और पंचायत विभाग ने चंडीगढ़ से दो बार टीम जांच के लिए पलवल भेजी। जिला विजिलेंस कमेटी के अध्यक्ष व एडीसी उत्तम सिंह के नेतृत्व में टीम ने सभी खंडों की जांच की और रिपोर्ट चंडीगढ़ भेज गई।
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संबंधित अधिकारियों के दर्ज होंगे बयान
डीएसपी मुख्यालय अनिल कुमार के अनुसार सीईओ जिला परिषद के बयान पर अलग-अलग थानों में छह मुकदमे दर्ज किए गए हैं। जांच के लिए सेक्शन 91 का नोटिस जारी कर संबंधित अधिकारियों से रिकॉर्ड मांगा जाएगा और उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। जांच के दौरान जो भी अधिकारी और कर्मचारी अनियमितताओं में संलिप्त पाया जाएगा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और गबन की राशि वसूल की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री से शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
बीती 28 अप्रैल को डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला पलवल आए थे। इस दौरान उनके समक्ष मनरेगा घोटाले का मामला उठाया गया। चौटाला ने तुरंत संज्ञान लेते हुए मुकदमे दर्ज करने के निर्देश दिए। उपमुख्यमंत्री के निर्देशानुसार अभी तक आठ मामले दर्ज हो चुके हैं। उन्होंने पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली को पूरे मामले में नजर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
क्या-क्या अनियमितताएं हुईं
- नाबालिग और 80 साल से अधिक आयु के लोगों के फर्जी जॉब कार्ड बनाकर राशि उठाई गई।
- 27 गांवों में पांच ट्रैक्टरों से 70 लाख रुपये की मिट्टी ढुलाई की गई।
- एक रास्ते को कागजों में दो दो बार बना दिखाया गया, जबकि रास्ता बनाया ही नहीं गया।
- नियमों के अनुसार गांव के रास्तों, पार्कों व श्मशान घाटों में मिट्टी नहीं डाली गई।
- रास्तों में डालने वाली गिट्टी व इंटरलॉकिंग टाइल्स के नाम पर फर्जी बिल पास कराए गए।
- फर्जी ठेकेदारों व निर्माण सामग्री सप्लायर के नाम बिल बनाकर राशि निकाली गई।
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अतिरिक्त उपायुक्त के निर्देश पर जिला परिषद की सीईओ मनीषा शर्मा ने सदर थाना, चांदहट, गदपुरी, होडल, हथीन और हसनपुर थाने के पृथला, अलावलपुर, हरफली, बड़ौली, राजूपुर खादर, घोड़ी, चांदहट, असावटा, बढ़ा, किशोरपुर, दुर्गापुर, टहरकी, जलालपुर, बुराका, कोट, मेहलूका, पावसर, रणसीका, मंढनाका, जोधपुर, गुलावद, कांशीपुर, रामगढ़, लुलवाड़ी, जटोली, बंचारी, भुलवाना, डाड़का, करमन, लाडियाका, पालड़ी समेत अन्य गांवों में हुए कार्यों में अनियमितताएं बरतने पर मुकदमे दर्ज करवाए हैं। आरोपियों में बीडीपीओ उपमा अरोड़ा, बीडीपीओ कुलदीप सिंह, बीडीपीओ नरेश कुमार, बीडीपीओ अमित कुमार, बीडीपीओ नरेंद्र मल्होत्रा, बीडीपीओ रेनू लता, एबीपीओ आनंद मलिक, मन्नू मलिक, मनोज कुमार, तालिब हुसैन, संजीत, संगीत, ग्राम सचिव दिनेश कुमार, गजराज सिंह, यशवीर, वीर सिंह, महेंद्र चौहान, महेश गौतम, मनोज कुमार, रवि भारद्वाज, कुंवरपाल, दिगम्बर, भीष्म, जय भगवान, संजीव, दिनेश, चरण सिंह, नरेंद्र, लक्ष्मण, फखरुद्दीन, अजय कुमार, अनिल पांडे, आलोक, शमीम, प्रवेश, कुलदीप, परशुराम, करण सिंह, रामबीर, अनिल कुमार, हरिओम शर्मा, विजयपाल और नवीन कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी व अमानत में खयानत के केस दर्ज करवाए हैं।
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सभी खंडों में हुईं अनियमितताएं
गांवों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए छह खंड बनाए गए हैं, जिनमें पलवल, होडल, हथीन, हसनपुर, पृथला और बड़ौली शामिल हैं। वित्तीय सत्र 2020-2021 में कोरोना काल के दौरान सभी खंडों में मनरेगा के तहत हुए कार्यों में अनियमितताएं बरती गईं। जिला परिषद के पूर्व सीईओ प्रशांत द्वारा की गई जांच में यह घोटाला उजागर हुआ। इसके बाद 8 कर्मचारियों को नौकरी से हटाया गया, जबकि 8 कर्मचारी स्वेच्छा से इस्तीफा दे गए। इसके बाद मनरेगा लोकपाल पंकज शर्मा ने मामले की जांच की तो चौंकाने वाले खुुलासे हुए। लोकपाल ने दो गांवों के निवर्तमान सरपंच सहित 13 लोगों पर एक-एक हजार का जुर्माना लगाया तथा 3.61 लाख रुपये वसूलने के निर्देश दिए। मामला मुख्यमंत्री दरबार तक जा पहुंचा और पंचायत विभाग ने चंडीगढ़ से दो बार टीम जांच के लिए पलवल भेजी। जिला विजिलेंस कमेटी के अध्यक्ष व एडीसी उत्तम सिंह के नेतृत्व में टीम ने सभी खंडों की जांच की और रिपोर्ट चंडीगढ़ भेज गई।
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संबंधित अधिकारियों के दर्ज होंगे बयान
डीएसपी मुख्यालय अनिल कुमार के अनुसार सीईओ जिला परिषद के बयान पर अलग-अलग थानों में छह मुकदमे दर्ज किए गए हैं। जांच के लिए सेक्शन 91 का नोटिस जारी कर संबंधित अधिकारियों से रिकॉर्ड मांगा जाएगा और उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। जांच के दौरान जो भी अधिकारी और कर्मचारी अनियमितताओं में संलिप्त पाया जाएगा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और गबन की राशि वसूल की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री से शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
बीती 28 अप्रैल को डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला पलवल आए थे। इस दौरान उनके समक्ष मनरेगा घोटाले का मामला उठाया गया। चौटाला ने तुरंत संज्ञान लेते हुए मुकदमे दर्ज करने के निर्देश दिए। उपमुख्यमंत्री के निर्देशानुसार अभी तक आठ मामले दर्ज हो चुके हैं। उन्होंने पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली को पूरे मामले में नजर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
क्या-क्या अनियमितताएं हुईं
- नाबालिग और 80 साल से अधिक आयु के लोगों के फर्जी जॉब कार्ड बनाकर राशि उठाई गई।
- 27 गांवों में पांच ट्रैक्टरों से 70 लाख रुपये की मिट्टी ढुलाई की गई।
- एक रास्ते को कागजों में दो दो बार बना दिखाया गया, जबकि रास्ता बनाया ही नहीं गया।
- नियमों के अनुसार गांव के रास्तों, पार्कों व श्मशान घाटों में मिट्टी नहीं डाली गई।
- रास्तों में डालने वाली गिट्टी व इंटरलॉकिंग टाइल्स के नाम पर फर्जी बिल पास कराए गए।
- फर्जी ठेकेदारों व निर्माण सामग्री सप्लायर के नाम बिल बनाकर राशि निकाली गई।