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यमुना एक्सप्रेसवे पर ट्रक से टकराई कैब, एक परिवार के तीन की मौत
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ग्रेटर नोएडा। कोतवाली बीटा दो क्षेत्र में रविवार सुबह यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो प्वाइंट से दो किमी पहले कन्नौज से लौट रहे एक परिवार की कैब ट्रक से टकरा गई। हादसे में कैब में सवार एक परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि गाड़ी को काटकर शव व घायलों को बाहर निकाला गया। पुलिस हादसे का कारण चालक को झपकी आना और तेज रफ्तार बता रही है।
दिल्ली के मोहन गार्डन उत्तम नगर निवासी सोनू कैब चालक हैं। मूलरूप से कन्नौज के रनवां गांव निवासी सोनू की मौसी की मृत्यु होने पर सभी वहां गए थे। सुबह परिवार के पांच सदस्य स्विफ्ट डिजायर कार से लौट रहे थे। करीब पांच बजे जेवर की तरफ से आते समय सड़क किनारे खड़े ट्रक से कैब टकराकर चार फीट अंदर तक घुस गई। कोतवाली बीटा दो पुलिस और आसपास के लोगों ने गैस कटर की मदद से कैब को काटकर घायल व शवों को बाहर निकाला। जबकि कैब को क्रेन की मदद से ट्रक के नीचे से बाहर निकाला गया। एडिशनल डीसीपी विशाल पांडे ने बताया कि चालक सोनू और मामा संतोष कुमार (40) घायल हो गए। जबकि सोनू की मां ऊषा देवी, पिता प्रताप सिंह और भतीजा सत्यपाल सिंह की मौत हो गई।
फिर रफ्तार व झपकी बनी कारण
हादसा जिस समय हुआ था, तब ट्रक एक्सप्रेसवे के किनारे खड़ा हुआ था। पुलिस को आशंका है कि चालक को नींद की झपकी आ गई थी। रफ्तार तेज होने से कार अनियंत्रित हो गई और ट्रक में जा घुसी। इंजन, अगली दो सीट और छत पिछली सीट तक पहुंच गए। इस कारण शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। पुलिस को शव बार निकालने में करीब एक घंटा लग गया।
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अभी भी किनारे पर खड़े रहते है ट्रक
एक्सप्रेसवे पर होने वाले हादसों में प्रमुख कारणों में से एक किनारे पर ट्रकों का खड़े रहना है। यमुना प्राधिकरण ने एक्सप्रेसवे के किनारे पर ट्रक खड़े नहीं होने का आदेश दिया है, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है। चालक किनारे पर ट्रक खड़ा कर खाना या आराम करते हैं। वहीं, खराब ट्रकों को भी समय से नहीं हटाया जाता।
मौत की खबर सुनकर सभी रह गए अवाक
तालग्राम (कन्नौज)। रनवां गांव में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत की खबर मिलते ही कोहराम मच गया। परिजनों ने बताया कि रनवां गांव निवासी प्रताप सिंह वर्ष 1990 में दिल्ली चले गए थे। वहां फैक्ट्री में काम करने लगे। उन्होंने पत्नी ऊषा और पुत्र सोनू को भी बुला लिया। दस साल पहले भतीजा सत्यपाल भी उसी फैक्ट्री में काम करने लगा। ये लोग हर साल गांव घूमने आते थे। दो दिन पहले साली की मौत पर प्रताप सिंह परिवार के साथ हसेरन आए थे। दोपहर में संतोष के साथ रनवां गांव आ गए। शाम को कार से दिल्ली के लिए रवाना हुए। वहीं, सत्यपाल की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पत्नी मीरा देवी का हाल बेहाल है। कक्षा चार में पढ़ने वाली वंदना (9), कक्षा दो में पढ़ने वाला रुचित (7), छोटे बेटे तन्नू (3) को यह पता नहीं कि पापा के साथ अचानक क्या हो गया।
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दिल्ली के मोहन गार्डन उत्तम नगर निवासी सोनू कैब चालक हैं। मूलरूप से कन्नौज के रनवां गांव निवासी सोनू की मौसी की मृत्यु होने पर सभी वहां गए थे। सुबह परिवार के पांच सदस्य स्विफ्ट डिजायर कार से लौट रहे थे। करीब पांच बजे जेवर की तरफ से आते समय सड़क किनारे खड़े ट्रक से कैब टकराकर चार फीट अंदर तक घुस गई। कोतवाली बीटा दो पुलिस और आसपास के लोगों ने गैस कटर की मदद से कैब को काटकर घायल व शवों को बाहर निकाला। जबकि कैब को क्रेन की मदद से ट्रक के नीचे से बाहर निकाला गया। एडिशनल डीसीपी विशाल पांडे ने बताया कि चालक सोनू और मामा संतोष कुमार (40) घायल हो गए। जबकि सोनू की मां ऊषा देवी, पिता प्रताप सिंह और भतीजा सत्यपाल सिंह की मौत हो गई।
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फिर रफ्तार व झपकी बनी कारण
हादसा जिस समय हुआ था, तब ट्रक एक्सप्रेसवे के किनारे खड़ा हुआ था। पुलिस को आशंका है कि चालक को नींद की झपकी आ गई थी। रफ्तार तेज होने से कार अनियंत्रित हो गई और ट्रक में जा घुसी। इंजन, अगली दो सीट और छत पिछली सीट तक पहुंच गए। इस कारण शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। पुलिस को शव बार निकालने में करीब एक घंटा लग गया।
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अभी भी किनारे पर खड़े रहते है ट्रक
एक्सप्रेसवे पर होने वाले हादसों में प्रमुख कारणों में से एक किनारे पर ट्रकों का खड़े रहना है। यमुना प्राधिकरण ने एक्सप्रेसवे के किनारे पर ट्रक खड़े नहीं होने का आदेश दिया है, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है। चालक किनारे पर ट्रक खड़ा कर खाना या आराम करते हैं। वहीं, खराब ट्रकों को भी समय से नहीं हटाया जाता।
मौत की खबर सुनकर सभी रह गए अवाक
तालग्राम (कन्नौज)। रनवां गांव में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत की खबर मिलते ही कोहराम मच गया। परिजनों ने बताया कि रनवां गांव निवासी प्रताप सिंह वर्ष 1990 में दिल्ली चले गए थे। वहां फैक्ट्री में काम करने लगे। उन्होंने पत्नी ऊषा और पुत्र सोनू को भी बुला लिया। दस साल पहले भतीजा सत्यपाल भी उसी फैक्ट्री में काम करने लगा। ये लोग हर साल गांव घूमने आते थे। दो दिन पहले साली की मौत पर प्रताप सिंह परिवार के साथ हसेरन आए थे। दोपहर में संतोष के साथ रनवां गांव आ गए। शाम को कार से दिल्ली के लिए रवाना हुए। वहीं, सत्यपाल की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पत्नी मीरा देवी का हाल बेहाल है। कक्षा चार में पढ़ने वाली वंदना (9), कक्षा दो में पढ़ने वाला रुचित (7), छोटे बेटे तन्नू (3) को यह पता नहीं कि पापा के साथ अचानक क्या हो गया।