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बिल्डर-खरीदार मामला: नोएडा-ग्रेनो को देनी होगी एक माह में रिपोर्ट
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नोएडा और ग्रेनो प्राधिकरण को एक माह में देनी होगी रिपोर्ट
- बिल्डर-खरीदार मामले के समाधान के लिए फिर होगी बैठक, दोनों प्राधिकरणों के अलावा बिल्डर भी होंगे शामिल
- नीति आयोग के पूर्व चेयरमैन अमिताभ कांत की 11 बिंदुओं पर दी गई रिपोर्ट का होगा अध्ययन
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। बिल्डर-खरीदार मामले में नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को एक माह में रिपोर्ट देनी होगी। रिपोर्ट के आधार पर अगली बैठक में इस मामले के समाधान के बिंदुओं पर चर्चा होगी। इसमें नीति आयोग के पूर्व चेयरमैन अमिताभ कांत की 11 बिंदुओं पर प्रस्तावित रिपोर्ट का अध्ययन करने को भी कहा गया है। रिपोर्ट में अमिताभ कांत के प्रस्तावित रिपोर्ट के आधार पर सलाह देनी होगी। इसका मकसद बिल्डर-खरीदार मामले का समाधान करना होगा।
दरअसल, बीते दिनों औद्योगिक विकास आयुक्त और नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन मनोज कुमार सिंह ने बिल्डर-खरीदार मामले पर गहन चर्चा की। प्राधिकरण के अधिकारियों ने अपनी खुद की बनाई रिपोर्ट के अलावा अमिताभ कांत की 11 बिंदुओं की रिपोर्ट को उनके सामने रखा। रिपोर्ट के आधार पर उस दिन कोई फैसला नहीं हुआ। प्राधिकरण के सूत्रों का कहना है कि चेयरमैन ने इस मामले में उस दिन हां या न में से कुछ भी नहीं कहा। उन्होंने इस बाबत दोनों प्राधिकरणों को कुछ निर्देश दिए।
अमिताभ कांत की रिपोर्ट के आधार पर बिल्डरों को दिए जाने वाले प्रस्तावित जीरो पीरियड अवधि को लेकर बकाये की गणना दोबारा करनी होगी। इसमें चार साल की अवधि, जिसमें अप्रैल 2020 से सितंबर 2021 तक कोविड -19 के काल के अलावा अगस्त 2013 से अगस्त 2015 तक एनजीटी की ओर से दिए गए निर्देश की अवधि में हुए काम बंदी के आधार पर छूट होगी। कमेटी ने जून 2020 से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) के आधार पर छूट देने का प्रस्ताव दिया है। अब इस आधार पर प्राधिकरण दोबारा गणना करेगा और यह पता करेगा कि इतना छूट देने के बाद प्राधिकरण को कितना नुकसान होगा।
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कमेटी ने कोडेवलपर के माध्यम से अधूरे प्रोजेक्ट पूरे करने का प्रस्ताव दिया है। अब प्राधिकरण की ओर से इस मामले में कोशिश जारी है। हालांकि अंतिम फैसला शासन का होगा कि इस मामले में पॉलिसी का निर्धारण किया जा सके। वहीं, अधूरे प्रोजेक्टों के मामले में प्लॉट के आंशिक सरेंडर का भी प्रस्ताव है। इसके माध्यम से दूसरे डेवलपर्स को भी मौका मिलेगा। साथ ही प्राधिकरण के बकाये पैसे वापस आएंगे। इसके अलावा प्राधिकरण को बिना बकाया दिए पांच साल के लिए परियोजना को समय विस्तार देने का भी प्रस्ताव है।
इस मामले में एक सीए फर्म इसके बकाये की गणना करेगी। खरीदारों पर किसी तरह के आर्थिक दंड, अतिरिक्त ब्याज आदि का दबाव नहीं डाला जाएगा। वहीं, कमेटी की ओर से अतिरिक्त एफएआर देने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा कई अन्य प्रस्ताव हैं, जिस पर मंथन करने के बाद दोनों प्राधिकरण एक रिपोर्ट बनाएंगे और मामले को सुलझाने के लिए अगली बैठक में आएंगे।
सूत्रों की मानें तो बकाये की गणना के बाद अगर बिल्डरों को छूट का तोहफा मिलता है तो नोएडा प्राधिकरण को 6 हजार करोड़ और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को 7400 करोड़ का नुकसान होगा।
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- बिल्डर-खरीदार मामले के समाधान के लिए फिर होगी बैठक, दोनों प्राधिकरणों के अलावा बिल्डर भी होंगे शामिल
- नीति आयोग के पूर्व चेयरमैन अमिताभ कांत की 11 बिंदुओं पर दी गई रिपोर्ट का होगा अध्ययन
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। बिल्डर-खरीदार मामले में नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को एक माह में रिपोर्ट देनी होगी। रिपोर्ट के आधार पर अगली बैठक में इस मामले के समाधान के बिंदुओं पर चर्चा होगी। इसमें नीति आयोग के पूर्व चेयरमैन अमिताभ कांत की 11 बिंदुओं पर प्रस्तावित रिपोर्ट का अध्ययन करने को भी कहा गया है। रिपोर्ट में अमिताभ कांत के प्रस्तावित रिपोर्ट के आधार पर सलाह देनी होगी। इसका मकसद बिल्डर-खरीदार मामले का समाधान करना होगा।
दरअसल, बीते दिनों औद्योगिक विकास आयुक्त और नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन मनोज कुमार सिंह ने बिल्डर-खरीदार मामले पर गहन चर्चा की। प्राधिकरण के अधिकारियों ने अपनी खुद की बनाई रिपोर्ट के अलावा अमिताभ कांत की 11 बिंदुओं की रिपोर्ट को उनके सामने रखा। रिपोर्ट के आधार पर उस दिन कोई फैसला नहीं हुआ। प्राधिकरण के सूत्रों का कहना है कि चेयरमैन ने इस मामले में उस दिन हां या न में से कुछ भी नहीं कहा। उन्होंने इस बाबत दोनों प्राधिकरणों को कुछ निर्देश दिए।
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अमिताभ कांत की रिपोर्ट के आधार पर बिल्डरों को दिए जाने वाले प्रस्तावित जीरो पीरियड अवधि को लेकर बकाये की गणना दोबारा करनी होगी। इसमें चार साल की अवधि, जिसमें अप्रैल 2020 से सितंबर 2021 तक कोविड -19 के काल के अलावा अगस्त 2013 से अगस्त 2015 तक एनजीटी की ओर से दिए गए निर्देश की अवधि में हुए काम बंदी के आधार पर छूट होगी। कमेटी ने जून 2020 से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) के आधार पर छूट देने का प्रस्ताव दिया है। अब इस आधार पर प्राधिकरण दोबारा गणना करेगा और यह पता करेगा कि इतना छूट देने के बाद प्राधिकरण को कितना नुकसान होगा।
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कमेटी ने कोडेवलपर के माध्यम से अधूरे प्रोजेक्ट पूरे करने का प्रस्ताव दिया है। अब प्राधिकरण की ओर से इस मामले में कोशिश जारी है। हालांकि अंतिम फैसला शासन का होगा कि इस मामले में पॉलिसी का निर्धारण किया जा सके। वहीं, अधूरे प्रोजेक्टों के मामले में प्लॉट के आंशिक सरेंडर का भी प्रस्ताव है। इसके माध्यम से दूसरे डेवलपर्स को भी मौका मिलेगा। साथ ही प्राधिकरण के बकाये पैसे वापस आएंगे। इसके अलावा प्राधिकरण को बिना बकाया दिए पांच साल के लिए परियोजना को समय विस्तार देने का भी प्रस्ताव है।
इस मामले में एक सीए फर्म इसके बकाये की गणना करेगी। खरीदारों पर किसी तरह के आर्थिक दंड, अतिरिक्त ब्याज आदि का दबाव नहीं डाला जाएगा। वहीं, कमेटी की ओर से अतिरिक्त एफएआर देने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा कई अन्य प्रस्ताव हैं, जिस पर मंथन करने के बाद दोनों प्राधिकरण एक रिपोर्ट बनाएंगे और मामले को सुलझाने के लिए अगली बैठक में आएंगे।
सूत्रों की मानें तो बकाये की गणना के बाद अगर बिल्डरों को छूट का तोहफा मिलता है तो नोएडा प्राधिकरण को 6 हजार करोड़ और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को 7400 करोड़ का नुकसान होगा।