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रिश्वत मामला : दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित, आला अफसर घेरे में

Fri, 22 Jan 2021 12:32 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 22 Jan 2021 12:32 AM IST
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Bribery case: Two-member inquiry committee formed, top officer in siege
रिश्वत मामला : दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित, आला अफसर घेरे में
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नोएडा। 50 हजार रुपये रिश्वत लेने के मामले में लाइनमैन के निलंबन के बाद अब अधीक्षण अभियंता प्रथम के स्तर से दो सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी गई है। वायरल ऑडियो में वरिष्ठ अफसराें को भी रिश्वत का हिस्सा पहुंचाने का जिक्र है, इसलिए आला अफसर भी जांच के घेरे में हैं। ये अफसर जेई, एसडीओ और एक्सईएन स्तर के हो सकते हैं। टीम जल्द ही आरोपी लाइनमैन से पूछताछ करेगी। बुधवार को विद्युत निगम के एक लाइनमैन द्वारा 50 हजार रुपये का रिश्वत लेने का ऑडियो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। आरोप है कि बिजली मीटर और कनेक्शन के एवज में लाइनमैन ने शीर्ष अफसरों का हवाला देकर पैसे की मांग की थी। चीफ इंजीनियर वीएन सिंह के निर्देश पर अधीक्षण अभियंता प्रथम ने एसडीओ प्रथम योगेंद्र कुमार और एई मीटर कपिल कुमार को मामले की जांच सौंपी है। विजिलेंस की टीम भी अपने स्तर से मामले की जांच कर रही है।
यह है प्रकरण
सेक्टर-67 स्थित 33/11 केवी उपकेंद्र के लाइनमैन मनीष यादव का गढ़ी चौखंडी गांव में उपभोक्ता से 50 हजार रुपये रिश्वत लेते ऑडियो और वीडियो वायरल हुआ था। वायरल वीडियोे के आधार पर लाइनमैन को निलंबित किया जा चुका है। निगम के मुख्य अभियंता वीएन सिंह ने बताया कि एसडीओ व एई जांच कर रिपोर्ट अधीक्षण अभियंता को देंगे। रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी।
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4 कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध
रिश्वत लेने के मामले में 4 कर्मियों की भूमिका संदिग्ध मिली है। बताया गया है कि लाइनमैन गठजोड़ बनाकर काम करता था। कुछ संविदा कर्मियाें को पैसा मिलता था तो कुछ को वह अपनी जेब से भी देता था। अफसरों ने इसे जांच का बिंदु मानते कार्रवाई शुरू कर दी है।
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पहले भी लगे आरोप, हर बार बच जाता था
आरोपी लाइनमैन मनीष यादव द्वारा रिश्वत लेने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी उसकी कई मामलों में जांच हुई है, लेकिन अधिकारियों से साठगांठ के कारण हर बार क्लीन चिट ले लेता था। लाइनमैन पर आरोप है कि पहले तो लोगों से बिजली चोरी कराता था और फिर खुद ही छापा मारता था। इसके बाद उपभोक्ता से पैसे की डील हो जाती थी तो छोड़ देता था और पैसे नहीं मिलते थे तो रिपोर्ट दर्ज करा देता था। उसने चार संविदा कर्मी ले रखे थे। उगाही के लिए इनको ही आगे रखता था। बता दें कि निर्माणाधीन मकानों के लिए अस्थायी कनेक्शन जारी किया जाता है, लेकिन आरोपी बिना कनेक्शन के ही लोगों को बिजली आपूर्ति कर पैसा वसूलता था। इसके अलावा अस्थायी कनेक्शनों के मीटरों की रीडिंग को कम करने के नाम पर भी वसूली की जाती थी। ब्यूरो

ममूरा, गढ़ी चौखंडी और डूब क्षेत्र में होती है लाखों की उगाही
विद्युत निगम के अधिकारियों को पता है कि डूब क्षेत्र में बिजली चोरी की जाती है। इसके एवज में मोटी रकम अधिकारियों तक पहुंचाई जाती है। कुछ कर्मचारी ठेकेदार बनकर बिजली चोरी कराते हैं। यह आज भी जारी है। वहीं, ममूरा, गढ़ी चौखंडी व बहलोलपुर में भी लाखों रुपये की उगाही की जाती है।
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